7 दिन चलेगा खामेनेई का अंतिम संस्कार :100 से ज्यादा देशों के नेता शामिल, तेहरान से मशहद तक निकलेगी अंतिम यात्रा

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के 7 दिवसीय अंतिम संस्कार की शुरुआत हो गई है। भारत समेत 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि तेहरान पहुंचे हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम, करोड़ों लोगों के जुटने का अनुमान, अमेरिका-ईरान वार्ता, ट्रम्प के बयान और वैश्विक कूटनीतिक घटनाक्रम से जुड़ी पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
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100 से ज्यादा देशों के नेता शामिल, तेहरान से मशहद तक निकलेगी अंतिम यात्रा
आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में शुरू हो गई हैं।

तेहरान। ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम विदाई का सिलसिला शुरू हो चुका है। राजधानी तेहरान में आयोजित पहले आधिकारिक श्रद्धांजलि समारोह में दुनिया के 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और देश की शीर्ष राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व ने दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी। हालांकि सुरक्षा कारणों से खामेनेई के बेटे और मौजूदा सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई सार्वजनिक समारोह में शामिल नहीं हुए।

भारत ने हाई लेवल प्रतिनिधिमंडल भेजा

भारत सरकार ने अंतिम संस्कार में उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजा। विदेश राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने आधिकारिक तौर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। सैयद अता हसनैन ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, उन्होंने न केवल खामेनेई को श्रद्धांजलि दी बल्कि हालिया संघर्ष में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की। 

भारत से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद, पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती, कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा और विभिन्न धर्मों के प्रमुख धार्मिक प्रतिनिधि भी तेहरान पहुंचे। महबूबा मुफ्ती ने कहा कि खामेनेई को श्रद्धांजलि देने के लिए तेहरान पहुंचना उनके लिए सम्मान की बात है।

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100 से ज्यादा देशों की मौजूदगी

समारोह में पाकिस्तान, इराक, आर्मेनिया, ताजिकिस्तान, जॉर्जिया समेत कई देशों के शीर्ष नेता पहुंचे। हालांकि रूस, चीन, भारत और तुर्किये के सर्वोच्च नेताओं ने व्यक्तिगत रूप से हिस्सा नहीं लिया। इन देशों ने अपने आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजे। इसी बीच बिना पूर्व घोषणा के सऊदी अरब के उप विदेश मंत्री भी तेहरान पहुंच गए, जिसे क्षेत्रीय कूटनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

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7 दिन तक चलेगा अंतिम संस्कार

खामेनेई का अंतिम संस्कार सात दिनों तक चलेगा। कार्यक्रम इस प्रकार रहेगा-

3 जुलाई: विदेशी प्रतिनिधिमंडलों के लिए आधिकारिक श्रद्धांजलि समारोह
4-5 जुलाई: तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला में आम लोगों के अंतिम दर्शन
6 जुलाई: तेहरान में अंतिम यात्रा
7 जुलाई: कोम शहर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम
8 जुलाई: इराक के नजफ और कर्बला में अंतिम यात्रा
9 जुलाई: मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह परिसर में सुपुर्द-ए-खाक

2 करोड़ लोगों के जुटने का अनुमान

ईरानी प्रशासन का अनुमान है कि, अगले कुछ दिनों में 1.5 से 2 करोड़ लोग अंतिम यात्रा में शामिल हो सकते हैं। इसी को देखते हुए सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक तैयारियां की हैं।

प्रमुख इंतजाम

  • 5 करोड़ रोटियां तैयार करने की योजना
  • 16 मोबाइल बेकरी शुरू
  • 6000 से अधिक वाटर स्प्रिंकलर
  • 2500 एम्बुलेंस
  • 21 हेलीकॉप्टर
  • 100 ड्रोन
  • 24 से अधिक अस्पताल अलर्ट पर
  • 5 लाख लीटर IV फ्लूइड का स्टॉक
  • 700 से ज्यादा अस्थायी पार्किंग स्थल
  • मस्जिदों, स्कूलों, पार्कों और खेल परिसरों में ठहरने की व्यवस्था
  • होटल किराए में 50 प्रतिशत तक छूट
  • मेट्रो और सरकारी बस सेवा मुफ्त
  • दूसरे शहरों से आने वालों के लिए स्पेशल ट्रेनें

सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि, वे बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को अपने घरों में भी ठहराएं।

