भोपाल। मध्य प्रदेश में मौसम ने एक बार फिर करवट ली है। अभी कुछ दिनों पहले तक जहां आंधी, बारिश और ओलावृष्टि ने लोगों को गर्मी से राहत दी थी, वहीं अब अचानक गर्मी ने जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। अप्रैल की शुरुआत में ठंडक का एहसास कराने वाला मौसम अब तेजी से तपिश में बदल रहा है। शुक्रवार को प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान में 1 से 5.4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह संकेत है कि अब प्रदेश में तेज गर्मी का दौर शुरू होने वाला है।
तापमान के आंकड़ों पर नजर डालें तो कई शहरों में तेज उछाल देखने को मिला।
यह बढ़ोतरी साफ बताती है कि, अब गर्मी धीरे-धीरे अपने चरम की ओर बढ़ रही है।
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शहर |
अधिकतम तापमान (°C) |
न्यूनतम तापमान (°C) |
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भोपाल |
34.6 |
19.0 |
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इंदौर |
35.0 |
19.2 |
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उज्जैन |
35.5 |
16.8 |
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ग्वालियर |
33.4 |
18.7 |
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जबलपुर |
34.6 |
17.4 |
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नर्मदापुरम |
39.3 |
21.2 |
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रतलाम |
38.6 |
20.2 |
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खरगोन |
38.0 |
20.4 |
उज्जैन बड़े शहरों में सबसे गर्म रहा, जबकि नर्मदापुरम पूरे प्रदेश में सबसे आगे रहा।
मौसम विभाग के अनुसार, 15 अप्रैल के आसपास एक नया मौसम सिस्टम सक्रिय होगा, लेकिन यह सिस्टम काफी कमजोर रहेगा और इससे प्रदेश को ज्यादा राहत मिलने की संभावना नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में तापमान में लगातार बढ़ोतरी होगी, गर्म हवाएं चल सकती हैं और कई इलाकों में हीट वेव जैसे हालात भी बन सकते हैं।
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मौसम विभाग के मुताबिक, जैसे सर्दी के लिए दिसंबर-जनवरी और बारिश के लिए जुलाई-अगस्त अहम होते हैं, वैसे ही गर्मी के लिए अप्रैल और मई सबसे महत्वपूर्ण महीने माने जाते हैं। खासतौर पर अप्रैल का दूसरा पखवाड़ा, यानी 15 अप्रैल के बाद का समय तेज गर्मी का पीक होता है। ऐसे में अब आने वाले दिनों में लोगों को असली गर्मी का सामना करना पड़ेगा।
इस साल अप्रैल का पहला हफ्ता सामान्य से बिल्कुल अलग रहा। 1 से 9 अप्रैल तक लगातार मौसम में बदलाव देखने को मिला, जिसमें 45 से ज्यादा जिलों में बारिश हुई और 15 से ज्यादा जिलों में ओलावृष्टि दर्ज की गई। इस दौरान ग्वालियर में सबसे ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई। इस असामान्य मौसम ने कुछ दिनों के लिए गर्मी की शुरुआत को टाल दिया, लेकिन अब मौसम फिर से अपने सामान्य ट्रेंड पर लौट आया है।
बारिश और ओलावृष्टि का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि फसलों पर भी पड़ा। प्रभावित फसलें-
फरवरी और मार्च में 4-4 बार मौसम बदलने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ा। कई जिलों में फसलें खराब हो गईं, जिसके बाद सरकार ने सर्वे भी कराया।
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गर्मी बढ़ने के साथ ही स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ जाते हैं। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों के लिए जरूरी सलाह जारी की है।
क्या करें?
क्या न करें?
बच्चों और बुजुर्गों को खास ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि वे गर्मी से जल्दी प्रभावित होते हैं।
अगर पूरे मौसम के पैटर्न को समझें, तो एक बात साफ नजर आती है कि इस साल मौसम लगातार उतार-चढ़ाव वाला रहा है। फरवरी और मार्च में कई बार मौसम बदला, जिससे बारिश, आंधी और ओलावृष्टि देखने को मिली। अप्रैल की शुरुआत भी सामान्य से अलग रही, जहां बारिश और ठंडक का असर बना रहा। हालांकि, अब अप्रैल के मध्य से गर्मी ने दोबारा जोर पकड़ना शुरू कर दिया है और तापमान तेजी से बढ़ रहा है।
अप्रैल के आखिर और मई में आमतौर पर गर्मी अपने चरम पर पहुंचती है, जब लू चलने लगती है और दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी बढ़ जाता है। मौसम विभाग के संकेतों के अनुसार, आने वाले दिनों में न केवल दिन का पारा बढ़ेगा, बल्कि रातें भी गर्म होने लगेंगी, जिससे उमस और बेचैनी बढ़ सकती है।