Naresh Bhagoria
6 Jan 2026
Naresh Bhagoria
6 Jan 2026
नई दिल्ली। आईआरसीटीसी (IRCTC) घोटाला मामले में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उनके खिलाफ चल रहे ट्रायल पर फिलहाल रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि, हाई कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को नोटिस जारी कर मामले में जवाब मांगा है। अब इस केस की अगली सुनवाई 14 जनवरी 2026 को होगी।
सोमवार, 5 जनवरी को दिल्ली हाई कोर्ट में लालू प्रसाद यादव की याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने CBI को नोटिस जारी करते हुए मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने साफ कहा कि इस चरण पर ट्रायल पर रोक नहीं लगाई जा सकती। कोर्ट ने संकेत दिया कि, सीबीआई का पक्ष सुनने के बाद ही किसी अंतरिम राहत पर विचार किया जाएगा।
निचली अदालत ने इस मामले में लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी (पूर्व मुख्यमंत्री, बिहार), तेजस्वी यादव (डिप्टी सीएम, बिहार) सहित कुल 14 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए हैं। इन पर आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं।
लालू यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत में दलील दी कि निचली अदालत ने यांत्रिक तरीके से आरोप तय किए हैं।
उन्होंने कहा कि, लालू यादव के खिलाफ कोई सीधा सबूत नहीं है। IRCTC से जुड़े होटल संचालन और पट्टे से जुड़े फैसले बोर्ड स्तर पर लिए गए। रेल मंत्री कार्यालय का इन फैसलों में कोई प्रत्यक्ष रोल नहीं था। इसके साथ ही याचिका में यह भी दावा किया गया कि राजनीतिक दुर्भावना के तहत पूरे परिवार को निशाना बनाया जा रहा है।
हालांकि, इस सुनवाई में CBI की ओर से विस्तृत जवाब दाखिल नहीं किया गया, लेकिन एजेंसी पहले ही यह स्पष्ट कर चुकी है कि आरोप प्रथम दृष्टया गंभीर हैं। CBI का आरोप है कि, रेल मंत्री रहते हुए लालू यादव ने IRCTC के होटल और जमीनों को नियमों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को पट्टे पर दिलवाया। इसके बदले उनके परिवार को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया। अब CBI को हाई कोर्ट में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।
यह मामला उस दौर से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र में रेल मंत्री थे (UPA-1 सरकार)। CBI के अनुसार, IRCTC के कुछ प्रमुख होटल और संपत्तियां निजी कंपनियों को अनियमित तरीके से लीज पर दी गईं। बदले में लालू यादव के परिवार के सदस्यों के नाम जमीन और संपत्ति ट्रांसफर की गई। इसी आधार पर CBI ने इसे भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश का मामला बताया है।
बीते साल 13 अक्टूबर को राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव के खिलाफ आरोप तय किए थे। इसके बाद लालू यादव ने आरोप तय करने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी। याचिका में कहा गया कि, आरोप कानूनन टिकाऊ नहीं हैं और मामले में तथ्यों की गलत व्याख्या की गई है।
[featured type="Featured"]
हाई कोर्ट ने कहा कि, इस स्तर पर ट्रायल रोकना उचित नहीं है। पहले जांच एजेंसी का पक्ष सुना जाना जरूरी है। ट्रायल कोर्ट का आदेश पूरी तरह गैरकानूनी नहीं कहा जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।
CBI को हाई कोर्ट में जवाब दाखिल करना होगा। अगली सुनवाई 14 जनवरी 2026 को होगी। उस दिन कोर्ट यह तय कर सकती है कि, ट्रायल पर कोई राहत दी जाए या नहीं या निचली अदालत की कार्यवाही जारी रहे। इस फैसले पर लालू यादव और उनके परिवार की आगे की कानूनी रणनीति निर्भर करेगी।
यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है। लालू यादव बिहार की राजनीति के बड़े चेहरे हैं और उनके बेटे तेजस्वी यादव वर्तमान में राज्य सरकार में अहम भूमिका निभा रहे हैं। ऐसे में कोर्ट का हर आदेश राजनीतिक हलकों में भी गहरी चर्चा का विषय बना हुआ है।
यह भी पढ़ें: दिल्ली दंगा 2020 : जेल में ही रहेंगे उमर खालिद-शरजील इमाम, सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से किया इनकार; 5 अन्य आरोपी रिहा