होली रंगों का ऐसा त्योहार जो सभी में जोश भर देता है। इस दिन चारों ओर रंग-गुलाल के ऐसे फव्वारे उड़ते हैं कि हर कोई उसमें समाता चला जाता है। पर क्या आप भी हर बार की तरह वही रंग, वही गुलाल खेल-खेलकर बोर हो गए हैं तो आइए चलते हैं इस साल उन शहरों की ओर जहां मनाई जाती है कुछ स्पेशल तरह की होली। देश में पांच ऐसे शहर हैं, जहां की होली सिर्फ एक त्योहार नहीं बल्कि एक ऐसी परंपरागत शैली है, जिसको जानना, जिसको नजदीक से देखना, खेलना आपके पूरे साल को यादगार बना सकता है। तो फिर देर किस बात की? आइए चलते हैं ऐसे ही शहरों के सफर पर।
अगर आपको वाकई होली के रंगों में रंगना है, उसके असल चाह को जीना है तो मथुरा-वृंदावन की होली से बढ़कर कुछ भी नहीं। मथुरा और वृंदावन की होली इसलिए भी खास है क्योंकि यहां होली एक दिन नहीं मनाई जाती बल्कि कई दिनों तक यहां के लोग होली के रंगों में डूबे रहते हैं। यहां के मंदिरों में लगातार पूजा-कीर्तिन होते रहते हैं, मृदंग-ढ़ोल बजते रहते हैं, फूलों की होली खेली जाती है, गुलालों की बारिश की जाती है। कह सकते हैं कि पूरा मथुरा, पूरा वृंदावन होली के रंगों में डूब जाता है। ऐसे में अगर आप भी स्पेशल होली को जीना चाहते हैं तो जाएं और घूमें इस बार मथुरा और वृंदावन और मनाएं अपनी खास होली।
इसमें कोई शक नहीं कि बरसाने की लठ्ठ मार होली पूरे विश्व में विख्यात है। यहां की होली देखने का अपना मजा है। दरअसल एक पुरानी प्रथा के अनुसार, यहां की महिलाएं लठ्ठ मार कर पुरूषों पर अपना शक्ति प्रर्दशन करती हैं, और बेचारे पुरूष ढ़ाल से बचाव करते हैं। ये सारी विधि हंसी- मजाक और ठिठोली के रूप में की जाती है। और होली का मजा लिया जाता है। इस परंपरागत लठ्ठ-मार प्रथा को देखने के लिए दुनिया भर से हर साल लोग यहां आते हैं।
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अगर आप इस बार शाही अंदाज की होली देखना चाहते हैं तो राजस्थान वाकई एक बेस्ट शहर है। यहां की रॉयल होली आपको दीवाना बना देगी। होली की असल ठाट-बाट, पारंपरिक लोक-नृत्य, यहां पर होली पर बनने वाले लजीज पकवान आप ना चाहते हुए भी उदयपुर और राजस्थान के होली के रंगों से खुद को बचा नहीं पाएंगे। अगर सिर्फ उदयपुर शहर की बात की जाए तो यहां पर होली के दिन मेवाड़ का राज परिवार उत्सव का विशेष आयोजन करता है। राजमहल से शाही जुलूस निकाले जाते हैं। तो आप भी उदयपुर के शाही होली को देख मनाएं अपने रंगों के त्यौहार को और भी खास।
पश्चिम बंगाल के कोलकाता की होली भी बहुत पुरानी, बहुत पारंपरिक है। यहां की होली में कला और संस्कृति का एक अनूठा संगम देखने को मिलता है। स्त्रियां पीले रंग, पीले गुलाल के साथ एक -दूसरे के गालों पर रंगों को लगाकर होली खेलती हैं। शांति निकेतन में मनाए जाने वाले इस बसंतोत्सव की शुरूआत खुद रविंद्रनाथ टैगोर ने की थी। बसंत का ऐसा कलात्मक उत्सव सचमुच सुकून देने लायक होता है। अगर आप भीड़-भाड़ से दूर सुकून की होली मनाना चाहते हैं तो पश्चिम बंगाल का बसंत उत्सव आपके लिए बेस्ट है।
ट्रेडिशन के साथ-साथ मार्डन होली पार्टी की चाह अगर आप रखते हैं तो वाकई दिल्ली से बढ़कर कुछ नहीं। यहां परंपरा को मार्डन रंग देकर एक नए अंदाज में होली मनाई जाती है। पार्टी, डांस, म्यूजिक, स्पेशल पकवान और रंग व गुलाल का अजीज जोड़ वाकई दिल्ली की होली को स्पेशल बना देता है। तो बिना देर किए आप भी दिल्ली जाएं और जबरदस्त तरीके से अपनी होली मनाएं।