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हरियाणा की अनोखी कोरड़ा मार होली, भाभी-देवर के बीच होता है युद्ध; जानें क्यों खास है यहां की Holi…

पूरे देश में होली का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। अलग-अलग राज्यों में इसे अलग-अलग परंपराओं के साथ खेला जाता है। जैसे ब्रज में फूलों की होली होती है, राजस्थान में लट्ठमार होली खेली जाती है। इसी तरह हरियाणा की कोरड़ा होली भी बहुत प्रसिद्ध है।

देवर-भाभी के प्रेम और हंसी-मजाक का पर्व

हरियाणा में कोरड़ा होली देवर-भाभी के बीच खेली जाती है। इस अनोखी परंपरा में देवर भाभी पर रंग डालता है और भाभी अपने बचाव के लिए कोरड़ा (कपड़े का बना कोड़ा) लेकर देवर को मारती है। देवर खुद को बचाने के लिए रंग भरा पानी तेज-तेज फेंकता है। इस खेल को देखने के लिए गांव के लोग बड़ी संख्या में इकट्ठा होते हैं और इसे हंसी-मजाक और प्रेम का प्रतीक मानते हैं।

सालों पुरानी परंपरा

हरियाणा के कई जिलों में यह परंपरा सालों से चली आ रही है। होली के दिन सुबह गांव के चौक पर बड़े-बड़े कड़ाहों में रंग और पानी भरकर रखा जाता है। महिलाएं कोरड़ा लेकर खेल में शामिल होती हैं, जबकि पुरुष उन पर पानी डालते हैं।

होली के अगले दिन खेली जाती है कोरड़ा होली

कोरड़ा मार होली होलिका दहन के अगले दिन खेली जाती है। भाभी देवर को कपड़े से बने कोड़े से मारती हैं, जबकि देवर रंग से बचने के लिए दौड़ता है। इस दौरान देवर भाभी पर रंग भरा पानी फेंकते हैं।

पहले रस्सी और कपड़े से बनता था कोरड़ा

पहले कोरड़ा रस्सी और कपड़े को लपेटकर बनाया जाता था, ताकि यह मजबूत हो और सही से इस्तेमाल किया जा सके। लेकिन अब महिलाएं इसे दुपट्टे से तैयार करती हैं।

हरियाणा में होली का जबरदस्त उत्साह

हरियाणा में कोरड़ा होली को लेकर गजब का उत्साह होता है। सतरोल खाप की अध्यक्ष सुदेश चौधरी ने कहा कि हरियाणा में यह परंपरा बड़े जोश और उत्साह के साथ निभाई जाती है। उन्होंने लोगों से शांतिपूर्ण तरीके से होली मनाने की अपील की।

यह अनोखी परंपरा केवल होली के रंगों को ही नहीं, बल्कि देवर-भाभी के बीच के रिश्ते को भी मजबूत बनाती है।

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