तेहरान/इस्लामाबाद। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आज एक अहम शांति वार्ता होने जा रही है। इस वार्ता में दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधि आमने-सामने बैठेंगे। लेकिन बातचीत शुरू होने से पहले ही माहौल बेहद भावुक और तनावपूर्ण हो गया है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ द्वारा शेयर की गई एक तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। इस तस्वीर में युद्ध की पीड़ा, मासूम बच्चों की याद और राजनीतिक संदेश एक साथ नजर आते हैं।
ईरानी डेलिगेशन इस्लामाबाद एक विशेष विमान से पहुंचा, जिसे ‘मिनाब 168’ नाम दिया गया है। यह नाम ईरान के मिनाब शहर में हुए एक दर्दनाक हमले की याद में रखा गया है। इस डेलिगेशन का नेतृत्व ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं। इस फ्लाइट की सबसे खास बात यह रही कि, विमान की खाली सीटों पर मृत बच्चों की तस्वीरें, उनके स्कूल बैग और व्यक्तिगत सामान रखा गया था।
गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जो तस्वीर साझा की, उसने पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय को झकझोर दिया। इस तस्वीर में विमान की खाली सीटों पर बच्चों की तस्वीरें रखी हुई दिखाई देती हैं, जिनके साथ खून से सने स्कूल बैग और सफेद गुलाब भी रखे गए हैं।
गालिबाफ स्वयं इन तस्वीरों को देखते हुए नजर आते हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा, इस उड़ान में मेरे साथी, मिनाब-168। यह तस्वीर सिर्फ एक यात्रा का हिस्सा नहीं बल्कि एक बेहद भावनात्मक और प्रतीकात्मक संदेश बन गई है, जिसने युद्ध की त्रासदी और मासूम बच्चों की पीड़ा को दुनिया के सामने उजागर किया है।
ईरान के अनुसार, यह दर्दनाक घटना 28 फरवरी 2026 को मिनाब शहर में हुई थी। इस दौरान एक प्राथमिक स्कूल पर मिसाइल हमला किया गया, जिसमें लगभग 168 लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में ज्यादातर बच्चे और स्कूल स्टाफ शामिल थे, जबकि 100 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। ईरान का आरोप है कि इस हमले में अमेरिका और इजराइल शामिल थे, हालांकि अमेरिका ने इन आरोपों की जांच की बात कही है और किसी भी प्रत्यक्ष जिम्मेदारी से इनकार किया है।
ईरान का कहना है कि यह हमला जानबूझकर किया गया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। इस मुद्दे को ईरान ने संयुक्त राष्ट्र में भी उठाया है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न्याय की मांग की है। दूसरी ओर, अमेरिका का कहना है कि इस घटना की जांच की जा रही है और यह संभव है कि यह किसी सैन्य गलती का परिणाम हो। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पूरी जांच जरूरी है ताकि सच्चाई सामने आ सके।
इस्लामाबाद पहुंचने के बाद गालिबाफ ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा कि ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन वह अमेरिका पर भरोसा नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ पिछले अनुभव अच्छे नहीं रहे हैं, कई बार समझौते टूट चुके हैं और बातचीत के दौरान किए गए वादे अक्सर पूरे नहीं किए गए। उन्होंने यह भी कहा, हम अच्छी नीयत से आए हैं, लेकिन भरोसा नहीं है, जिससे यह साफ होता है कि ईरान शांति की इच्छा के बावजूद संदेह की स्थिति में बातचीत कर रहा है।
वार्ता से ठीक पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी तीखा बयान दिया, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान के पास ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं और वह अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका कार्रवाई कर सकता है और वह अपने सैन्य विकल्पों से पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप के इस बयान ने शांति वार्ता से पहले तनाव को और बढ़ा दिया है और माहौल को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।
इस पूरी वार्ता का सबसे बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। ईरान पर आरोप है कि वह इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर टोल लगाने की योजना बना रहा है और प्रति बैरल तेल पर शुल्क वसूल सकता है। इसके अलावा, यह भी आशंका जताई जा रही है कि इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है। अमेरिका इसे वैश्विक व्यापार के लिए सीधा खतरा मान रहा है और इसे लेकर कड़ी आपत्ति जता रहा है।
इस्लामाबाद में होने वाली इस अहम बैठक में तीन देशों की महत्वपूर्ण भागीदारी है।
पाकिस्तान
अमेरिका
ईरान
इस पूरे मामले में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान का मुख्य लक्ष्य दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित करना, आपसी तनाव को कम करना और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना है। इस्लामाबाद में हो रही यह बैठक केवल द्विपक्षीय बातचीत नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे पश्चिम एशिया की स्थिरता के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम के रूप में देखा जा रहा है। अगर यह वार्ता सफल होती है, तो क्षेत्र में लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।
इस बीच क्षेत्रीय हालात भी लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं। लेबनान में हुए हमलों में अब तक 357 लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि हजारों लोग घायल बताए जा रहे हैं। इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष भी लगातार तेज होता जा रहा है, जिससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है। इन घटनाओं ने पहले से ही संवेदनशील माने जाने वाले इस क्षेत्र के हालात को और अधिक गंभीर बना दिया है।
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रिपोर्ट्स के अनुसार, चीन आने वाले समय में ईरान को एयर डिफेंस सिस्टम उपलब्ध कराने की योजना पर काम कर रहा है। बताया जा रहा है कि यह सैन्य सप्लाई किसी तीसरे देश के जरिए की जा सकती है ताकि इसकी सीधी पहचान न हो सके। अमेरिका इसे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन को बदलने वाला कदम मान रहा है और इस पर चिंता जताई जा रही है। हालांकि अभी तक इस संबंध में चीन या ईरान की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
ईरान ने साफ किया है कि वह शांति का पक्षधर है, लेकिन किसी भी तरह के दबाव में आकर समझौता नहीं करेगा। ईरान का कहना है कि उसके राष्ट्रीय हित उसके लिए सर्वोपरि हैं और उनसे किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा। यही कारण है कि, वह बातचीत के लिए तैयार होने के बावजूद अपने रुख पर मजबूती से कायम है।