Air India पर सरकार का बड़ा एक्शन! सुरक्षा में लापरवाही पर CEO तलब, DGCA को दिए कड़े निर्देश

एअर इंडिया की फुकेत से दिल्ली आ रही एक फ्लाइट में हुई गंभीर घटना ने सुरक्षा पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फ्लाइट के दौरान विमान को कई तकनीकी चेतावनियां मिलीं और तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। हालात उस समय और गंभीर हो गए, जब फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड यानी PIC का ड्रग टेस्ट मारिजुआना के लिए पॉजिटिव पाया गया।
मामले को केंद्र सरकार ने बेहद गंभीरता से लिया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एअर इंडिया के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब मांगा है। वहीं, डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी DGCA को पायलटों के ड्रग और डोप टेस्ट से जुड़े नियमों की समीक्षा कर उन्हें और सख्त बनाने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का साफ संदेश है कि विमान संचालन में किसी भी तरह की लापरवाही को स्वीकार नहीं किया जाएगा और जांच में अगर किसी की गलती सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
145 यात्रियों वाली फ्लाइट में अचानक बिगड़े हालात
यह मामला एअर इंडिया की फ्लाइट AI 2379 से जुड़ा है, जो थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आ रही थी। फ्लाइट में कुल 145 यात्री सवार थे। ओडिशा के ऊपर उड़ान के दौरान विमान को कई तरह की तकनीकी चेतावनियां मिलीं। रिपोर्टों के मुताबिक, विमान के तीनों हाइड्रोलिक सिस्टम से जुड़े अलर्ट सामने आए। इसके अलावा दरवाजे और एलिवेटर सिस्टम को लेकर भी चेतावनी मिली। इसी दौरान विमान का ऑटोपायलट भी बंद हो गया। इन तकनीकी समस्याओं के बीच विमान को तेज टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। स्थिति इतनी खराब हुई कि उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई करीब 300 फीट तक कम हो गई। अचानक हुए बदलाव और झटकों के कारण विमान में मौजूद लोगों को परेशानी हुई। इस घटना में करीब 20 यात्री और चार केबिन क्रू सदस्य घायल बताए गए हैं। घटना के बाद विमान की सुरक्षा और क्रू के कामकाज को लेकर जांच शुरू की गई।
पायलट के ड्रग टेस्ट ने बढ़ाई चिंता
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर बात फ्लाइट के पायलट-इन-कमांड का ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आना है। जांच के दौरान पायलट के नमूने में मारिजुआना की पुष्टि होने की बात सामने आई है। पायलट ने जांचकर्ताओं के सामने अपनी तरफ से अलग स्पष्टीकरण दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने कहा कि निजी परेशानियों के कारण उन्हें नींद से जुड़ी दवाएं लेने की सलाह दी गई थी। उनका दावा है कि उन्हीं दवाओं के कारण ड्रग टेस्ट का परिणाम पॉजिटिव आया। हालांकि, इस दावे की जांच की जा रही है। अधिकारियों की ओर से यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि पायलट ने वास्तव में कौन सी दवाएं ली थीं, कब ली थीं और क्या उनका उड़ान के दौरान पायलट की क्षमता पर कोई असर पड़ा था।
यानी फिलहाल सिर्फ टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर पूरी घटना का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। जांच में मेडिकल रिपोर्ट, दवाओं की जानकारी और फ्लाइट के दौरान पायलट के व्यवहार सहित कई पहलुओं को देखा जा रहा है।
केबिन क्रू ने पायलट के व्यवहार पर जताई थी चिंता
मामले में पायलट के व्यवहार को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, फ्लाइट के दौरान कुछ केबिन क्रू सदस्यों ने पायलट के व्यवहार को लेकर शिकायत की थी। कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पायलट सामान्य तरीके से व्यवहार नहीं कर रहे थे। यहां तक कि उनके कॉकपिट के फर्श पर बैठने और धूम्रपान करने की कोशिश करने जैसे आरोप भी सामने आए हैं। बताया गया है कि ऐसी स्थिति में केबिन क्रू को हस्तक्षेप करना पड़ा।
