हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने आगामी 11 फरवरी को होने वाले नगर निगम चुनावों से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी पर जमकर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी का असली ‘भगवान’ AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी हैं, न कि राम। रेवंत रेड्डी ने कहा कि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए ओवैसी को ‘अलादीन का चिराग’ की तरह इस्तेमाल करती है और उनके नाम का डर दिखाकर वोट मांगती है।
रेड्डी ने बीजेपी पर तंज कसते हुए कहा, ये पार्टी रोज राम का नाम लेती है, लेकिन असल में रोज अपने सिर झुकाती है ओवैसी के सामने। उनके लिए ओवैसी ही असली लाइफलाइन हैं। चुनाव जीतने के लिए बार-बार उन्हें खलनायक या राक्षस बनाकर पेश करना उनकी वैचारिक कमजोरी है।
रेवंत रेड्डी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बीजेपी पर तीन बड़े आरोप लगाए-
ओवैसी को खलनायक बनाना: बीजेपी हर बार असदुद्दीन ओवैसी को चुनावी रणनीति के लिए राक्षस का रूप देती है, जबकि केंद्र और कई राज्यों में उनकी सरकारें होने के बावजूद ओवैसी पर कोई नियंत्रण नहीं कर पाती।
ओवैसी का चुनावी इस्तेमाल: हर चुनाव में ओवैसी को अलादीन का जादुई चिराग बनाकर वोट मांगे जाते हैं। उनका नाम लेकर डर दिखाना बीजेपी की राजनीतिक चाल है।
धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग: धार्मिक नफरत फैलाकर किसी राजनीतिक दल या नेता को राक्षस बताना, और इस आधार पर वोट मांगना वैचारिक कमजोरी और सोच की गरीबी है।
रेड्डी ने कहा कि यह रणनीति बीजेपी की असफलता को छिपाने का तरीका है और तेलंगाना की जनता को यह सोचने पर मजबूर करती है कि किसे वोट देना चाहिए।
रेवंत रेड्डी ने स्पष्ट किया कि, AIMIM भी एक लोकतांत्रिक राजनीतिक पार्टी है। यह चुनाव लड़ती है और जहां जनसमर्थन मिलता है, वहां जीतती है। उन्होंने बताया कि AIMIM ने गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों में चुनाव लड़ा है और कई जगह जीत भी हासिल की।
रेड्डी ने सवाल उठाया, अगर ओवैसी इतने खतरनाक हैं, तो केंद्र और राज्यों में BJP की सरकार होने के बावजूद उन्हें क्यों नियंत्रित नहीं किया जा रहा? उनका कहना था कि किसी पार्टी को डर दिखाकर वोट लेना लोकतांत्रिक सिद्धांतों के खिलाफ है।
बीते कुछ वर्षों में रेवंत रेड्डी और असदुद्दीन ओवैसी के बीच राजनीतिक नजदीकी बढ़ी है। 2023 विधानसभा चुनाव में दोनों अक्सर आमने-सामने दिखे थे, लेकिन कांग्रेस सरकार बनने के बाद रेवंत रेड्डी ने AIMIM के साथ विकास और प्रशासनिक मुद्दों पर सहयोग की कोशिश शुरू की।
हालांकि, कोई औपचारिक गठबंधन नहीं है, लेकिन तेलंगाना की राजनीति में दोनों के बीच व्यावहारिक सहयोग और अच्छे संबंध दिखाई देते हैं। खासकर हैदराबाद और आसपास के क्षेत्रों में, यह नजदीकी जनता और प्रशासनिक मामलों में असर दिखाती है।
तेलंगाना में नगर निगम चुनावों को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। हैदराबाद और आसपास के इलाकों में बीजेपी लगातार ‘ओवैसी फैक्टर’ का इस्तेमाल करके हिंदू वोट बैंक को साधने की कोशिश कर रही है। वहीं कांग्रेस सत्ता में आने के बाद पहली बार बड़े पैमाने पर हो रहे चुनावों में अपनी लोकप्रियता का परचम लहराना चाहती है।
रेवंत रेड्डी ने कहा कि, बीजेपी का चुनावी इतिहास यह दिखाता है कि पार्टी बार-बार धार्मिक नफरत और डर का सहारा लेकर वोट मांगती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विकास और जनहित के लिए कांग्रेस को वोट दें।
तेलंगाना बीजेपी अध्यक्ष एन रामचंदर राव ने कहा कि, असल में रेवंत रेड्डी के लिए बीजेपी ही ‘भगवान’ बन चुकी है, क्योंकि वे हर राजनीतिक बयान में बीजेपी का नाम लेते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि, रेवंत रेड्डी मुस्लिम समुदाय को डराने के लिए बीजेपी का नाम उपयोग कर रहे हैं।
रामचंदर राव ने यह भी कहा कि कांग्रेस और AIMIM की राजनीतिक नजदीकी किसी से छिपी नहीं है। रेवंत रेड्डी और ओवैसी करीबी हैं और तेलंगाना में कांग्रेस और AIMIM अक्सर साथ मिलकर कार्य करते रहे हैं।