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तेजस विमान का ब्रेक फेल :लैंडिंग के दौरान रनवे से आगे निकला फाइटर जेट, IAF ने सभी 30 विमान ग्राउंड किए

भारतीय वायुसेना का तेजस लड़ाकू विमान लैंडिंग के दौरान रनवे से फिसल गया। पायलट सुरक्षित बाहर निकल गया, लेकिन विमान को नुकसान पहुंचा है। हादसे के बाद पूरे तेजस बेड़े की तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। यह तीसरी बार है जब तेजस दुर्घटना का शिकार हुआ है।
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लैंडिंग के दौरान रनवे से आगे निकला फाइटर जेट, IAF ने सभी 30 विमान ग्राउंड किए
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    नई दिल्ली। देश की रक्षा ताकत का प्रतीक माना जाने वाला स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस एक बार फिर हादसे की वजह से सुर्खियों में है। प्रशिक्षण उड़ान के बाद लैंडिंग के दौरान हुए इस हादसे ने न सिर्फ भारतीय वायुसेना की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि तेजस की तकनीकी मजबूती और समय पर डिलीवरी को लेकर भी नए सवाल खड़े कर दिए हैं। राहत की बात यह रही कि पायलट समय रहते सुरक्षित बाहर निकल गया, लेकिन विमान को गंभीर नुकसान पहुंचा है।

    लैंडिंग के वक्त हुआ हादसा, पायलट सुरक्षित

    जानकारी के मुताबिक, यह घटना 7 फरवरी को हुई, जब Indian Air Force का लड़ाकू विमान तेजस एक नियमित प्रशिक्षण उड़ान के बाद एयरबेस पर लौट रहा था।

    लैंडिंग के दौरान जैसे ही विमान रनवे पर उतरा, पायलट ने ब्रेक लगाने की कोशिश की, लेकिन ब्रेक सिस्टम ने काम नहीं किया। इसके बाद विमान रनवे से आगे निकल गया। हालात बिगड़ते देख पायलट ने तुरंत इजेक्शन किया और सुरक्षित बाहर निकल आया। पायलट को कोई गंभीर चोट नहीं आई है।

    हालांकि, इस दुर्घटना में विमान के ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और शुरुआती आकलन में इसे सर्विस से बाहर किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

    तकनीकी खराबी की आशंका, जांच शुरू

    शुरुआती जांच में ऑनबोर्ड सिस्टम में तकनीकी खराबी की आशंका जताई गई है। खासतौर पर ब्रेक फेल होने की बात सामने आ रही है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच के बाद ही सामने आएगा।

    मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस घटना के बाद करीब 30 सिंगल-सीट तेजस विमानों को एहतियातन ग्राउंड कर दिया गया है। यानी जांच पूरी होने तक ये विमान उड़ान नहीं भरेंगे। फिलहाल इस पूरे मामले पर वायुसेना की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

    तीसरी बार हादसे का शिकार हुआ तेजस

    यह पहली बार नहीं है जब तेजस को दुर्घटना का सामना करना पड़ा हो। यह तेजस से जुड़ा तीसरा बड़ा हादसा माना जा रहा है।

    मार्च 2024 - जैसलमेर हादसा

    राजस्थान के पोकरण क्षेत्र में ‘भारत शक्ति’ युद्धाभ्यास के दौरान तेजस फाइटर जेट इंजन फेल होने के कारण क्रैश हो गया था। यह विमान जैसलमेर शहर से करीब 2 किलोमीटर दूर एक रिहायशी इलाके के पास गिरा था। पायलट ने समय रहते इजेक्ट कर जान बचा ली थी।

    नवंबर 2025 - दुबई एयरशो हादसा

    नवंबर 2025 में Dubai Airshow के दौरान एरियल डेमो फ्लाइट में तेजस जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। यह हादसा अल मकतूम एयरपोर्ट पर हुआ, जिसमें विमान में आग लग गई और काले धुएं का गुबार उठता देखा गया।

    इस दुर्घटना में पायलट विंग कमांडर नमांश स्याल की मौत हो गई थी। वह हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के निवासी थे। इस हादसे की जांच अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।

    तेजस Mk-1A डिलीवरी में देरी

    • तेजस से जुड़ा यह ताजा हादसा ऐसे समय में हुआ है, जब तेजस Mk-1A कार्यक्रम पहले ही देरी का सामना कर रहा है।
    • भारतीय वायुसेना ने तेजस के 180 विमानों का ऑर्डर दिया है, लेकिन इनकी डिलीवरी लगभग दो साल पीछे बताई जा रही है।
    • हालांकि 2021 में 83 तेजस Mk-1A विमानों के लिए लगभग ₹48,000 करोड़ की बड़ी डील हुई थी, लेकिन उत्पादन और सप्लाई में देरी वायुसेना की परिचालन तैयारियों पर असर डाल रही है।

    तेजस: भारत का स्वदेशी फाइटर जेट

    तेजस को Hindustan Aeronautics Limited (HAL) ने विकसित किया है। यह भारत का पहला स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट है, जिसे पुराने मिग-21 विमानों की जगह लाने के लिए तैयार किया गया।

    तेजस की प्रमुख खासियतें

    रेंज: लगभग 3000 किलोमीटर

    अधिकतम गति: 2205 किमी/घंटा

    सर्विस सीलिंग: 16,000 मीटर

    वजन: करीब 6500 किलोग्राम

    कीमत: लगभग ₹600 करोड़ प्रति विमान

    लंबाई: 13 मीटर से अधिक

    भारतीय वायुसेना में तेजस का सफर

    1983: लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) प्रोजेक्ट की शुरुआत

    2001: तेजस की पहली उड़ान

    2015: तेजस Mk-1 भारतीय वायुसेना में शामिल

    2021: 83 तेजस Mk-1A के लिए मेगा डील

    2030: 180 विमानों के लक्ष्य के लिए 3 प्रोडक्शन लाइन

    हादसों के बाद उठते सवाल

    लगातार हो रहे हादसों ने तेजस की तकनीकी विश्वसनीयता, मेंटेनेंस सिस्टम और टेस्टिंग प्रोसेस पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नए या स्वदेशी प्लेटफॉर्म में शुरुआती दौर में चुनौतियां आती हैं, लेकिन बार-बार की घटनाएं गंभीर समीक्षा की मांग करती हैं।

    वायुसेना के लिए यह जरूरी है कि जांच में पारदर्शिता रहे और यदि सिस्टम में खामी है तो उसे जल्द से जल्द दूर किया जाए।

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    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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