Aakash Waghmare
1 Feb 2026
काठमांडू। नेपाल ने 100 रुपए का नया नोट जारी किया है, लेकिन इसके साथ ही भारत-नेपाल संबंधों में एक नया तनाव खड़ा हो गया है। इस नोट पर नेपाल का अपडेटेड राजनीतिक नक्शा दिखाया गया है। जिसमें भारतीय इलाके कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को भी शामिल किया गया है। नेपाल इन इलाकों पर दावा करता रहा है, लेकिन पहली बार इन्हें बैंक नोट पर छापने का कदम दोनों देशों में विवाद का बड़ा कारण बन गया है। विवाद इसलिए भी और गहराया है, क्योंकि इन नोटों की छपाई चीन में हुई है। जिससे पड़ोसी देश की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
नेपाल के केंद्रीय बैंक ने 100 रुपए के नए नोट जारी किए हैं। इन पर हल्के हरे रंग में नेपाल का नया मैप छपा है, जिसमें तीनों विवादित भारतीय इलाके दिखाई दे रहे हैं। साल 2020 में नेपाल की तत्कालीन ओली सरकार ने राजनीतिक मानचित्र बदलकर इन इलाकों को आधिकारिक रूप से नेपाल का हिस्सा घोषित कर दिया था। उस समय भारत ने इसे “एकतरफा और अस्वीकार्य” कदम बताया था। अब वही विवादित नक्शा नए नोट पर भी शामिल किया गया है।
नेपाल के नोटों की छपाई पहले भारत में होती थी। लेकिन 2020 में जब नेपाल ने नए विवादित नक्शे में भारतीय इलाकों को शामिल किया, तब भारत ने इन नोटों को छापने से इनकार कर दिया। इसके बाद नेपाल ने चाइना बैंकनोट प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉरपोरेशन (CBPMC) को नोट छापने का ऑर्डर दे दिया।
तीन सौ मिलियन नोटों की खेप चीन से नेपाल को भेजी गई है। यही वजह है कि भारत-नेपाल विवाद में चीन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। क्या चीन नेपाल को भड़का रहा है? क्या ये भारत के खिलाफ रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश है?
नेपाल ने भले ही इसे “सरकारी निर्णय” बताया हो, लेकिन भारत-चीन संबंधों में 2020 की गलवान घटना के बाद नेपाल का चीन के साथ करीब आना चर्चा का विषय रहा है।

नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि, नक्शा सरकार के 2020 के फैसले के अनुसार अपडेट किया गया है। पुराने 100 के नोट पर भी नक्शा था, लेकिन इसे संशोधित किया गया है। नोट पर माउंट एवरेस्ट, रोडोडेंड्रोन वॉटरमार्क और पीछे एक-सींग वाले गैंडे की तस्वीर है। दृष्टिबाधितों के लिए सुरक्षा धागा और उभरा हुआ बिंदु भी जोड़ा गया है। बैंक का दावा है कि, यह कोई “नया कदम नहीं” बल्कि सरकारी निर्देश का पालन मात्र है।
भारत ने साफ कहा है कि, कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा भारतीय क्षेत्र हैं। नेपाल का यह कदम एकतरफा, तथ्यहीन और स्वीकार्य नहीं है। नक्शे से वास्तविक सीमा नहीं बदल सकती। भारत ने पहले भी चेतावनी दी थी कि, किसी भी तरह का कृत्रिम विस्तार मान्य नहीं होगा।
भारत-नेपाल सीमा विवाद की जड़ें 1815 की सुगौली संधि से जुड़ी हैं, जो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी और गोरखा साम्राज्य के बीच हुई थी। काली नदी को दोनों देशों की सीमा माना गया, लेकिन सवाल यह है कि काली नदी कहां से शुरू होती है? भारत के अनुसार नदी लिपुलेख से निकलती है, जबकि नेपाल कहता है कि नदी लिम्पियाधुरा से शुरू होती है।
यही विवाद तीनों क्षेत्रों को लेकर दोनों देशों को अलग-अलग दावे करने पर मजबूर करता है। 1960 में नेपाल के राजा महेंद्र ने भारत को इस क्षेत्र का सैन्य उपयोग करने की अनुमति भी दी थी। विवाद 1990 के बाद तब बढ़ा, जब नेपाल में लोकतांत्रिक सरकार बनी और सीमाओं पर नए सिरे से आपत्ति शुरू हुई।
2020 में भारत-चीन गलवान झड़प के दौरान नेपाल द्वारा अचानक नया नक्शा जारी करना कई विशेषज्ञों को चौंकाने वाला लगा था। अब जब नेपाल ने चीन में छपे नोटों पर वही नक्शा लगाया है, तो सवाल उठ रहे हैं कि-
नेपाल ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया है, लेकिन दोनों देशों की राजनीति और भू-रणनीति में इसका असर साफ देखा जा रहा है।