अमेरिका में Snapchat पर यौन उत्पीड़न के लिए केस दर्ज :फीचर्स से रेपिस्ट बच्ची तक पहुंचा

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म स्नैपचैट की मूल कंपनी स्नैप के खिलाफ अमेरिका के मिसौरी राज्य में एक गंभीर मुकदमा दर्ज किया गया है। आरोप है कि प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर्स की वजह से 12 साल की एक बच्ची यौन अपराध का शिकार हुई। शिकायत में कहा गया है कि स्नैपचैट के Quick Add और Snap Map फीचर्स ने आरोपी को बच्ची तक पहुंचने और उससे संपर्क बनाने में मदद की।
कैसे हुआ संपर्क?
मुकदमे के अनुसार, 25 वर्षीय आरोपी गैब्रियल जोएल वैलेंटीन-रियोस को स्नैपचैट के Quick Add फीचर ने 12 साल की बच्ची और उसी इलाके की अन्य नाबालिग लड़कियों से जुड़ने का सुझाव दिया। आरोप है कि प्लेटफॉर्म ने आरोपी को एक सामान्य और मिलनसार युवक की तरह दिखाया, जबकि नाबालिगों को यह चेतावनी नहीं दी गई कि वे किसी अजनबी से जुड़ रहे हैं। शिकायत में कहा गया है कि इसी के बाद आरोपी ने बच्ची को बहला-फुसलाकर अपने जाल में फंसा लिया।
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सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि स्नैपचैट के अधिकारियों को पहले से जानकारी थी कि प्लेटफॉर्म के कुछ फीचर्स का इस्तेमाल अपराधी नाबालिगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। अदालत में यह भी कहा गया कि डार्क वेब पर ऐसी सामग्री मिली थी, जिसमें स्नैपचैट के फीचर्स का इस्तेमाल कर बच्चों तक पहुंचने के तरीके बताए गए थे।
सोशल मीडिया कंपनियों पर बढ़ रहे मुकदमे
सिर्फ स्नैपचैट ही नहीं, बल्कि मेटा (फेसबुक और इंस्टाग्राम), टिकटॉक और यूट्यूब जैसी बड़ी सोशल मीडिया कंपनियां भी अमेरिका में कई मुकदमों का सामना कर रही हैं। कैलिफोर्निया की अदालतों में सोशल मीडिया की लत और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े 3,300 से ज्यादा मामले लंबित हैं।
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भारत स्नैपचैट का सबसे बड़ा बाजार
स्नैपचैट के लिए भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, देश में इसके 25 करोड़ से ज्यादा मासिक सक्रिय यूजर्स हैं, जो कंपनी के वैश्विक यूजर बेस का करीब 36% हैं। 13 से 24 साल की उम्र के बड़ी संख्या में युवा इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यह मामला ऑनलाइन सुरक्षा और खासकर नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर नई बहस खड़ी कर सकता है।
सर्वे में भी सामने आई चिंता
एक सर्वे के मुताबिक, स्नैपचैट इस्तेमाल करने वाले लगभग आधे नाबालिग यूजर्स ने पिछले साल प्लेटफॉर्म पर असुरक्षित या आपत्तिजनक सामग्री और संदेश देखने की बात कही थी। ऐसे में अब कंपनी की सुरक्षा नीतियों और बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।











