karan childhood trauma:मर्दों जैसी आवाज के लिए की थी 3 साल की ट्रेनिंग, करण जौहर को याद आया बचपन का ट्रॉमा

एंटरटेनमेंट डेस्क। जाने-माने फिल्म मेकर करण जौहर ने हाल ही में अपने बचपन के गहरे ट्रॉमा को साझा किया जिसने उन्हें आज भी प्रभावित किया हुआ है। मिंत्रा के ग्लैम स्ट्रीम पर सानिया मिर्जा के साथ बातचीत के दौरान, करण ने बताया कि कैसे अपनी अलग पसंद और फेमिनिन पर्सनैलिटी के कारण उन्हें बुली किया गया था। इस वजह से उन्हें खुद को सामान्य दिखाने के लिए 3 साल तक मर्दों जैसी आवाज सीखने की ट्रेनिंग लेनी पड़ी थी।
करण के बचपन से अलग शौक
करण जौहर ने खुलासा किया कि बचपन में जहां बाकी लड़के खेल-कूद में लगे रहते थे। वहीं उन्हें कुकिंग और फूल सजाने की क्लासेस लेना पसंद था। एक बार उनके ट्रेनर ने सबके सामने उनकी आवाज और स्वभाव पर टिप्पणी की और कहा कि दुनिया बहुत कठोर है। इस घटना ने करण को इतना शर्मिंदा किया कि उन्होंने अपनी आवाज और चलने के तरीके को बदलने की कोशिश शुरू कर दी।
परिवार से छुपकर ली वॉयस ट्रेनिंग
ट्रेनर की सलाह पर करण ने परिवार से छुपकर तीन साल तक वॉयस ट्रेनिंग ली ताकि उनकी आवाज मर्दों जैसी हो सके। उन्होंने अपने पिता से झूठ कहा कि वह कंप्यूटर क्लास ले रहे हैं। क्योंकि उन्हें सच बताने में शर्म आ रही थी। करण आज भी मानते हैं कि काश उस समय उनमें हिम्मत होती और वह खुद को स्वीकार कर पाते।

बॉडी डिस्मॉर्फिया और प्लस-साइज होने का दर्द
करण जौहर ने यह भी बताया कि वह लंबे समय तक बॉडी डिस्मॉर्फिया से जूझे हैं। बचपन में प्लस-साइज बच्चा होने के कारण उनका बहुत मजाक उड़ाया गया। आज भी वह अपने शरीर में पूरी तरह सहज महसूस नहीं करते। उन्होंने स्वीकारा कि भावनात्मक दर्द से गुजरने पर खाना उनका सहारा होता था, जिसने बाद उन्होने खाने के साथ एक टॉक्सिक रिश्ता बना लिया। फिल्म दिल "धड़कने दो" में शेफाली शाह का चुपके से केक खाने वाला सीन उन्हें आज भी रुला देता है।
बच्चों को लेकर चिंता
अपने कड़वे अनुभवों को देखते हुए करण जौहर अपने बच्चों यश और रूही को लेकर बहुत चिंतित और सतर्क रहते हैं। वह कहते हैं कि आजकल के बच्चे सोशल मीडिया के कारण कम उम्र में ही अपने लुक और फॉलोवअर्स को लेकर परेशान हैं जो कि एक टॉक्सिक समय है। वह अपने बच्चों को मोटा होने के डर से चीनी खाने से रोकते हैं और खेल न छोड़ने के लिए कहते हैं। क्योंकि वह नहीं चाहते कि उनके बच्चों को भी वही ट्रॉमा झेलना पड़े जो उन्होंने सहा था।













