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SpaceX ने किया अपना दूसरा मून मिशन लॉन्च, चंद्रमा से जुड़ी जानकारी जुटाने में अमेरिका को मदद, 2 महीने में दूसरी कामयाब कोशिश

SpaceX ने किया अपना दूसरा मून मिशन लॉन्च, चंद्रमा से जुड़ी जानकारी जुटाने में अमेरिका को मदद, 2 महीने में दूसरी कामयाब कोशिश
अमेरिका की प्राइवेट स्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने अपना दूसरा मिशन एथेना IM-2 लांच कर दिया है। ये भारतीय समयानुसार सुबह 5:45 बजे लॉन्च किया गया। इसे अमेरिका के कैनेडी स्पेस सेंटर से फाल्कन 9 रॉकेट के जरिए लॉन्च किया गया। यह मून लैंडर करीब 8 दिनों में धरती से चंद्रमा तक की दूरी तय करेगा। साथ ही यह साउथ पोल के नजदीक मोन्स माउंटेन पर लैंड करेगा। यह चंद्रमा पर स्थित सबसे बड़ा पर्वत है जो 100 किमी तक फैला है। साथ ही सतह से 20 हजार फीट ऊंचा है। बता दे कि यह मून लैंडर, लैंडिंग के बाद करीब 10 दिन तक काम कर सकता है। [caption id="attachment_154300" align="aligncenter" width="600"] अमेरिका की प्राइवेट स्पेस कंपनी स्पेसएक्स का दूसरा मिशन एथेना IM-2[/caption]  

इस में लैंडर में क्या खास 

इस मून लैंडर में एक छोटा रोबोट माइक्रो नोवा हॉपर लगाया गया है। इस रोबोट को ग्रेस नाम दिया गया है। इसके अलावा इसमें चार पहियों वाला माइक्रोवेव आकार का एक रोवर भी है, जो चांद की सतह पर डेटा कलेक्ट करेगा। इस मून लैंडर को इंट्यूशिव मशींस (IM) नाम की कंपनी ने बनाया है, जिस वजह से इसका नाम एथेना IM-2 रखा गया। 

चंद्रमा से जुड़ी जानकारी जुटाने में मदद 

इस मिशन का लक्ष्य चंद्रमा की सतह से जुड़ी नई जानकारी जुटाना है। लैंडर पर लगे रोवर में एक ड्रिल मशीन लगी है, जो लगभग 10 बार ड्रिलिंग करेगा। हर बार ड्रिलिंग में यह करीब 10 सेंटीमीटर गहराई तक खुदाई करेगा। यानी कुल मिलाकर यह मशीन एक मीटर तक जमीन के अंदर जाकर सैंपल इकट्ठा कर सकता है।

फाल्कन-9 दुनिया का पहला ऑर्बिटल क्लास रियूजेबल रॉकेट

मून लैंडर को जिस फाल्कन-9 रॉकेट से लॉन्च किया गया है, वह दोबारा इस्तेमाल किया जा सकने वाला (रीयूजेबल) टू-स्टेज रॉकेट है। इसे स्पेसएक्स ने पृथ्वी की कक्षा और उससे आगे तक एस्ट्रोनॉट्स और पेलोड ले जाने के लिए डिजाइन किया है। [caption id="attachment_154299" align="aligncenter" width="600"] फाल्कन-9 दुनिया का पहला ऑर्बिटल क्लास रियूजेबल रॉकेट[/caption] ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट एक प्राइवेट स्पेसक्राफ्ट है, जो 7 एस्ट्रोनॉट्स को स्पेस में ले जाने में सक्षम है। यह अब तक का इकलौता प्राइवेट स्पेसक्राफ्ट है, जो इंसानों को स्पेस स्टेशन तक पहुंचाता है। इसकी पहली टेस्ट फ्लाइट 2010 में हुई थी।
Akriti Tiwary
By Akriti Tiwary

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