Download App
Download on the App StoreGet it on Google Play
Breaking News

महाभारत कालीन शिवलिंग के चमत्कार!जहां झाड़ू और बैंगन चढ़ाने से बदलती है किस्मत?

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित पालन नाथ शिव मंदिर अपने अद्भुत चमत्कार और अनोखी परंपराओं के लिए प्रसिद्ध है। यह मंदिर महाभारत कालीन समय से जुड़ा हुआ है और यहां भक्त अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के बाद झाड़ू और बैंगन चढ़ाते हैं।
जहां झाड़ू और बैंगन चढ़ाने से बदलती है किस्मत?
Ai generated
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में एक प्राचीन और पौराणिक शिव मंदिर स्थित है, जिसे पालन नाथ शिव मंदिर कहा जाता है। यह मंदिर महाभारत कालीन समय से जुड़ा हुआ है और भक्तों के बीच अपनी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। कहा जाता है कि  यहां लोग अपनी मनोकामनाएं पूरी होने पर भगवान भोलेनाथ को झाड़ू और बैंगन चढ़ाते हैं।

    मंदिर का इतिहास

    पालन नाथ शिव मंदिर का इतिहास महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि भगवान शिव की शिवलिंग की स्थापना इसी समय हुई थी। यह मंदिर पालगांव में स्थित होने के कारण ‘पालन नाथ’ के नाम से जाना जाता है।

    महाभारत की कथा के अनुसार, पांडवों ने कौरवों से जुए में हारने के बाद 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास बिताया था। उनका अज्ञातवास राजा विराट के राज्य में बीता। वर्तमान में जो बड़खर गांव है, वह महाभारत काल में राजा विराट के साम्राज्य का हिस्सा था और इसे ‘विराटनगर’ कहा जाता था।

    माना जाता है कि इस क्षेत्र में पांडव अपने अस्त्र-शस्त्र रखने के लिए बड़े पेड़ों का इस्तेमाल करते थे। मंदिर परिसर में पहले एक समी का पेड़ था, जिस पर पांडव अपने अस्त्र रखते थे।

    मंदिर की खास परंपरा

    इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां मनोकामना पूरी होने पर भक्त झाड़ू और बैंगन चढ़ाते हैं। यह परंपरा समय के साथ चली आ रही है और दूर-दूर से लोग इसे निभाने आते हैं।
    भक्तों का मानना है कि यदि आपकी मनोकामना पूरी हो जाती है, तो मंदिर में अर्पित की गई झाड़ू और बैंगन का असर जीवन में सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य लाता है। इस परंपरा की वजह से मंदिर का महत्व और भी बढ़ गया है।

    Uploaded media

    सावन और महाशिवरात्रि का महत्त्व

    सोमवार का दिन इस मंदिर के लिए विशेष माना जाता है। हर सोमवार यहां भारी भीड़ लगती है। दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं और भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं।
    इसके अलावा, महाशिवरात्रि के अवसर पर भी लोग रुद्राभिषेक करने के लिए यहां आते हैं। भक्तों की भीड़ इस समय और भी बढ़ जाती है।

    अद्भुत रोग-निवारण परंपरा

    मंदिर में एक और अनोखी परंपरा है। अगर किसी पशु को बीमारी हो जाए, तो लोग ताक पर नमक रखकर उसे चढ़ाते हैं। अगले दिन उस बीमार पशु को वही नमक खिलाने पर उसे स्वास्थ्य लाभ होता है। इस परंपरा के कारण भी मंदिर अपनी अलग पहचान बना चुका है और लोग इसे सिर्फ पूजा स्थल नहीं बल्कि समस्या समाधान का केंद्र भी मानते हैं।

    लोग मानते हैं कि भगवान शिव की यहां की शिवलिंग पर पूजा और भेंट से हर मनोकामना पूरी होती है। मंदिर की इस अनोखी परंपरा ने इसे लखीमपुर खीरी का प्रमुख धार्मिक स्थल बना दिया है।

    महादेव पर चढ़ाते हैं बैंगन का चढ़ावा

    सभी देवताओं में भगवान शिव सबसे निराले हैं। जिस तरह महादेव निराले हैं, उसी तरह उन्हें चढ़ाया जाने वाला चढ़ावा भी निराला है। ऐसे ही बिहार के वैशाली जिले के अंडवाड़ा गांव स्थित शिव मंदिर जो पूरे क्षेत्र में बटेश्वरनाथ से मशहूर है, वहां श्रद्धालु बैंगन का चढ़ावा चढ़ाते है। खासकर महाशिवरात्रि के अवसर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं और महादेव पर जलाभिषेक करने के साथ ही बैगन चढ़ाते हैं। 
    बटेश्वनाथ मंदिर में बैगन का चढ़वा चढ़ाने के पीछे ऐसी मान्यता है कि मन में जो मनोकामना मानकर श्रद्धालु बैंगन चढ़ते हैं, भगवान उनकी मनोकामना जरूर पूरी करते हैं। 

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

    Latest Posts