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3 महीने, 13 मौत की सजाएं :ज्ञानवापी केस वाले जज रवि कुमार दिवाकर फिर चर्चा में

ज्ञानवापी मामले में चर्चा में रहे जज रवि कुमार दिवाकर ने मुजफ्फरनगर में तीन महीने के भीतर 13 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। जानिए किन मामलों में हुई सजा और क्यों हो रही चर्चा।
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ज्ञानवापी केस वाले जज रवि कुमार दिवाकर फिर चर्चा में
ज्ञानवापी केस से सुर्खियों में आए जज रवि कुमार दिवाकर ने मात्र तीन महीनों में 13 मौत की सजाएं सुनाई।

ज्ञानवापी मामले में अपने फैसले को लेकर सुर्खियों में रहे जज रवि कुमार दिवाकर एक बार फिर चर्चा में हैं। इस बार वजह मुजफ्फरनगर में पिछले तीन महीनों के दौरान हत्या के अलग-अलग मामलों में 13 दोषियों को मृत्युदंड सुनाना है। हाल ही में 16 साल पुराने किसान हत्याकांड में दो आरोपियों को फांसी और एक-एक लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई, जिसके बाद उनके फैसलों पर न्यायिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। 

तीन महीने में 13 दोषियों को फांसी की सजा

मुजफ्फरनगर में 6 अप्रैल से 6 जुलाई 2026 के बीच जज रवि कुमार दिवाकर ने हत्या के अलग-अलग मामलों में 13 दोषियों को मृत्युदंड सुनाया। लगातार आए इन फैसलों ने न्यायिक हलकों के साथ-साथ आम लोगों का भी ध्यान खींचा है। हालांकि, भारतीय कानून के तहत फांसी पर अंतिम अमल से पहले हाईकोर्ट की पुष्टि जरूरी होती है और दोषियों को अपील का पूरा अधिकार भी मिलता है।

हालिया फैसला: 16 साल पुराने किसान हत्याकांड में दो को फांसी

सबसे ताजा फैसला 6 जुलाई को आया। तितावी थाना क्षेत्र के मांडी गांव में वर्ष 2010 में किसान राजबीर सिंह की चुनावी रंजिश में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पूर्व प्रधान प्रमोद कुमार और सहदेव उर्फ पप्पू को मृत्युदंड सुनाया। अदालत ने दोनों पर एक-एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। इस मामले के दो अन्य आरोपी ट्रायल के दौरान पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं।

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किन मामलों में सुनाई गई सजा

6 अप्रैल को अधिवक्ता समीर सैफी हत्याकांड में तीन दोषियों को फांसी की सजा सुनाई गई। 28 अप्रैल को शेखर हत्याकांड में चार लोगों को मृत्युदंड मिला। इसके बाद 30 मई को राजेश देवी हत्याकांड में एक आरोपी, 20 जून को राजेंद्र सैनी हत्याकांड में दो आरोपियों और 2 जुलाई को होमगार्ड रतिराम हत्याकांड में एक दोषी को मृत्युदंड दिया गया।

ज्ञानवापी फैसले के बाद फिर चर्चा में

जज रवि कुमार दिवाकर पहले ज्ञानवापी प्रकरण में दिए गए अपने फैसले के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में रहे थे। अब कम समय में कई हत्या मामलों में मृत्युदंड सुनाए जाने के कारण उनका नाम फिर सुर्खियों में है। कानूनी जानकारों का कहना है कि हर मामले में अदालत साक्ष्यों, गवाहों और कानून के आधार पर स्वतंत्र रूप से फैसला सुनाती है।

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अभियोजन पक्ष ने क्या कहा

जिला शासकीय अधिवक्ता (डीजीसी) राजीव शर्मा के अनुसार, अदालत के इन फैसलों से पीड़ित परिवारों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा मजबूत हुआ है। उनका कहना है कि गंभीर अपराधों में कठोर सजा कानून का संदेश देने के साथ समाज में अपराध के प्रति भय भी बनाए रखती है। वहीं, सभी मामलों में दोषियों के पास उच्च न्यायालय में अपील का संवैधानिक अधिकार सुरक्षित है।

Sona Rajput
By Sona Rajput

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन किया है। साल 2022 ...Read More

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