बीते डेढ़ दशक में पहली बार ऐसा हो रहा है जब होली जैसे बड़े त्योहार पर कोई भी बड़ी हिंदी फिल्म रिलीज नहीं हो रही। आमतौर पर मेकर्स फेस्टिव मूड और हॉलीडे फुटफॉल का फायदा उठाकर फिल्मों को रिलीज करते रहे हैं। 2001 में चोरी चोरी चुपके चुपके, 2008 में रेस, 2017 में बद्रीनाथ की दुल्हनिया, 2019 में केसरी और 2023 में तू झूठी मैं मक्कार जैसी फिल्में होली पर रिलीज होकर सफल रही थीं। सिर्फ 2002, 2003 और 2011 ऐसे साल रहे जब होली पर कोई बड़ी हिंदी रिलीज नहीं आई। दिलचस्प बात यह है कि 2003 और 2011 में क्रिकेट वर्ल्ड कप के चलते मेकर्स ने रिलीज टाल दी थी।
ट्रेड सर्किट के मुताबिक, इस साल चल रहे टी20 वर्ल्ड कप ने मेकर्स को होली स्लॉट से दूर रखा। इसके अलावा रमजान का पवित्र महीना और बोर्ड परीक्षाएं भी फुटफॉल पर असर डालने वाले फैक्टर माने जा रहे हैं। यशराज फिल्म्स ने भी अपनी फिल्म मर्दानी 3 को फरवरी से पहले जनवरी में प्रीपोन कर दिया था। इसी तरह ‘पति पत्नी और वो 2’ और ‘गबरू’ जैसी फिल्मों को मई तक टाल दिया गया।

कंटेंट की कमी का असर सीधे एग्ज़िबिशन सेक्टर पर पड़ा है। मुंबई के आइकॉनिक गेटी-गैलेक्सी सिनेमा में पिछले वीकेंड ‘गैलेक्सी’ ऑडिटोरियम बंद रहा, जबकि बड़े हॉल में सीमित शो चलाए गए। वीकडेज में मैनेजमेंट ने स्प्लिट शो स्ट्रेटेजी अपनाई है, ताकि ऑपरेटिंग कॉस्ट कम की जा सके। कई मल्टीप्लेक्स मॉर्निंग शो हटा चुके हैं और कुछ स्क्रीन अस्थायी रूप से बंद करने पर भी विचार कर रहे हैं। हालिया रिलीज ‘अस्सी’ और ‘दो दीवाने शहर में’ दर्शकों को थिएटर तक खींचने में नाकाम रही हैं।
डिस्ट्रीब्यूटर और एग्ज़िबिटर अक्षय राठी ने कहा कि यह बिजनेस टेंटपोल फिल्मों के बीच टिके रहने का है। छोटे-मोटे प्रोजेक्ट्स से ऑपरेशनल कॉस्ट निकलनी चाहिए, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में ऐसा नहीं हुआ। वहीं बिहार के पूर्णिया स्थित रूपबाणी सिनेमा के मालिक विशेक चौहान का मानना है कि परीक्षाएं और रमजान भी एक वजह हैं। एसएसआर सिनेमा के सीईओ सतदीप साहा ने इसे “इंडस्ट्री के लिए अच्छा संकेत नहीं” बताया। उनका कहना है कि ईद तक थिएटर कैसे चलाए जाएं, यह बड़ा सवाल है।
उम्मीदें अब ईद रिलीज पर टिकी हैं, जब धुरंधर: द रिवेंज और टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन-अप्स बॉक्स ऑफिस पर टकराने वाली हैं। ‘टॉक्सिक’ में यश चार साल बाद वापसी कर रहे हैं, जबकि ‘धुरंधर’ का पहला पार्ट बड़ा हिट रहा था। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह क्लैश सिंगल स्क्रीन मालिकों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनेगा, क्योंकि उन्हें दोनों में से किसी एक फिल्म को चुनना होगा। विषेक चौहान ने सवाल उठाया कि अगर दोनों फिल्में टकराती हैं और शो शेयर नहीं करना चाहतीं, तो छोटे सिनेमाघरों को भारी नुकसान होगा।
एग्ज़िबिटर्स का मानना है कि अगर साल भर में रिलीज को बेहतर तरीके से स्पेस किया जाए, तो ऐसे सूखे दौर से बचा जा सकता है। 2024 में भी स्वतंत्रता दिवस और दिवाली पर कई रिलीज एक साथ आईं, जबकि बाद में हफ्तों तक कोई बड़ी फिल्म नहीं थी। फिलहाल इंडस्ट्री की नजर 19 मार्च के बाद आने वाली बड़ी फिल्मों और ईद वीकेंड पर टिकी है।