सुबह-सुबह कांपा लद्दाख! 5.5 तीव्रता के भूकंप से दहला लेह, घरों से बाहर भागे लोग

लद्दाख का लेह गुरुवार सुबह तेज भूकंप के झटकों से दहल उठा। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी के मुताबिक, सुबह करीब 6:05 बजे 5.5 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र जमीन के करीब 10 किलोमीटर नीचे बताया गया है। तेज झटकों के कारण लोगों में अचानक दहशत फैल गई और कई लोग अपने घरों से बाहर निकलकर सुरक्षित जगहों पर पहुंच गए। नेशनल सेंटर फॉर सिस्मोलॉजी यानी NCS के मुताबिक, लेह में सुबह करीब 6 बजकर 5 मिनट पर 5.5 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप की गहराई जमीन के अंदर करीब 10 किलोमीटर बताई गई है। शुरुआती जानकारी के अनुसार, अभी तक भूकंप से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है। हालांकि, तेज झटकों के कारण लोगों में काफी देर तक दहशत बनी रही। भूकंप के बाद स्थानीय लोग अपने घरों और आसपास की स्थिति को देखते नजर आए।
10 किलोमीटर गहराई में था भूकंप का केंद्र
जानकारी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र 36.881 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 74.402 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था। भूकंप की गहराई करीब 10 किलोमीटर थी। भूकंप की गहराई और तीव्रता दोनों ही महत्वपूर्ण होती हैं। जब भूकंप जमीन के ज्यादा करीब आता है, तो उसके झटके कई बार सतह पर ज्यादा महसूस हो सकते हैं। लेह में आए इस भूकंप के झटके भी काफी तेज महसूस किए गए, जिसके चलते लोगों को अचानक घरों से बाहर निकलना पड़ा।
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सोते समय महसूस हुए तेज झटके
लेह में भूकंप उस समय आया, जब सुबह का वक्त था और कई लोग अभी अपने घरों में आराम कर रहे थे। अचानक घरों और आसपास की चीजों में कंपन महसूस होने लगा। कुछ ही सेकंड में लोगों को समझ आ गया कि धरती कांप रही है। तेज झटकों के कारण लोगों में घबराहट फैल गई। कई लोग बिना देर किए घरों से बाहर निकल आए। सड़कों और खुले स्थानों पर लोगों की भीड़ दिखाई देने लगी। भूकंप के बाद लोगों ने एक-दूसरे से संपर्क कर हालात की जानकारी ली। फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन प्रशासन और संबंधित एजेंसियां स्थिति पर नजर रख रही हैं।
5.5 तीव्रता का भूकंप कितना खतरनाक?
भूकंप की तीव्रता को रिक्टर स्केल पर मापा जाता है। भूकंप की तीव्रता जितनी ज्यादा होती है, उसके झटकों और संभावित नुकसान का खतरा भी उतना ही बढ़ सकता है। हालांकि नुकसान केवल तीव्रता पर निर्भर नहीं करता। भूकंप की गहराई, केंद्र से दूरी, जमीन की प्रकृति और इमारतों की मजबूती भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आम तौर पर 2.0 या उससे कम तीव्रता वाले भूकंप बहुत हल्के होते हैं और कई बार लोगों को उनका पता भी नहीं चलता। इन्हें माइक्रो भूकंप की श्रेणी में रखा जाता है। वहीं 4.5 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप को गंभीरता से लिया जाता है। ऐसे भूकंपों के झटके काफी बड़े क्षेत्र में महसूस किए जा सकते हैं और कमजोर इमारतों को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। 7.0 या उससे ज्यादा तीव्रता वाले भूकंप बेहद शक्तिशाली माने जाते हैं और इनके कारण बड़े स्तर पर नुकसान हो सकता है। लांकि 5.5 तीव्रता का हर भूकंप बड़ी तबाही लाए, यह जरूरी नहीं है। नुकसान इस बात पर भी निर्भर करता है कि भूकंप कितनी गहराई में आया और उसका केंद्र आबादी वाले क्षेत्र से कितनी दूरी पर था।
कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में महसूस हुए भूकंप
लेह में भूकंप आने से पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों में धरती कांपने की घटनाएं सामने आई हैं। पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र और दिल्ली-NCR समेत कई क्षेत्रों में भूकंप के झटके महसूस किए गए। इससे लोगों के बीच भूकंप को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि हर भूकंप के बाद किसी बड़े नुकसान की आशंका नहीं होती, लेकिन तेज झटकों के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी है।
नाशिक में 4.3 तीव्रता के भूकंप से हिली थी धरती
महाराष्ट्र के नाशिक जिले में भी हाल ही में भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। 8 अगस्त की रात करीब 10 बजे 4.3 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। इस भूकंप का केंद्र नाशिक जिले में था और इसकी गहराई जमीन के अंदर करीब 5 किलोमीटर थी। भूकंप का केंद्र आबादी वाले इलाके के आसपास होने के कारण नाशिक और आसपास के कुछ क्षेत्रों में भी झटके महसूस किए गए थे। हालांकि नाशिक में आए भूकंप से भी किसी बड़े नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई थी।
दिल्ली-NCR में भी आया था हल्का भूकंप
इससे पहले 2 अगस्त को दिल्ली-NCR में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए थे। NCS के मुताबिक, इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 2.9 थी। यह भूकंप रविवार तड़के करीब 4 बजकर 14 मिनट पर दर्ज किया गया था। इसका केंद्र दिल्ली के उत्तरी जिले में बताया गया था। तीव्रता कम होने के कारण इसका असर भी सीमित रहा और किसी तरह के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई।
भूकंप के दौरान क्या सावधानी रखें?
भूकंप आने पर घबराने के बजाय सुरक्षित रहने की कोशिश करनी चाहिए। अगर आप घर के अंदर हैं तो तुरंत बाहर भागने के बजाय किसी मजबूत मेज या फर्नीचर के नीचे जाकर सिर और गर्दन को सुरक्षित रखना बेहतर होता है। खिड़कियों, शीशों और भारी सामान से दूरी बनानी चाहिए। झटके रुकने के बाद ही सावधानी से बाहर निकलें। अगर आप किसी इमारत से बाहर आ रहे हैं तो लिफ्ट का इस्तेमाल करने से बचें और सीढ़ियों का उपयोग करें। खुले स्थान पर पहुंचने के बाद बिजली के खंभों, पेड़ों और कमजोर इमारतों से दूरी बनाए रखें।
लेह में फिलहाल स्थिति पर नजर
लेह में 5.5 तीव्रता के भूकंप के बाद फिलहाल सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है। फिर भी प्रशासन और संबंधित एजेंसियों की ओर से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। तेज भूकंप के बाद कई बार छोटे झटके यानी आफ्टरशॉक्स भी महसूस हो सकते हैं। इसलिए लोगों को सतर्क रहने और प्रशासन की ओर से जारी किसी भी जरूरी निर्देश का पालन करने की सलाह दी जाती है। लेह का यह भूकंप एक बार फिर याद दिलाता है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के लिए हमेशा तैयार रहना जरूरी है। सुरक्षित इमारतें, सही आपदा प्रबंधन और लोगों में जागरूकता ही किसी बड़े खतरे के समय नुकसान को कम करने में सबसे बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।











