डॉ. सतीश राजपूत और टीम की बड़ी सफलता!जटिल सर्जरी कर महिला के पेट से निकाली विशाल गांठ

गुना जिले के सरकारी अस्पताल ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि सही इलाज और समर्पित डॉक्टर हों, तो बड़ी से बड़ी बीमारी भी ठीक हो सकती है। यहां डॉ. सतीश राजपूत ने एक बेहद जटिल ऑपरेशन कर एक गरीब महिला को नया जीवन दिया है। महिला के पेट में अंडाशय की बहुत बड़ी गांठ थी, जिससे वह पिछले 5 साल से लगातार दर्द झेल रही थी।
5 साल से दर्द में जी रही थी महिला
राघोगढ़ क्षेत्र के कुडाई परसा गांव की रहने वाली सोनम (35 वर्ष) लंबे समय से पेट दर्द से परेशान थीं। उनका दर्द इतना ज्यादा था कि उनका सामान्य जीवन भी प्रभावित हो गया था। परिवार ने कई जगह इलाज कराने की कोशिश की राजस्थान के बड़े अस्पतालों से लेकर गुना के निजी अस्पतालों तक लेकिन हर जगह खर्च बहुत ज्यादा बताया गया।
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परिवार की आर्थिक हालत कमजोर थी, इसलिए वे इलाज नहीं करा पाए। धीरे-धीरे हालत और बिगड़ती गई और दर्द असहनीय हो गया।
जिला अस्पताल बना उम्मीद की किरण
जब हर रास्ता बंद हो गया, तब किसी परिचित ने उन्हें गुना जिला अस्पताल जाने की सलाह दी। यहां उन्होंने डॉ. सतीश राजपूत से संपर्क किया।
जांच के दौरान पता चला कि महिला के अंडाशय में बहुत बड़ी और जटिल गांठ (सिस्ट) है। यह गांठ सिर्फ बड़ी ही नहीं थी, बल्कि शरीर के दूसरे अंगों पर भी असर डाल रही थी। स्थिति काफी गंभीर थी, लेकिन डॉ. राजपूत ने हिम्मत नहीं हारी।
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डॉक्टर की समझदारी और टीमवर्क से सफल ऑपरेशन
महिला की हालत और परिवार की आर्थिक परेशानी को देखते हुए डॉ. सतीश राजपूत ने तुरंत ऑपरेशन करने का फैसला लिया। इस कठिन सर्जरी को सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर के मार्गदर्शन में ऑपरेशन किया।
ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों की पूरी टीम ने बेहतरीन काम किया। टीम में डॉ. नितिन गुप्ता, स्वास्थ्यकर्मी पूजा शर्मा, सोनिया, सरोज और वार्ड बॉय धर्मवीर शामिल थे। काफी जटिल होने के बावजूद यह ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा और महिला के शरीर से बड़ी गांठ को सुरक्षित निकाल लिया गया।
परिवार की खुशी का ठिकाना नहीं
ऑपरेशन के बाद महिला की हालत में तेजी से सुधार हुआ। 5 साल से जो दर्द उन्हें परेशान कर रहा था, उससे अब उन्हें राहत मिल गई है।
महिला के पति मेघराज अहिरवार ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि उनके लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। उन्होंने डॉक्टर को भगवान जैसा बताया और कहा कि पैसों की कमी के कारण जहां इलाज रुक गया था, वहां जिला अस्पताल ने उनकी मदद की।
सरकारी अस्पताल की बढ़ी साख
इस सफल सर्जरी के बाद जिला अस्पताल प्रबंधन ने भी डॉक्टर और उनकी टीम की सराहना की है। यह मामला दिखाता है कि अगर डॉक्टर समर्पण और सेवा भाव से काम करें, तो सरकारी अस्पतालों में भी बेहतरीन इलाज संभव है।
डॉ. सतीश राजपूत और उनकी टीम ने न सिर्फ एक मरीज का इलाज किया, बल्कि यह भरोसा भी दिलाया कि सही हाथों में इलाज हो, तो हर मुश्किल आसान हो सकती है।











