इथेनॉल ब्लेंडिंग पर बड़ा दावा:सिर्फ 3.3% कम होता है माइलेज, इंजन भी रहेगा सुरक्षित

देश में इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20 फ्यूल) को लेकर गाड़ियों के माइलेज और इंजन पर असर को लेकर उठ रही आशंकाओं पर सरकार और इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स ने स्थिति साफ कर दी है। आम वाहन चालकों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इथेनॉल मिलाने से गाड़ी का माइलेज कम हो जाता है और क्या इससे इंजन को नुकसान पहुंचता है। इस मुद्दे पर सरकार की ओर से विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस की गई जिसमें इंडस्ट्री के टॉप एक्सपर्ट्स ने विस्तार से जानकारी दी।
माइलेज में सिर्फ 3.3% की गिरावट
इंजिनियर्स इंडिया लिमिटेड (EIL) की पूर्व सीएमडी वर्तिका शुक्ला ने कहा कि इथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला बिना रिसर्च के नहीं लिया गया है, बल्कि यह लंबे अध्ययन और परीक्षणों के बाद लागू किया गया है। उन्होंने बताया कि जब E10 की जगह E20 फ्यूल इस्तेमाल किया जाता है, तो गाड़ी के माइलेज में केवल लगभग 3.3 प्रतिशत की कमी आती है जो बहुत मामूली है।
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इंजन पर कोई नुकसान नहीं
एक्सपर्ट्स ने यह भी साफ किया कि E20 फ्यूल पूरी तरह से BS-6 और पुराने इंजनों के अनुकूल है। इसे ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के मानकों के अनुसार तैयार किया गया है। सरकार के अनुसार इसमें लगभग 80% तक फॉसिल फ्यूल शामिल रहता है जिससे इंजन की लाइफ या परफॉर्मेंस पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता।
बड़ी टेस्टिंग के बाद लिया गया फैसला
अधिकारियों ने बताया कि 2023 में E20 फ्यूल को लागू करने के बाद बड़े स्तर पर परीक्षण किया गया। 2026 तक करीब 2.84 करोड़ वाहनों की सर्विसिंग की गई जिनमें से 1.5 करोड़ से ज्यादा वाहन 3 साल से पुराने थे। इन सभी वाहनों में इथेनॉल ब्लेंडिंग से कोई बड़ा नुकसान नहीं पाया गया।
ऑटो इंडस्ट्री का समर्थन और भविष्य की योजना
टोयोटा के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी ने भी बताया कि सरकार ने 2021 में विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के बाद ही E20 फ्यूल की दिशा में कदम बढ़ाया था। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसी तरह की टेस्टिंग और तकनीकी विकास के आधार पर ईंधन नीति आगे बढ़ेगी। साथ ही सरकार फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए E85 ईंधन पर भी काम कर रही है जो भविष्य की बड़ी तकनीकी दिशा मानी जा रही है।












