पीपुल्स ब्यूरो,भोपाल। मध्यप्रदेश में शराब के नए ठेके एक अप्रैल से शुरू हो गए हैं। इसके बावजूद प्रदेश की बची हुई शराब दुकानों की नीलामी के लिए दसवां और अंतिम राउंड दूसरे दिन बुधवार को भी जारी रहा। 5,230 करोड़ रुपए के शराब ठेकों क लिए शाम तक करीब 3,000 करोड़ रुपए की बोलियां लग चुकी हैं। देर रात तक ह तस्वीर साफ हो सकेगी। इधर, 31 मार्च तक जिन दुकानों की नीलामी नहीं हुई थी, वहां पर आबकारी अमले ने शराब की बिक्री की।
प्रदेश भर में इस बार 26 शराब दुकानों के लिए कोई भी टेंडर नहीं आए। प्रदेश में कुल 3555 शराब दुकानें है।
राज्य सरकार ने आबकारी की राजस्व आय का लक्ष्य 19,952.89 करोड़ निर्धारित किया है। इसके बावजूद अभी तक विभिन्न राउंड के नीलामी में 12268.28 करोड़ रुपए वार्षिक मूल्य के विरूद्ध 15278.79 करोड रुपए प्राप्त हुए हैं, जो 20 प्रतिशत के लक्ष्य की वृद्धि के विरूद्ध 24.5 4 प्रतिशत की वृद्धि प्राप्त हुई है। विभाग को लक्ष्य हासिल करने के लिए 4,359 करोड़ रुपए की अतिरिक्त आय की जरूरत है। आबकारी अधिकारियों का मानना है कि यदि इस स्तर पर भी बोली को स्वीकर कर लिया जाये तब भी विगत वर्ष के मुकाबले लगभग 1,650 करोड़ रुपए का अधिक राजस्व प्राप्त होगा।
सरकार ने इस बार बड़े ठेकेदारों की मोनोपॉली खत्म करने के लिए 3 से 5 दुकानों के छोटे-छोटे समूह बनाए हैं। विगत वर्ष के 489 शराब ठेकेदार के मुकाबले इस वर्ष ठेकेदारों की संख्या बढ़कर लगभग दुगनी के करीब 860 हो गई है। अधिकारियों का दावा है कि इस वर्ष की आबकारी नीति ने मोनोपाली को ध्वस्त कर दिया है। यह भी एक बड़ी उपलब्धि है।
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अधिकारियों का कहना है कि इस वर्ष सरकार ने एक्साइज ड्यूटी नहीं बढ़ाई है। एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने पर राजस्व बिना किसी प्रयास के बढ़ जाता है। अत: एक्साइज ड्यूटी नहीं बढ़ने के बावजूद राजस्व की वृद्धि एक बड़ी उपलब्धि है।