इंदौर। लसूड़िया थाना क्षेत्र में देर रात चाय पीना एक रियल एस्टेट कंपनी के सेल्स मैनेजर को इतना महंगा पड़ेगा, इसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। मामूली बिल विवाद के बाद पुलिसकर्मियों पर खुलेआम मारपीट, थाने में कथित बर्बरता और रुपये छीनने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। मामला पुलिस स्तर पर दबता नजर आया, लेकिन जब फरियादी ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया तो पूरे घटनाक्रम पर न्यायालय ने सख्त रुख अपनाते हुए डीसीपी जोन-2 को 25 फरवरी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश दे दिए।
फरियादी हर्ष जावरिया के अनुसार, 28 दिसंबर 2025 की रात वह बॉम्बे हॉस्पिटल के सामने स्थित श्रीनाथ रेस्टोरेंट पर दोस्तों के साथ चाय पीने गया था। देर रात का हवाला देते हुए होटल संचालक ने चाय के दोगुने पैसे मांगे। हर्ष और उसके साथियों द्वारा पहले ही 60 रुपये का भुगतान किया जा चुका था। अतिरिक्त रकम की मांग को लेकर कहासुनी हुई, जिसके बाद होटल संचालक ने लसूड़िया थाने के दो पुलिसकर्मी उत्कर्ष उर्फ उज्ज्वल गुरुनंग और नागेंद्र सिंह पंडोलिया को मौके पर बुला लिया।
आरोप है कि पुलिसकर्मी पहुंचते ही हर्ष के साथ चौराहे पर मारपीट करने लगे। डंडों से उसके पैरों और पीठ पर वार किए गए। इसके बाद उसे थाने ले जाया गया। फरियादी का दावा है कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों से बचते हुए उसे ऐसे स्थान पर ले जाया गया जहां कोई निगरानी नहीं थी और वहां दोबारा मारपीट की गई। हर्ष ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मियों ने उसका मोबाइल फोन छीनकर घटना से जुड़े फोटो और वीडियो डिलीट कर दिए तथा जेब से 2400 रुपये भी निकाल लिए।
घटना के अगले दिन, 29 दिसंबर 2025 को हर्ष जावरिया ने डीसीपी जोन-2 को लिखित शिकायत दी। आरोप है कि कई दिनों तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस स्तर पर सुनवाई न होने से क्षुब्ध होकर फरियादी ने हाईकोर्ट में निजी याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के दौरान इंदौर हाईकोर्ट ने गंभीरता दिखाते हुए डीसीपी जोन-2 को 25 फरवरी को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है।