हुकुमचंद मिल मामले में 32 साल बाद इंसाफ, लेकिन 129 मजदूरों की एक से अधिक पत्नियों के कारण मुआवजा वितरण अटका

हाईकोर्ट ने मिल मजदूरों को 218 करोड़ रुपए बांटने के दिए हैं आदेश
Follow on Google News
हुकुमचंद मिल मामले में 32 साल बाद इंसाफ, लेकिन 129 मजदूरों की एक से अधिक पत्नियों के कारण मुआवजा वितरण अटका

इंदौर। 32 साल के संघर्ष के बाद हुकुमचंद मिल के मजदूरों को मुआवजे का पैसा मिलना तय हो गया, लेकिन कई मजदूरों के सामने एक नई समस्या आ गई है। यह है कई शादियों की, जिससे उनके परिजनों में खींचतान शुरू हो गई है। ऐसे में उन मजदूरों का पैसा अटक सकता है जिन्होंने एक से ज्यादा शादियां की थीं। मिल मजदूरों को कुल 218 करोड़ रुपए वितरित होना हैं। यह राशि 5,895 अधिकारी व मजदूरों में बांटी जाएगी। लेकिन, इसमें कई मजदूरों के परिवारों को पैसा मिलने में देरी हो सकती है, क्योंकि 125 लोग ऐसे रहे, जिनकी दो पत्नियां हैं। चार ऐसे भी रहे, जिनकी तीन पत्नियां हैं। खा बात यह ये सभी हिंदू हैं। इनके वारिसों को अपने हिस्से की राशि को लेने के लिए आईएम एग्री यानि सहमति-पत्र देना होगा ताकि कोई कानूनी विवाद नहीं हो।

कैसे हुआ खुलासा : मिल मजदूरों के वारिसों में विवाद तब सामने आया जब मजदूरों को पैसा मिलने का आदेश हुआ। कुछ मजदूरों का स्वर्गवास हो चुका है। उनके परिजन राशि मिलने की जानकारी के लिए आए, तब इस बात का खुलासा हुआ।

वारिसों में समझौता हो, ताकि न हो कानूनी विवाद

इस मामले में मिल अधिकारी-मजदूर संघर्ष समिति के नरेंद्र श्रीवंश ने बताया कि मजदूरों के लिए देय राशि सहित 13 देनदारों के लिए हाउसिंग बोर्ड ने एसबीआई के नो लिन अकाउंट में 425 करोड़ रुपए जमा करा दिए हैं। इनमें से 218 करोड़ रुपए मिल मजदूरों में वितरित होना हैं। लेकिन कई मजदूरों की दो, तो किसी की तीन पत्नियों के होने से इनके वारिसों को सहमति पत्र देना होगा, उसके बाद ही पैसा उनके खाते में आएगा।

हिंदू हैं पर तीन पत्नियां

नरेंद्र श्रीवंश ने बताया कि एक से ज्यादा शादी करने वाले ये सभी मजदूर साथी हिंदू हैं। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यह बात अलग है कि हिंदू मैरिज एक्ट के तहत संबंध विच्छेद होने के बाद ही दूसरी शादी की जा सकती है। लेकिन फिलहाल विवाद की स्थिति तो है जिसके कारण उनके पैसे रुक सकते हैं। हुकुमचंद मिल के कुल मजदूरों में सिर्फ 10 ही मुस्लिम समुदाय के हैं। हालांकि उनके यहां से अभी तक ऐसी कोई जानकारी नहीं आई है।

हमने ऑफिशियल लिक्वीडेटर (ओएल) के अनुसार पैसा जमा करवा दिया। अब वह पैसा कैसे डिस्ट्रीब्यूट होगा, वह ओएल का काम है। जब से केस चल रहा है, तब से ओएल ही इसकी डील कर रहे हैं। - चंद्रमौली शुक्ला, कमिश्नर, एमपी हाउसिंग

(इनपुट-राजेंद्र गर्ग)
Javedakhtar Ansari
By Javedakhtar Ansari
नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts