टिफिन की रोटी और कैंसर का कनेक्शन?डॉक्टरों ने फॉयल पेपर पर दी बड़ी चेतावनी

फॉयल पेपर में रोटियां लपेटकर टिफिन में रखना आम आदत है, लेकिन डॉक्टरों के मुताबिक यह सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। गरम रोटियों से एल्युमिनियम शरीर में जाकर इम्यून सिस्टम, किडनी और हड्डियों को नुकसान पहुंचा सकता है। जानिए सही और सुरक्षित विकल्प।
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डॉक्टरों ने फॉयल पेपर पर दी बड़ी चेतावनी
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    लाइफस्टाइल डेस्क। सुबह की भागदौड़ में टिफिन पैक करते वक्त रोटियों को फॉयल पेपर में लपेट देना आज की सबसे आम आदत बन चुकी है। ऑफिस जाने वाले हों या स्कूल जाते बच्चे लगभग हर घर में यह तरीका अपनाया जाता है। ज्यादातर लोग मानते हैं कि फॉयल में रोटियां रखने से वे देर तक गर्म और ताजा रहती हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि रोजाना अपनाई जा रही यही छोटी-सी आदत आपकी सेहत के लिए एक साइलेंट खतरा बन सकती है? डॉक्टरों और विशेषज्ञों की मानें तो फॉयल पेपर में रखी गरम रोटियां धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचा सकती हैं।

    फॉयल में रोटी रखना क्यों बन रहा है हेल्थ रिस्क?

    डॉक्टरों के मुताबिक, जब गरमा-गरम रोटियां एल्युमिनियम फॉयल में लपेटी जाती हैं, तो फॉयल का एल्युमिनियम भोजन में घुल सकता है। यह एल्युमिनियम हमारे शरीर में जमा होकर कई गंभीर समस्याओं की वजह बन सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि, यह असर तुरंत नहीं दिखता, लेकिन लंबे समय तक रोजाना सेवन करने पर शरीर को नुकसान पहुंचाता है।

    इम्यून सिस्टम से लेकर कैंसर तक खतरा

    डॉक्टरों और टॉक्सिकोलॉजिस्ट्स के अनुसार, ज्यादा एल्युमिनियम एक्सपोजर से-

    • इम्यून सिस्टम कमजोर हो सकता है।
    • हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं।
    • किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
    • न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का खतरा बढ़ता है।
    • लंबे समय में कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का रिस्क बढ़ सकता है।

    खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह खतरा ज्यादा माना जाता है।

    क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

    नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एनवायरनमेंट हेल्थ साइंसेज से जुड़े टॉक्सिकोलॉजिस्ट जीन हैरी के मुताबिक, एल्युमिनियम में मौजूद कुछ तत्व न्यूरोटॉक्सिक होते हैं। जब फॉयल पेपर में गरम या खट्टी चीजें रखी जाती हैं, तो एल्युमिनियम तेजी से भोजन में घुल सकता है, जो आगे चलकर अल्जाइमर और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।

    WHO की रिसर्च में क्या सामने आया?

    डॉक्टरों के मुताबिक, WHO की रिसर्च में भी एल्युमिनियम के ज्यादा और लंबे इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की बात कही गई है। रिसर्च के अनुसार, एल्युमिनियम से बने बर्तनों और फॉयल का लगातार इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित नहीं माना जाता।

    फॉयल पेपर की जगह क्या करें इस्तेमाल?

    अगर आप सच में अपने परिवार की सेहत को सुरक्षित रखना चाहते हैं, तो इन विकल्पों को अपनाएं-

    साफ सूती कपड़ा

    यह सबसे सुरक्षित और पारंपरिक तरीका माना जाता है, जिसमें रोटियां लंबे समय तक खाने लायक बनी रहती हैं। साफ सूती कपड़े में लपेटी गई रोटियां न तो पसीजती हैं और न ही उनमें किसी तरह का केमिकल असर होता है। अच्छी बात यह है कि, इस कपड़े को धोकर बार-बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यह सेहत के साथ-साथ पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प साबित होता है।

    कांच या स्टील का टिफिन

    रोटियों को टिफिन या किसी भी कंटेनर में रखने से पहले उन्हें पूरी तरह ठंडा होने देना चाहिए। अगर गरम रोटियां सीधे डिब्बे में रख दी जाएं, तो भाप बनने लगती है, जिससे रोटियां पसीज जाती हैं और उनका स्वाद व गुणवत्ता खराब हो सकती है। इसलिए ठंडी रोटियां ही पैक करना बेहतर और सुरक्षित माना जाता है।

    क्या न करें

    • गरम रोटियां सीधे फॉयल में न लपेटें।
    • खट्टी चीजें (अचार, नींबू) फॉयल में रखने से बचें।

    सेहत के साथ पर्यावरण की भी चिंता

    फॉयल पेपर सिंगल-यूज होता है और कचरे में जाकर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाता है। वहीं कपड़े या स्टील-ग्लास कंटेनर इको-फ्रेंडली भी हैं।

    Manisha Dhanwani
    By Manisha Dhanwani

    मनीषा धनवानी | जागरण लेकसिटी यूनिवर्सिटी से BJMC | 6 वर्षों के पत्रकारिता अनुभव में सब-एडिटर, एंकर, ...Read More

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