
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, दर्शन के लिए घंटों इंतजार और तेज धूप के बीच धक्कामुक्की और भगदड़ जैसे हालात बनते रहे। भीड़ बढ़ने से लगभग एक दर्जन महिलाएं बेहोश हो गईं। कई लोग गिरते-पड़ते नजर आए, हालांकि बड़ी दुर्घटना टल गई। भक्तों को घंटों खड़े रहना पड़ा, जिससे बुजुर्ग और बच्चे परेशान रहे। लोगों ने इसे किसी चमत्कार से कम नहीं बताया कि इतने अव्यवस्थित हालात के बावजूद कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ।
मौके पर मौजूद थाना प्रभारी और कुछ पुलिसकर्मी भीड़ को नियंत्रित करने में नाकाम रहे। मंदिर परिसर में पुलिस बल की संख्या बेहद कम थी। मोर्चा संभालने में प्रशासनिक अधिकारियों की गैर-जिम्मेदारी साफ नजर आई। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि किसी भी समय बड़ी दुर्घटना हो सकती थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल नवरात्रि पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, इसके बावजूद पूर्व तैयारियों की कमी प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है।