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Gwalior News :जयभान सिंह पवैया बोले...मैं चाहता हूं वित्त का सदुपयोग हो, यही मेरा स्वभाव है

राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने नवरात्रि में नियुक्ति का संदेश मिलना मां जगदंबा का आशीर्वाद माना है। पद ग्रहण करने के पहले दिन उन्होंने कहा कि मैं चाहता हूं कि वित्त का सदुपयोग हो, यही मेरा स्वभाव है।
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जयभान सिंह पवैया बोले...मैं चाहता हूं वित्त का सदुपयोग हो, यही मेरा स्वभाव है
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    ग्वालियर। राज्य वित्त आयोग के नव-नियुक्त अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने पदभार ग्रहण करने के बाद भावुक और आध्यात्मिक स्वर में अपनी जिम्मेदारी को व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि वे प्रभु से यही प्रार्थना करते हैं कि जैसे उन्होंने उन्हें जीवन रूपी चदरिया दी है, वैसी ही बिना दाग के वापस लौटा सकें।

    जो भूमिका मिली उसे ईमानदारी से निभाने की कोशिश करूंगा

    उन्होंने कहा, मैं चाहता हूं कि वित्त का सदुपयोग हो, यही मेरा स्वभाव है। आज प्रथम दिवस पर मैं प्रभु से यही प्रार्थना करता हूं कि जो भी भूमिका मुझे दी गई है, उसे पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभा सकूं।ग्वालियर आगमन पर उनके स्वागत में कार्यकर्ताओं ने ढोल-ताशों के साथ जोरदार उत्साह दिखाया और नाच-गाकर उनका अभिनंदन किया। इस अवसर पर पवैया ने कहा कि उन्हें अपनी नियुक्ति की सूचना नवरात्रि के प्रथम दिवस की संध्या को मिली, जिसे उन्होंने मां जगदंबा का आदेश माना। उन्होंने कहा कि वे इस दायित्व को भगवती के चरणों में समर्पित करते हैं।

    संगठन ही व्यक्ति को सेवा का अवसर देता है

    उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा राज्यपाल मंगू भाई पटेल के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने उनकी क्षमताओं पर विश्वास जताया है।  पवैया ने संगठन और पार्टी के सभी पदाधिकारियों के प्रति भी कृतज्ञता व्यक्त करते हुए कहा कि संगठन ही व्यक्ति को सेवा का अवसर देता है और वही उसकी ताकत होता है। उन्होंने आगे कहा कि यह जिम्मेदारी बहुत बड़ी है और कार्यभार संभालने के बाद वे इस पर विस्तार से चर्चा करेंगे। मुझे गहन अध्ययन करना होगा और मध्य प्रदेश का व्यापक भ्रमण भी करना पड़ेगा, ताकि जमीनी हकीकत को समझा जा सके। वित्त आयोग की भूमिका सलाहकारी होती है, जिसमें पारदर्शिता और वित्त का न्यायपूर्ण वितरण सुनिश्चित करना जरूरी है, गांव से लेकर महानगरों तक। अंत में उन्होंने कहा कि वे पूरी निष्ठा के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाने का प्रयास करेंगे और उम्मीद जताई कि वे इस भूमिका पर खरे उतर सकेंगे। 

    Naresh Bhagoria
    By Naresh Bhagoria

    नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

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