इंदौर के लसूडिया क्षेत्र में किन्नरों की गुंडागर्दी के लगातार मामले सामने आ रहे हैं, जहां नेग के नाम पर खुलेआम वसूली, अभद्रता और धमकी का खेल चल रहा है। ताजा घटनाओं ने पूरे इलाके में दहशत का माहौल बना दिया है, वहीं पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
महालक्ष्मी नगर निवासी डॉ. आशीष चौहान ने शिकायत में बताया कि 23 मार्च की सुबह किन्नरों का एक झुंड जबरन घर में घुस आया। उस वक्त घर में केवल महिलाएं मौजूद थीं, जिसका फायदा उठाकर आरोपियों ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। बताया गया है कि किन्नरों ने नेग के नाम पर सीधे 50 हजार रुपए की मांग ठोक दी। विरोध करने पर अश्लील हरकतें और बदसलूकी शुरू कर दी गई। मामला इतना बढ़ा कि डायल-100 बुलानी पड़ी।
पुलिस के सामने ही किन्नरों को करीब 80 हजार रुपए दिलवा
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पीड़ित के मुताबिक, मौके पर पहुंची पुलिस के सामने ही किन्नरों को करीब 80 हजार रुपए दिलवा दिए गए। इस पूरी घटना के सीसीटीवी फुटेज और रिकॉर्डिंग होने का दावा भी किया गया है। शिकायत सीएम हेल्पलाइन और लसूड़िया थाना प्रभारी तक पहुंचाई गई है।
इससे पहले तुलसी नगर में भी किन्नरों के हंगामे ने लोगों को दहला दिया था। पीड़ित आशीष दुबे के अनुसार, 6-7 किन्नर बिना अनुमति घर में घुस आए और 51 हजार रुपए की मांग करने लगे।
जब परिवार ने इतनी रकम देने में असमर्थता जताई, तो आरोप है कि किन्नरों ने अश्लील हरकतें करते हुए जमकर तोड़फोड़ मचाई। विरोध करने पर पीड़ित की मां के साथ मारपीट की गई, बाल पकड़कर घसीटा गया और जान से मारने की धमकियां दी गईं।
इतना ही नहीं, घर में रखी देवी-देवताओं की मूर्तियां तक उठाकर फेंकने का आरोप लगाया गया है। शोर-शराबा सुनकर पड़ोसी मौके पर पहुंचे, तब जाकर हालात काबू में आए।
हैरानी की बात यह है कि इन घटनाओं से एक दिन पहले ही लसूड़िया थाने में किन्नरों के व्यवहार को लेकर बैठक हुई थी, जिसमें तुलसी नगर मामले में सामूहिक माफी भी दिलवाई गई थी। इसके बावजूद दोबारा इस तरह की घटनाएं सामने आना पुलिस की सख्ती पर सवाल खड़े करता है।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि शिकायतों के आधार पर जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। लेकिन लगातार सामने आ रही घटनाओं ने यह साफ कर दिया है कि इलाके में कानून व्यवस्था को चुनौती दी जा रही है और आम नागरिक खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।