ईरान बोला- NATO देशों ने अमेरिका का साथ दिया :इन्हें जिम्मेदार ठहराया जाए, बघई ने सोशल मीडिया पर दी जानकारी

तेहरान। ईरान ने अमेरिका और इजराइल के हालिया हमलों को लेकर NATO सदस्य देशों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरान का कहना है कि जिन देशों ने इस सैन्य कार्रवाई में अमेरिका और इजराइल का साथ दिया, उन्हें इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक कॉमर्शियल जहाज पर अज्ञात हथियार से हमला होने के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ईरान ने NATO देशों से मांगा जवाब
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने सोशल मीडिया पर कहा कि NATO प्रमुख मार्क रूट ने स्वीकार किया है कि इटली और रोमानिया ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में अमेरिका का समर्थन किया था। बघई ने कहा कि इन देशों को अपने नागरिकों और दुनिया को बताना चाहिए कि उन्होंने इस अभियान का समर्थन क्यों किया।
होर्मुज के पास जहाज पर हमला
ब्रिटेन की यूके मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) के अनुसार, ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य में एक व्यापारिक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। हमले में जहाज के ब्रिज को नुकसान पहुंचा, हालांकि चालक दल का कोई सदस्य घायल नहीं हुआ। घटना के बाद इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।
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होर्मुज को लेकर ईरान और अमेरिका आमने-सामने
- ईरान ने संयुक्त राष्ट्र के उस प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए नया समुद्री रास्ता बनाने की बात कही गई थी। ईरान ने चेतावनी दी कि नियमों का पालन नहीं करने वाले जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वहीं अमेरिका ने साफ कहा कि वह होर्मुज पर किसी एक देश का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा।
- ट्रम्प प्रशासन ने अमेरिकी संसद से युद्ध खर्च, सैन्य तैयारियों और हथियारों के भंडार के लिए 87.6 अरब डॉलर (करीब 8.3 लाख करोड़ रुपये) की अतिरिक्त फंडिंग की मांग की है।
- उधर, लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई जारी है। नाबातियेह क्षेत्र में कार पर हुए हमले में तीन लोगों की मौत हुई, जबकि दक्षिणी लेबनान में कई मकानों को बुलडोजर से गिराने और आग लगाने की भी खबरें हैं।
हिजबुल्लाह प्रमुख बोले- लेबनान सरकार किसी के दबाव में नहीं आए
हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने अमेरिका-ईरान समझौते को अमेरिका और इजराइल की हार बताया। उन्होंने लेबनानी सरकार से अमेरिका और इजराइल के दबाव में न आने की अपील की और कहा कि इजराइल का मकसद सिर्फ सुरक्षा नहीं, बल्कि लेबनान के कुछ हिस्सों पर कब्जा करना भी है। इसी बीच वॉशिंगटन में अमेरिका की मध्यस्थता में इजराइल और लेबनान के बीच संघर्ष खत्म करने को लेकर बातचीत का नया दौर भी जारी है।











