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ईरान से आया न्योता, लेकिन नहीं जाएंगे PM मोदी...फिर भारत से कौन होगा खामेनेई के अंतिम संस्कार मेंल शामिल?

ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल नहीं होंगे। भारत की ओर से बिहार के राज्यपाल सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा प्रतिनिधित्व करेंगे। जानिए अंतिम संस्कार का पूरा कार्यक्रम और भारत-ईरान संबंधों का महत्व।
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फिर भारत से कौन होगा खामेनेई के अंतिम संस्कार मेंल शामिल?

नई दिल्ली। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेजेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया था, लेकिन पहले से तय विदेश यात्रा और सरकारी कार्यक्रमों के कारण प्रधानमंत्री इस समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे। उनकी जगह बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन और विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

भारत का यह फैसला केवल शोक व्यक्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे दोनों देशों के दशकों पुराने रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्तों का मजबूत संदेश भी माना जा रहा है।

पीएम मोदी को मिला था आधिकारिक निमंत्रण

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण भेजा था। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड का पहले से निर्धारित विदेश दौरा होने के कारण उनका ईरान जाना संभव नहीं हो सका। ऐसे में भारत सरकार ने वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला लिया।

भारत की ओर से कौन करेगा प्रतिनिधित्व?

प्रतिनिधि

जिम्मेदारी

लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन

बिहार के राज्यपाल, भारतीय प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख

पबित्रा मार्गेरिटा

विदेश राज्य मंत्री

दोनों नेता ईरान में आयोजित विभिन्न राजकीय श्रद्धांजलि कार्यक्रमों में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे।

4 से 9 जुलाई तक चलेगा अंतिम संस्कार कार्यक्रम

ईरान सरकार ने अयातुल्ला खामेनेई के सम्मान में कई दिनों तक चलने वाले राजकीय कार्यक्रम की रूपरेखा तैयार की है।

तारीख

कार्यक्रम

4 जुलाई

तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा

5 जुलाई

श्रद्धांजलि कार्यक्रम जारी रहेंगे

6 जुलाई

तेहरान में राजकीय अंतिम यात्रा निकलेगी

7 जुलाई

तेहरान और कोम में धार्मिक कार्यक्रम

9 जुलाई

मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा

बताया जा रहा है कि, अंतिम संस्कार में दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष, वरिष्ठ मंत्री और हजारों विदेशी प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं।

युद्ध के कारण टला अंतिम संस्कार

अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में हुई थी। इसके बाद पश्चिम एशिया में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए थे। सुरक्षा कारणों और युद्ध जैसी परिस्थितियों के चलते अंतिम संस्कार कार्यक्रम तत्काल आयोजित नहीं किया जा सका। करीब चार महीने बाद अब ईरान सरकार पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर रही है।

36 सालों तक रहे ईरान के सर्वोच्च नेता

अयातुल्ला अली खामेनेई लगभग 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। उनके कार्यकाल में ईरान की विदेश नीति, अमेरिका विरोधी रुख, परमाणु कार्यक्रम और पश्चिम एशिया की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला। उनकी मृत्यु के बाद मार्च 2026 में उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया।

Ali Khamenei

भारत-ईरान संबंध क्यों हैं अहम?

भारत और ईरान के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग जारी है-

  • चाबहार बंदरगाह परियोजना
  • ऊर्जा सुरक्षा
  • कच्चे तेल का व्यापार
  • क्षेत्रीय संपर्क परियोजनाएं
  • मध्य एशिया तक व्यापारिक पहुंच
  • आतंकवाद विरोधी सहयोग
  • सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध

भारत लंबे समय से ईरान को पश्चिम और मध्य एशिया तक पहुंच के महत्वपूर्ण साझेदार के रूप में देखता है।

हाल के महीनों में बढ़े दोनों देशों के संपर्क

हाल के समय में भारत और ईरान के बीच उच्चस्तरीय संपर्क लगातार जारी रहे हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की थी। वहीं अयातुल्ला खामेनेई के निधन के बाद भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास जाकर शोक पुस्तिका में हस्ताक्षर भी किए थे।

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क्या पीएम मोदी के नहीं जाने से रिश्तों पर असर पड़ेगा?

प्रधानमंत्री मोदी की अनुपस्थिति को केवल कार्यक्रमों के टकराव के संदर्भ में देखा जाएगा। हालांकि ईरान इस फैसले को अलग नजरिए से भी देख सकता है, क्योंकि भारत के इजरायल और अमेरिका दोनों के साथ मजबूत रणनीतिक संबंध हैं। इसके बावजूद भारत द्वारा वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल भेजना यह संकेत देता है कि नई दिल्ली दोनों देशों के पारंपरिक रिश्तों को मजबूत बनाए रखना चाहती है।

दुनियाभर की रहेगी नजर

अयातुल्ला खामेनेई के अंतिम संस्कार में दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेता और प्रतिनिधि शामिल होने वाले हैं। ऐसे में यह कार्यक्रम केवल धार्मिक या राजकीय आयोजन नहीं बल्कि वैश्विक कूटनीति का भी महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। भारत की ओर से भेजा जा रहा उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस बात का संकेत है कि, नई दिल्ली पश्चिम एशिया में संतुलित विदेश नीति बनाए रखते हुए ईरान के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को भी महत्व दे रही है।

Manisha Dhanwani
By Manisha Dhanwani

मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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