इन दावों की भी जांच की जा रही है। अगर जांच में यह साबित होता है कि पायलट ने किसी ऐसे पदार्थ का सेवन किया था जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित हुई और इसके बावजूद उन्होंने विमान उड़ाया, तो यह विमानन सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर मामला होगा।
सरकार ने एअर इंडिया से मांगा जवाब
घटना के बाद केंद्र सरकार ने एअर इंडिया के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाया है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने एअर इंडिया के CEO को तलब कर पूरे मामले पर जवाब मांगा है। सरकार ने एअरलाइन प्रबंधन को स्पष्ट संदेश दिया है कि ऑपरेशनल सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल कागजों पर नहीं होनी चाहिए। एअरलाइन को यह सुनिश्चित करना होगा कि पायलट, केबिन क्रू, विमान और ऑपरेशनल सिस्टम सभी तय सुरक्षा मानकों के अनुसार काम करें। सरकार की ओर से एअरलाइन को अपनी निगरानी व्यवस्था मजबूत करने और सुरक्षा प्रक्रियाओं की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं।
DGCA करेगा ड्रग टेस्ट नियमों की समीक्षा
इस घटना के बाद पायलटों के ड्रग और डोप टेस्ट से जुड़े नियम भी जांच के दायरे में आ गए हैं। DGCA को इन नियमों को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए गए हैं। विमान उड़ाने वाले पायलट की मानसिक और शारीरिक स्थिति बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी भी तरह का नशा या ऐसी दवा जिसका असर एकाग्रता, प्रतिक्रिया और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़े, विमान की सुरक्षा के लिए बड़ा जोखिम बन सकता है। इसी वजह से पायलटों के मेडिकल और ड्रग टेस्ट को लेकर नियम पहले से ही सख्त हैं। अब इस घटना के बाद इन नियमों की निगरानी और जांच प्रक्रिया को और मजबूत किए जाने की संभावना है।
अहमदाबाद हादसे के बाद फिर उठे सुरक्षा पर सवाल
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब एअर इंडिया पहले से ही एक बड़े विमान हादसे की जांच का सामना कर रही है। जून में अहमदाबाद में एअर इंडिया का विमान हादसे का शिकार हुआ था, जिसमें 260 लोगों की मौत हुई थी। उस हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। ऐसे में कुछ ही समय बाद एअर इंडिया की एक अन्य फ्लाइट में तकनीकी समस्याओं, टर्बुलेंस और पायलट के ड्रग टेस्ट से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद विमानन सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हालांकि, दोनों घटनाओं के बीच सीधा संबंध स्थापित करना अभी जल्दबाजी होगा। AI 2379 मामले की जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ हो सकेगा कि तकनीकी गड़बड़ियों, टर्बुलेंस और पायलट की स्थिति के बीच कोई संबंध था या नहीं।
दोषी पाए गए तो होगी कार्रवाई
सरकार ने संकेत दिया है कि जांच में अगर किसी व्यक्ति या अधिकारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरकार का फोकस इस बात पर है कि विमान संचालन में सुरक्षा मानकों से किसी भी कीमत पर समझौता न हो। एअरलाइन प्रबंधन को भी अपनी जिम्मेदारी तय करनी होगी और यह सुनिश्चित करना होगा कि पायलटों की मेडिकल फिटनेस, ड्रग टेस्ट और ऑपरेशनल प्रक्रियाओं की निगरानी प्रभावी तरीके से हो।
अब जांच के नतीजे पर टिकी नजर
फिलहाल इस पूरे मामले में कई सवालों के जवाब जांच के बाद ही मिलेंगे। पायलट के ड्रग टेस्ट में मारिजुआना कैसे पाया गया, उनके द्वारा ली गई दवाओं का क्या असर था, फ्लाइट के दौरान उनके व्यवहार की वास्तविक स्थिति क्या थी और विमान में आई तकनीकी चेतावनियों की वजह क्या थी- इन सभी की जांच की जा रही है।











