इंदौर के भीषण अग्निकांड में जान गंवाने वाले उद्योगपति मनोज पुगलिया की जिंदगी से जुड़े कई ऐसे पहलू सामने आए हैं, जो उनके शौक और रुतबे की कहानी बयां करते हैं। उनके चालक संदीप, जो करीब 20 वर्षों से उनके साथ थे, बताते हैं कि मनोज को सोना पहनने का खास शौक था। वे पांचों उंगलियों में हीरे जड़ी अंगूठियां पहनते थे और जीवनशैली में शानो-शौकत झलकती थी। यहां तक कि घुटने के ऑपरेशन के दौरान उन्होंने मजाक में डॉक्टरों से कहा था कि “घुटना भी सोने का ही लगाना।”
संदीप के मुताबिक, हादसे के वक्त घर के अंदर शराब की बोतलें भी रखी थीं, जो आग लगने के बाद तेज धमाकों के साथ फटीं। इन धमाकों ने आग को और भड़काने का काम किया, जिससे कुछ ही पलों में पूरा घर आग की चपेट में आ गया। हाल ही में जनवरी में बेटे सौमिल की शादी से पहले घर में बड़े स्तर पर फर्नीचर और पीओपी का काम कराया गया था, वहीं छत पर बेटों के लिए जिम भी तैयार करवाया गया था। लेकिन बुधवार तड़के लगी आग ने इन सभी सपनों और तैयारियों को राख में बदल दिया।
इस दर्दनाक हादसे के बाद परिवार के बचे सदस्य—बेटे सौरभ, सौमिल, हर्षित, पत्नी सुनीता और छोटी बहू सखी—अब अपने ही जले हुए घर के आसपास नया आशियाना तलाश रहे हैं। फिलहाल परिवार रिश्तेदारों के यहां ठहरा हुआ है, लेकिन उनकी इच्छा है कि वे ब्रजेश्वरी (एनएक्स) इलाके को छोड़कर कहीं और न जाएं।
ड्राइवर संदीप ने बताया कि मनोज पुगलिया की चार कारें घर के सामने खाली प्लॉट में अब भी खड़ी हैं, लेकिन आग में चाबियां जल जाने के कारण वे स्टार्ट नहीं हो पा रहीं। परिवार चाहता है कि पुलिस की अनुमति मिलते ही वे चाबियां ढूंढकर कारों को हटाएं। हादसे के बाद से इलाके में लोगों की भीड़ लगी रहती है, हर कोई इस त्रासदी को करीब से देखने और समझने की कोशिश कर रहा है। जब भी परिवार के बच्चे मकान देखने आते हैं, वहां लोगों का जमावड़ा लग जाता है। शनिवार को बच्चों के दोस्तों ने मकान की खिड़कियों को चादर से ढंक दिया, ताकि भीतर का मंजर नजर न आए।
मनोज पुगलिया की संघर्ष भरी यात्रा भी कम प्रेरणादायक नहीं थी। किशनगंज में कुछ समय बिताने के बाद वे इंदौर आए और रबर के कारोबार की शुरुआत की। कड़ी मेहनत और लगन से उन्होंने अपना व्यवसाय बिहार से लेकर नेपाल तक फैला दिया और शहर में तिलक नगर व ब्रजेश्वरी (एनएक्स) सहित तीन मकान खड़े किए। उन्हें घर सजाने का भी खास शौक था और वे हर साल अपने मकानों का रिनोवेशन करवाते थे।
अब उसी घर की राख के बीच खड़ा यह परिवार एक नई शुरुआत की तलाश में है। लेकिन दर्द इतना गहरा है कि वे उस इलाके को छोड़ने को तैयार नहीं, जहां उनकी यादें बसी हैं। वहीं, इस हादसे के बाद मनोज पुगलिया की पत्नी सुनीता की तबीयत फिर बिगड़ गई है और उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राजस्थान के सादलगढ़ से 35 साल पहले सपनों की तलाश में निकले मनोज ने जो साम्राज्य खड़ा किया था, वह एक ही रात में खाक हो गया।