लाइफस्टाइल डेस्क। सुबह की भागदौड़ में टिफिन पैक करते वक्त रोटियों को फॉयल पेपर में लपेट देना आज की सबसे आम आदत बन चुकी है। ऑफिस जाने वाले हों या स्कूल जाते बच्चे लगभग हर घर में यह तरीका अपनाया जाता है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि फॉयल में रोटियां रखने से वे देर तक गर्म और ताजा रहती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजाना अपनाई जा रही यही छोटी-सी आदत आपकी सेहत के लिए एक साइलेंट खतरा बन सकती है? डॉक्टरों और विशेषज्ञों की मानें तो फॉयल पेपर में रखी गरम रोटियां धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
डॉक्टरों के मुताबिक, जब गरमा-गरम रोटियां एल्युमिनियम फॉयल में लपेटी जाती हैं, तो फॉयल का एल्युमिनियम भोजन में घुल सकता है। यह एल्युमिनियम हमारे शरीर में जमा होकर कई गंभीर समस्याओं की वजह बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि, यह असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन लंबे समय तक रोजाना सेवन करने पर शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
डॉक्टरों और टॉक्सिकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, ज्यादा एल्युमिनियम एक्सपोजर से-
खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा ज्यादा माना जाता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंट हेल्थ साइंसेज से जुड़े टॉक्सिकोलॉजिस्ट जीन हैरी के मुताबिक, एल्युमिनियम में मौजूद कुछ तत्व न्यूरोटॉक्सिक होते हैं। जब फॉयल पेपर में गरम या खट्टी चीजें रखी जाती हैं, तो एल्युमिनियम तेजी से भोजन में घुल सकता है, जो आगे चलकर अल्जाइमर और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
डॉक्टरों के मुताबिक, WHO की रिसर्च में भी एल्युमिनियम के ज्यादा और लंबे इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है। रिसर्च के अनुसार, एल्युमिनियम से बने बर्तनों और फॉयल का लगातार इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता।
अगर आप सच में अपने परिवार की सेहत को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इन विकल्पों को अपनाएं-
साफ सूती कपड़ा
यह सबसे सुरक्षित और पारंपरिक तरीका माना जाता है, जिसमें रोटियां लंबे समय तक खाने लायक बनी रहती हैं। साफ सूती कपड़े में लपेटी गई रोटियां न तो पसीजती हैं और न ही उनमें किसी तरह का केमिकल असर होता है। अच्छी बात यह है कि, इस कपड़े को धोकर बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यह सेहत के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प साबित होता है।
कांच या स्टील का टिफिन
रोटियों को टिफिन या किसी भी कंटेनर में रखने से पहले उन्हें पूरी तरह ठंडा होने देना चाहिए। अगर गरम रोटियां सीधे डिब्बे में रख दी जाएं, तो भाप बनने लगती है, जिससे रोटियां पसीज जाती हैं और उनका स्वाद व गुणवत्ता खराब हो सकती है। इसलिए ठंडी रोटियां ही पैक करना बेहतर और सुरक्षित माना जाता है।
फॉयल पेपर सिंगल-यूज होता है और कचरे में जाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। वहीं कपड़े या स्टील-ग्लास कंटेनर इको-फ्रेंडली भी हैं।