भोपाल। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं पूर्व विधायक कुणाल चौधरी ने कहा कि सरकार कृषि कल्याण वर्ष तो मना रही है, लेकिन नीतियों के कारण किसानों को अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही है और वे आर्थिक दबाव में हैं। उन्होंने विशेष रूप से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीदी में आ रही दिक्कतों की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि किसानों को घोषित लाभ पूरी तरह नहीं मिल रहा है। उन्होंने MSP पर 575 रुपए प्रति क्विंटल बोनस देने की मांग दोहराई और कहा कि वर्तमान वृद्धि किसानों के हित में पर्याप्त नहीं है।
प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि पहले गेहूं खरीदी की शुरुआत 16 मार्च से प्रस्तावित थी, जिसे अब 1 अप्रैल तक बढ़ा दिया गया है। इस बदलाव से किसानों को अपनी उपज बेचने में कठिनाई हो सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि खरीदी की अंतिम तिथि बढ़ाकर किसानों को पर्याप्त समय दिया जाए, ताकि वे बिना दबाव के अपनी फसल बेच सकें। साथ ही खरीदी प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
कुणाल चौधरी ने कहा कि किसानों पर बढ़ते कर्ज और ब्याज के बोझ को भी एक गंभीर समस्या है। उन्होंने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में संभावित वृद्धि से डीजल महंगा हो सकता है, जिसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ेगा। इसके अलावा, उर्वरकों के आयात पर निर्भरता और आपूर्ति में बाधा की आशंका भी किसानों के लिए चुनौती बन सकती है।
चौधरी ने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार समझौतों के कारण विदेशी कृषि उत्पादों के आयात में वृद्धि हो सकती है, जिससे देश के किसानों को मिलने वाले दाम प्रभावित होने की संभावना है। मक्का, सोयाबीन और कपास जैसी फसलों पर इसका असर पड़ सकता है। साथ ही, उर्वरक उत्पादन में गैस आपूर्ति की कमी जैसे तकनीकी कारणों से भविष्य में खाद की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई, जो आगामी खरीफ सीजन के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि MSP पर उचित बोनस, समयबद्ध और पारदर्शी खरीदी, कर्ज राहत, तथा अंतरराष्ट्रीय नीतियों में किसानों के हितों की सुरक्षा शामिल है। यह भी कहा गया कि यदि इन मुद्दों पर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो व्यापक स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।