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MP News :डिंडौरी में हर रविवार 'मैया अभियान' से संवर रही नर्मदा नदी

डिंडौरी में हर रविवार मैया अभियान के तहत नर्मदा नदी में श्रमदान किया जा रहा है। आम लोगों के अलावा कलेक्टर भी तसला और फावड़ा लेकर घाटों पर गंदगी साफ करती नजर आती हैं। कलेक्टर के साथ प्रशासनिक अधिकारी भी श्रमदान करने पहुंचते हैं।
डिंडौरी में हर रविवार 'मैया अभियान' से संवर रही नर्मदा नदी

डिंडौरी। नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के लिए केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था और जीवन का आधार है। इसी धड़कन को स्वच्छ और पुनर्जीवित रखने के लिए डिंडौरी जिले में चलाया जा रहा 'मैया अभियान' अब पूरे प्रदेश के लिए एक मिसाल बन गया है। इस अभियान की सबसे खास बात यह है कि जिले की कमान संभालने वाली कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया स्वयं हर रविवार तसला और फावड़ा लेकर घाटों पर गंदगी साफ करती नजर आती हैं।

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मुहिम का हिस्सा बन रहे नागरिक

अफसरशाही छोड़, मैदान में उतरा अमला आम तौर पर रविवार की सुबह जब शहर चैन की नींद सो रहा होता है, तब कलेक्टर के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों की एक बड़ी टोली नर्मदा तटों पर पहुंच जाती है। अभियान में एसडीएम, तहसीलदार, सीएमओ और अन्य विभागों के अधिकारी-कर्मचारी बिना किसी हिचकिचाहट के नदी के भीतर उतरकर कचरा और सिल्ट निकालते हैं। अधिकारियों को इस तरह श्रमदान करते देख अब स्थानीय नागरिक और वॉलंटियर्स भी बड़ी संख्या में इस मुहिम का हिस्सा बन रहे हैं।

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घाटों पर दिखने लगा अभियान का असर

2022 से जारी है निरंतर प्रयास बता दें कि इस अभियान की शुरूआत वर्ष 2022 में हुई थी। इसका उद्देश्य केवल सांकेतिक सफाई नहीं, बल्कि नर्मदा को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त बनाना है। 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के साथ मिलकर अब इसे और विस्तार दिया गया है। प्रशासन की इस सक्रियता का असर अब घाटों की स्वच्छता के रूप में साफ दिखने लगा है।

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साबुन और डिटर्जेंट पर रोक की अपील

साबुन और डिटर्जेंट पर रोक की अपील सफाई के साथ-साथ जागरूकता पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। कलेक्टर और उनकी टीम घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं से लगातार अपील कर रही है कि वे मां नर्मदा के आंचल को रसायनों से दूषित न करें। नदी में साबुन और डिटर्जेंट का इस्तेमाल न करने की इस अपील का असर अब लोगों के व्यवहार में भी दिखने लगा है।

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पर्यावरण संरक्षण एक सामूहिक संकल्प : कलेक्टर

कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि, पर्यावरण संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक सामूहिक संकल्प है। जब जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग खुद जमीन पर उतरकर कार्य करते हैं, तो वह एक जन-आंदोलन का रूप ले लेता है। 'मैया अभियान' की सफलता आज डिंडौरी के घाटों की चमक और नर्मदा के निर्मल जल में साफ झलक रही है। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...

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