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होलाष्टक में छुपा है राज:इसलिए होली से पहले मायके चली जाती है नई बहू!

होली से आठ दिन पहले शुरू होने वाला होलाष्टक हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस समय को शुभ कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। इस दौरान शादी, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक काम टाल दिए जाते हैं।
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इसलिए होली से पहले मायके चली जाती है नई बहू!
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AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    होली का नाम आते ही रंग, गुलाल और मस्ती याद आती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि होली से पहले आठ दिन ऐसे भी होते हैं जब शादी-ब्याह जैसे शुभ काम रोक दिए जाते हैं? इस खास समय को होलाष्टक कहा जाता है। होलाष्टक से जुड़ी एक खास परंपरा है नई बहू का मायके जाना। 

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    साल 2026 में होलाष्टक 24 मार्च से शुरू होकर होलिका दहन तक रहेगा। इन आठ दिनों को धार्मिक दृष्टि से थोड़ा संवेदनशील समय माना जाता है। आइए समझते हैं कि आखिर होलाष्टक है क्या और इसके पीछे की मान्यताएं क्या कहती हैं।

    क्या होता है होलाष्टक?

    धार्मिक मान्यता के अनुसार फाल्गुन महीने की शुक्ल पक्ष की अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक का समय होलाष्टक कहलाता है। यानी होली से ठीक आठ दिन पहले यह काल शुरू हो जाता है। कहा जाता है कि इन दिनों ग्रहों की स्थिति कुछ ऐसी होती है जो नए और बड़े शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती। इसलिए विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, मुंडन जैसे कार्यक्रम टाल दिए जाते हैं।

    यह समय संयम और साधना का भी माना जाता है। जैसे त्योहार से पहले एक ठहराव… ताकि मन और वातावरण दोनों तैयार हो सकें।

    नई बहू क्यों जाती है मायके?

    होलाष्टक से जुड़ी एक खास परंपरा है नई बहू का मायके जाना। आइए जानते हैं इसके पीछे की वजहें।

    • नई बहू को लक्ष्मी माना जाता है- भारतीय परंपरा में नई दुल्हन को घर की लक्ष्मी कहा जाता है। माना जाता है कि होलाष्टक के दौरान नकारात्मक ऊर्जा बढ़ सकती है।
    • पहली होली की खास मान्यता- ज्योतिष मान्यता कहती है कि विवाह के बाद पहली जलती होली (होलिका दहन) नई बहू को ससुराल में नहीं देखनी चाहिए। इसे अच्छा संकेत नहीं माना जाता। इसलिए पहली होली अक्सर मायके में मनाई जाती है।
    • रिश्तों में मिठास बनाए रखने की सोच- पुरानी मान्यताओं में यह भी कहा गया है कि अगर इस दौरान नई बहू ससुराल में रहे तो सास-बहू के रिश्ते में तनाव आ सकता है। इसलिए परंपरा के तौर पर उसे कुछ दिन मायके भेजना बेहतर माना गया।
    • भावनात्मक सहारा भी है वजह- शादी के बाद लड़की की जिंदगी पूरी तरह बदल जाती है। नया घर, नए लोग, नई जिम्मेदारियां। ऐसे में पहली होली मायके में मनाने से उसे अपनापन और मानसिक सुकून मिलता है।

    क्यों टाल दिए जाते हैं शादी-ब्याह?

    लोक मान्यता के अनुसार होलाष्टक के दौरान वातावरण में अग्नि तत्व की वृद्धि होती है। होलिका दहन की तैयारी भी इसी समय चलती है। ऐसा माना जाता है कि इस दौरान ऊर्जा थोड़ी अस्थिर रहती है। इसलिए नए रिश्तों की शुरुआत या बड़े निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जाती है।
    हालांकि यह पूरी तरह आस्था और परंपरा पर आधारित है, लेकिन आज भी कई परिवार इन मान्यताओं का पालन करते हैं।

    Garima Vishwakarma
    By Garima Vishwakarma

    गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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