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फ्रांस में मिला पहला इबोला मरीज :25% से ज्यादा मृत्यु दर, लाखों बच्चों पर खतरा

इबोला वायरस का प्रकोप लगातार बढ़ रहा है। अब तक 1,048 मामले और 267 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। कांगो और युगांडा के बाद फ्रांस में पहला संक्रमित मरीज मिलने से यूरोप में भी चिंता बढ़ गई है। WHO और UNICEF ने संक्रमण के बढ़ते खतरे को लेकर चेतावनी जारी की है, जबकि लाखों बच्चों की सेहत पर गंभीर जोखिम मंडरा रहा है।
25% से ज्यादा मृत्यु दर, लाखों बच्चों पर खतरा

इबोला वायरस एक बार फिर वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। कांगो और युगांडा में तेजी से फैल रहे इस संक्रमण ने अब दूसरे देशों की चिंता भी बढ़ा दी है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार इबोला के कुल मामले बढ़कर 1,048 हो गए हैं, जबकि 267 लोगों की मौत हो चुकी है।

25 फीसदी से ज्यादा है मृत्यु दर

रविवार तक के आंकड़ों के मुताबिक 371 मरीज अस्पतालों या आइसोलेशन सेंटर में भर्ती थे। वहीं 112 लोग संक्रमण से ठीक हो चुके हैं। इस प्रकोप में मृत्यु दर 25.5 प्रतिशत दर्ज की गई है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाती है।

फ्रांस में मिला इबोला का पहला मामला

कांगो और युगांडा के बाद अब फ्रांस में भी इबोला का पहला मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांगो में मानवीय मिशन पर गए एक डॉक्टर के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। फ्रांसीसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि डॉक्टर को तुरंत विशेष आइसोलेशन सेंटर में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत फिलहाल स्थिर है।

फ्रांस में सामने आया यह मामला यूरोप में इबोला का पहला आधिकारिक संक्रमित केस माना जा रहा है। हालांकि इससे पहले एक अमेरिकी डॉक्टर, जो कांगो में संक्रमित पाए गए थे, उनका इलाज जर्मनी के एक अस्पताल में किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार युगांडा में अब तक 20 लोगों में संक्रमण की पुष्टि हुई है और दो लोगों की मौत हो चुकी है।

फ्रांस ने शुरू की विशेष निगरानी

फ्रांस के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि फिलहाल आम लोगों के लिए संक्रमण का खतरा बहुत कम है। इसके बावजूद संक्रमित डॉक्टर के संपर्क में आए लोगों की पहचान कर उनकी निगरानी की जा रही है।

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इसके अलावा कांगो और अन्य प्रभावित क्षेत्रों से लौटने वाले राहतकर्मियों और सहायता मिशन से जुड़े लोगों की निगरानी के लिए विशेष मॉनिटरिंग सिस्टम भी शुरू किया गया है।

इतिहास के सबसे बड़े प्रकोपों में हो सकता है शामिल

अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (अफ्रीका CDC) और अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियों का मानना है कि मौजूदा इबोला प्रकोप इतिहास के सबसे बड़े प्रकोपों में शामिल हो सकता है।

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में सबसे ज्यादा मामले देश के पूर्वी इलाकों इतुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों में सामने आ रहे हैं। इनमें इतुरी प्रांत सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 90 प्रतिशत से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

वैक्सीन नहीं होने से बढ़ी चिंता

यह प्रकोप इबोला वायरस की 'बुंडीबुग्यो' स्ट्रेन के कारण फैल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक इस स्ट्रेन के खिलाफ फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, जिससे संक्रमण को नियंत्रित करना और चुनौतीपूर्ण हो गया है।

 बच्चों पर सबसे ज्यादा खतरा

इबोला के बढ़ते मामलों को देखते हुए यूनिसेफ ने भी चिंता जताई है। संगठन के अनुसार डीआर कांगो में करीब 29.5 लाख बच्चे और किशोर गंभीर जोखिम में हैं। यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक इबोला के कुल पुष्ट मामलों में लगभग 15 प्रतिशत बच्चे और किशोर हैं, जबकि इस बीमारी से हुई मौतों में उनकी हिस्सेदारी 25 प्रतिशत से ज्यादा है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर भी बढ़ा दबाव

यूनिसेफ का कहना है कि बच्चों को केवल वायरस से ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं और जरूरी सुविधाओं में आ रही बाधाओं से भी खतरा है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य एजेंसियां इस प्रकोप पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

Shivani Gupta
By Shivani Gupta

शिवानी गुप्ता | MCU, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में ग्रेजुएशन | 9 वर्षों की टीवी और डिजिटल तक की य...Read More

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