Ayatollah Ali Khamenei Funeral

तेहरान में सुरक्षा का अभूतपूर्व घेरा

राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को सर्वोच्च स्तर पर रखा गया है। मुख्य सड़कों पर सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। सैन्य वाहन लगातार गश्त कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू हवाई अड्डों पर उड़ानें सीमित कर दी गई हैं। अंतिम यात्रा वाले मार्गों पर निजी वाहनों की आवाजाही रोक दी जाएगी। तेहरान के गवर्नर मोहम्मद सादेघ मोतमेदियन ने लोगों से निर्धारित समय पर ही कार्यक्रम स्थल पहुंचने की अपील की है।

लाल झंडे में लिपटा खामेनेई का ताबूत

सरकारी मीडिया ने खामेनेई के ताबूत की तस्वीरें जारी की हैं। ताबूत पर लाल रंग का झंडा लपेटा गया है, जिस पर सफेद अक्षरों में या हुसैन लिखा गया है। शिया परंपरा में यह झंडा अन्यायपूर्ण शहादत और न्याय की मांग का प्रतीक माना जाता है।

सुबह से लगी श्रद्धालुओं की लंबी कतारें

ग्रैंड मोसल्ला परिसर के खुलने से पहले ही हजारों लोग अंतिम दर्शन के लिए पहुंच गए थे। श्रद्धालु सोमय्ये हमेदी ने कहा कि, अपने नेता को अंतिम विदाई देना उनके लिए गर्व की बात है और लंबे इंतजार से उन्हें कोई परेशानी नहीं है।

अगले छह दिनों तक अंतिम यात्रा तेहरान, कोम, इराक के नजफ और कर्बला होते हुए 9 जुलाई को मशहद पहुंचेगी, जहां अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा। दूसरी ओर पूरी दुनिया की नजर इस बात पर भी बनी हुई है कि अंतिम संस्कार के बाद अमेरिका-ईरान परमाणु वार्ता किस दिशा में आगे बढ़ती है और पश्चिम एशिया की बदलती कूटनीतिक तस्वीर पर इसका क्या असर पड़ता है।

पहली बार एक मंच पर तालिबान और उसके विरोधी

इस समारोह की सबसे चर्चित घटनाओं में से एक यह रही कि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार और उसके विरोधी नेता एक ही कार्यक्रम में मौजूद रहे। तालिबान की ओर से उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर और विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी पहुंचे। वहीं नेशनल रेजिस्टेंस फ्रंट (NRF) प्रमुख अहमद मसूद और इस्लामिक यूनिटी पार्टी के नेता मोहम्मद मोहाकिक भी समारोह में शामिल हुए। इस पर सोशल मीडिया पर तालिबान समर्थकों ने ईरान की आलोचना करते हुए दोहरी नीति अपनाने का आरोप लगाया।

Iran

अमेरिका-ईरान वार्ता पर भी नजर

कतर ने संकेत दिया है कि अंतिम संस्कार के बाद अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु मुद्दों पर बातचीत का अगला दौर शुरू हो सकता है। हालांकि इसी बीच ईरान ने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों के निरीक्षण की अनुमति देने से इनकार कर दिया है।

ट्रंप के बयान पर गालिबाफ का पलटवार

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि ईरान को खाने-पीने की जरूरतों के लिए अमेरिका पर निर्भर होना पड़ेगा और अमेरिकी किसान मक्का, गेहूं तथा सोयाबीन उपलब्ध कराएंगे। इस पर ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने तीखा जवाब देते हुए कहा कि, जिस देश के करोड़ों नागरिक फूड स्टैम्प पर निर्भर हैं, उसे दूसरे देशों को भूखा बताने से पहले अपने हालात देखने चाहिए।

होर्मुज जलडमरूमध्य में फ्रांस की सक्रियता बढ़ी

फ्रांस ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बारूदी सुरंगों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने वाले विशेष नौसैनिक जहाज भेजे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि इसका उद्देश्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब ईरान पहले ही इस क्षेत्र में पश्चिमी देशों की अतिरिक्त सैन्य मौजूदगी का विरोध कर चुका है।

महीनों बाद दिखे जनरल अहमद वाहिदी 

ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े वरिष्ठ जनरल अहमद वाहिदी भी लंबे समय बाद सार्वजनिक तौर पर अंतिम संस्कार कार्यक्रम में नजर आए। उन्होंने कहा कि ईरान अपने सिद्धांतों और प्रतिरोध की नीति पर कायम रहेगा।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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