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Gaurav Yatra in Tribal Belt :जनजातीय क्षेत्रों में पहुंचेंगे गौरव यात्रा के रथ , सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी

15 नवंबर को आलीराजपुर और जबलपुर में होगा समापन
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जनजातीय क्षेत्रों में पहुंचेंगे गौरव यात्रा के रथ , सीएम डॉ. मोहन यादव ने दिखाई हरी झंडी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    भोपाल। भारतीय जनता पार्टी जनजाति समाज के भगवान बिरसा मुंडा की 150 जयंती पर वृहद आयोजन करने जा रही है। इसके तहत प्रदेश भर के जनजातीय क्षेत्र में गौरव यात्राएं निकाली जाएंगी। ये यात्राएं 11 नवंबर से शुरू होंगी। यात्रा के रथ अपने रूट के लिए रवाना हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार शाम हरी झंडी दिखाकर रथों को रवाना किया। ये यात्राएं यात्रा 15 नवंबर को आलीराजपुर और जबलपुर में समाप्त होंगी। यात्रा के समापन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्चुअली शामिल होंगे। 

    जनजाति वर्ग से जुड़ने का प्रयास

    यात्रा के आयोजन के लिए सोमवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में एक बड़ी बैठक आयोजित की गई। पार्टी के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष की उपस्थिति में इस बैठक में महत्वपूर्ण आयोजन की रूपरेखा तय की गई। इस बैठक में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री हितानंद, केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके, साचित्री ठाकुर समेत प्रदेश के मंत्री और संगठन के पदाधकारी शामिल हुए। गौरतलब है कि इन यात्राओं के जरिए प्रदेश भाजपा का फोकस मंडला, बालाघाट, सिवनी, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, हरदा, अनूपपुर, डिंडोरी, झाबुआ, धार, रतलाम, अलीराजपुर, देवास, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन, बड़वानी, शहडोल, बैतूल, कटनी, जबलपुर, उमरिया, सीधी और सिंगरौली में पार्टी को जनजाति वर्ग से जोड़ने का प्रयास रहेगा।  

    ऐसे बने जनजाति वर्ग के भगवान

    बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर 1875 में वर्तमान झारखंड के खूंटी जिले के उलिहातू गांव में हुआ था। उनके बचपन का नाम दाउद मुंडा था। वे छोटानागपुर पठार क्षेत्र की मुंडा जनजाति से संबंधित थे। यह क्षेत्र वर्तमान में झारखंड में है।  बिरसा मुंडा ने शराब, तंत्र-मंत्र और जादू-टोने के खिलाफ अभियान चलाया और लोगों को स्वच्छ रहने के बारे जागरूक किया। उन्होंने आदिवासियों को ब्रिटिश शासन और ज़मींदारी व्यवस्था के अत्याचारों के खिलाफ जागरूक किया। उन्होंने मुंडा विद्रोह का नेतृत्व किया। मुंडा जनजाति में बिरसा के योगदान के कारण उन्हें भगवान का दर्जा दिया गया है। उन्हें धरती आबा यानी पृथ्वी का पिता के रूप में पूजा जाता है।  

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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