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बिजावर में रंग लाई प्रशासन की मेहनत, चार घंटे में 30 फीट के बोरवेल में फंसी नैन्सी को सकुशल निकाला

छतरपुर। मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में रविवार शाम बोरवेल में गिरी बच्ची को प्रशासन की टीम ने चंद घंटे में सकुशल बाहर निकाल लिया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस पर प्रशासन के अधिकारियों को धन्यवाद देते हुए खुशी जताई। उन्होंने ट्वीट किया- यह हम सबके लिए अत्यंत खुशी की बात है कि छतरपुर जिले के ललगुवां गांव में बोरवेल में गिरी बेटी को सकुशल निकाल लिया गया है। इसमें सहयोग करने वाले जिला प्रशासन के सभी साथियों और नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त करता हूं।

ललगुवां पाली गांव की 3 साल की यह बच्ची रविवार शाम खुले बोरवेल में गिर गई थी। उसके 30 फीट गहरे बोरवेल में फंसे होने की आशंका थी। जानकारी होते ही तुरंत टीम पहुंची और रेस्क्यू कर उसे बाहर निकाला। जेसीबी से बोरवेल के पास खुदाई की गई और कुछ ही देर में उसे बाहर निकाल लिया गया। एनडीआरएफ की टीम भी वहां भेजी गई थी।  कलेक्टर संदीप जीआर और सचिन शर्मा भी मौके पर  थे।

रेस्क्यू में जुटी टीमें

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, बिजावर तहसील के ग्राम ललगुवां में रविवार को शाम 5 बजे लगभग 3 वर्षीय रीना (नैंसी) पिता रवि विश्वकर्मा के बोरवेल में गिरने की घटना की जानकारी मिली। इस पर कलेक्टर संदीप जीआर के निर्देश पर जिला एवं पुलिस प्रशासन छतरपुर की टीम घटना स्थल पर पहुंची। एसडीएम और एसडीओपी की उपस्थिति में बच्ची को सुरक्षित रूप से निकालने के लिए बचाव कार्य शुरू किया गया। मौके पर जेसीबी मशीन सहित स्थानीय प्रशासन के संसाधन, कर्मचारी, पुलिस एवं होमगार्ड के जवान भी बच्ची को बचाने के कार्य में जुट गए।

जानकारी जुटा रहे अधिकारी

बोरवेल में गिरी बच्‍ची के परिवार के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। बोरवेल और खेत किसका इसका है इसकी भी अधिकारी जानकारी जुटा रहे हैं। अभी बोरवेल में बच्‍ची की हालत के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है। एसपी सचिन शर्मा का कहना है बच्ची को बाहर निकालने के लिए जिले के सभी संसाधन एकत्रित किए जा रहे हैं। बच्ची को जल्द से जल्द बाहर निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

पिछले साल भी गिरा था एक बच्चा

इससे पहले दिसंबर 2022 में बैतूल जिले के मांडवी गांव में 400 फीट गहरे खुले बोरवेल में 8 साल का बच्चा तन्मय साहू गिर गया था। वो 50 फीट की गहराई में फंसा था, जिसे करीब 84 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद भी नहीं बचाया जा सका था। सरकार और प्रशासन के बार-बार चेतावनी और तमाम समझाइश देने के बावजूद बोरवेल खुले छोड़े जा रहे हैं। जिससे इस तरह की घटनाएं हो रही हैं।

(इनपुट- धर्मेंद्र खरे)

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