
डिंडौरी। नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के लिए केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन का आधार है। इसी धड़कन को स्वच्छ और पुनर्जीवित रखने के लिए डिंडौरी जिले में चलाया जा रहा 'मैया अभियान' अब पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन गया है। इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि जिले की कमान संभालने वाली कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया स्वयं हर रविवार तसला और फावड़ा लेकर घाटों पर गंदगी साफ करती नजर आती हैं।

अफसरशाही छोड़, मैदान में उतरा अमला आम तौर पर रविवार की सुबह जब शहर चैन की नींद सो रहा होता है, तब कलेक्टर के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों की एक बड़ी टोली नर्मदा तटों पर पहुंच जाती है। अभियान में एसडीएम, तहसीलदार, सीएमओ और अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी बिना किसी हिचकिचाहट के नदी के भीतर उतरकर कचरा और सिल्ट निकालते हैं। अधिकारियों को इस तरह श्रमदान करते देख अब स्थानीय नागरिक और वॉलंटियर्स भी बड़ी संख्या में इस मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं।
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2022 से जारी है निरंतर प्रयास बता दें कि इस अभियान की शुरूआत वर्ष 2022 में हुई थी। इसका उद्देश्य केवल सांकेतिक सफाई नहीं, बल्कि नर्मदा को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाना है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के साथ मिलकर अब इसे और विस्तार दिया गया है। प्रशासन की इस सक्रियता का असर अब घाटों की स्वच्छता के रूप में साफ दिखने लगा है।

साबुन और डिटर्जेंट पर रोक की अपील सफाई के साथ-साथ जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। कलेक्टर और उनकी टीम घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं से लगातार अपील कर रही है कि वे मां नर्मदा के आंचल को रसायनों से दूषित न करें। नदी में साबुन और डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करने की इस अपील का असर अब लोगों के व्यवहार में भी दिखने लगा है।
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कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि, पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प है। जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग खुद जमीन पर उतरकर कार्य करते हैं, तो वह एक जन-आंदोलन का रूप ले लेता है। 'मैया अभियान' की सफलता आज डिंडौरी के घाटों की चमक और नर्मदा के निर्मल जल में साफ झलक रही है।