डिजिटल डेस्क। ईरान में सत्ता संतुलन एक बड़े झटके के बाद तेजी से बदल रहा है। वरिष्ठ धर्मगुरु अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी को तेहरान में देश का अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया गया है। यह फैसला तब सामने आया जब ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की अमेरिका-इजरायल के संयुक्त सैन्य हमले में मौत हो गई। अराफी को संक्रमण काल के दौरान नेतृत्व संभालने के लिए चुना गया है, ताकि देश की प्रशासनिक और वैचारिक दिशा बनी रहे।
अराफी को अंतरिम नेतृत्व परिषद में विधि विशेषज्ञ सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। ईरान के संविधान के अनुसार, यह परिषद नए सुप्रीम लीडर के चयन तक शासन के महत्वपूर्ण फैसले लेगी। इस परिषद में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, मुख्य न्यायाधीश घोलाम-होसैन मोहसिनी-एजेई और गार्जियन काउंसिल का एक वरिष्ठ धर्मगुरु शामिल होते हैं। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि सत्ता में अचानक आए शून्य को संस्थागत ढंग से भरा जा सके और देश राजनीतिक अस्थिरता से बचा रहे। खामेनेई, जिन्होंने 1989 से ईरान का नेतृत्व किया, की मौत के बाद यह परिषद फिलहाल देश की नीतिगत दिशा तय करेगी।
[featured type="Featured"]
अयातुल्लाह अलीरेजा अराफी अराफी इंटरनेशनल सेंटर फॉर इस्लामिक साइंसेज के अध्यक्ष और बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के सदस्य हैं। इसके अलावा वे यूनिवर्सिटी रिसर्च इंस्टीट्यूट के अध्यक्ष, इमाम खुमेनी एजुकेशन एंड रिसर्च इस्टीट्यूट के शैक्षणिक विभाग से जुड़े रहे हैं, और कोम सेमिनरी की रिसर्च काउंसिल के सदस्य भी हैं। अराफी मेयबोद शहर के शुक्रवार इमाम रह चुके हैं और सुप्रीम काउंसिल ऑफ कल्चरल रेवोल्यूशन के सदस्य भी हैं। वे ईरान के सेमिनरी के अध्यक्ष और अल-मुस्तफा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के प्रमुख भी रह चुके हैं।
अराफी को ईरान का अंतरिम सुप्रीम लीडर इसलिए चुना गया क्योंकि खामेनेई की हत्या के बाद संविधान के आर्टिकल 111 के तहत अस्थायी लीडरशिप काउंसिल बनाई गई थी। इस 3 सदस्यीय परिषद में राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश और गार्जियन काउंसिल के ज्यूरिस्ट सदस्य शामिल हैं। अराफी को ज्यूरिस्ट सदस्य के रूप में चुना गया, जिससे वे अंतरिम सुप्रीम लीडर की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। वे खामनेई के करीबी और भरोसेमंद थे, गार्जियन काउंसिल, असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के सदस्य हैं, बसिज के प्रमुख और सेमिनरी सिस्टम के प्रमुख रह चुके हैं।
खामेनेई की मौत के बाद ईरान में सुरक्षा व्यवस्था अभूतपूर्व स्तर पर कड़ी कर दी गई है। राजधानी तेहरान सहित कई प्रमुख शहरों में सैन्य तैनाती बढ़ा दी गई है और संभावित विरोध या बाहरी खतरे को देखते हुए संवेदनशील ठिकानों की निगरानी तेज कर दी गई है। क्षेत्रीय स्तर पर भी तनाव बढ़ गया है, क्योंकि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ सख्त बयान सामने आ रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नए स्थायी सुप्रीम लीडर के चयन तक देश एक निर्णायक संक्रमण काल से गुजर रहा है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं।