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अमेरिका-ईरान तनाव में पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी:मदद के लिए खाड़ी देशों का रुख, अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। हालात ऐसे हैं कि इस संकट का सीधा असर उसकी अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ सकता है, जिसके चलते पाकिस्तान अब कूटनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर सक्रिय हो गया है।
मदद के लिए खाड़ी देशों का रुख, अर्थव्यवस्था पर मंडराया खतरा
AI जनरेटेड सारांश
    यह सारांश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा तैयार किया गया है और हमारी टीम द्वारा रिव्यू की गई है।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ खाड़ी देशों के दौरे पर हैं, जबकि असीम मुनीर ईरान पहुंचकर वार्ता की कोशिशों में जुटे हैं। पाकिस्तान एक तरफ मध्यस्थता कर अपनी छवि सुधारना चाहता है, वहीं दूसरी ओर आर्थिक संकट से निपटने के लिए मदद भी तलाश रहा है।

    मध्यस्थता के जरिए राहत की कोशिश

    पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ बनकर कूटनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। उसकी रणनीति यह है कि अगर वह दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने में भूमिका निभाता है, तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल सकती है। साथ ही अमेरिका से कुछ आर्थिक या रणनीतिक राहत मिलने की उम्मीद भी जताई जा रही है। ईरान से सस्ते तेल की संभावनाएं भी इसी प्रयास से जुड़ी हुई हैं। पाकिस्तान की यह पहल उसकी मजबूरी और रणनीति दोनों को दर्शाती है।

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    खाड़ी देशों से आर्थिक मदद की तलाश

    पाकिस्तान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है और उसे कर्ज चुकाने का दबाव भी झेलना पड़ रहा है। इसी वजह से प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सऊदी अरब, कतर और तुर्किए के दौरे पर हैं। इन देशों से अरबों डॉलर की मदद मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से ही महंगाई और कर्ज के बोझ से दबाव में है। ऐसे में यह दौरा उसके लिए बेहद अहम माना जा रहा है। आर्थिक सहायता के बिना हालात और बिगड़ सकते हैं।

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    होर्मुज संकट से ऊर्जा सप्लाई पर खतरा

    अगर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति बिगड़ती है, तो पाकिस्तान की ऊर्जा आपूर्ति पर सीधा असर पड़ेगा। यह जलमार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है और इसके बंद होने से तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है। पाकिस्तान पहले से ही महंगाई की मार झेल रहा है, ऐसे में ऊर्जा संकट उसके लिए और मुश्किलें खड़ी कर सकता है। शिपिंग रूट्स पर असर पड़ने से आयात लागत भी बढ़ेगी। इससे आर्थिक संकट और गहरा सकता है।

    दोहरी नीति पड़ सकती है भारी

    ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने के बीच पाकिस्तान की दोहरी रणनीति भी जोखिम भरी साबित हो सकती है। एक तरफ वह ईरान के साथ बातचीत कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका और खाड़ी देशों से मदद मांग रहा है। इस संतुलन को बनाए रखना आसान नहीं होगा। अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो पाकिस्तान पर दोनों तरफ से दबाव बढ़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह रणनीति लंबे समय तक टिकाऊ नहीं है। ऐसे में पाकिस्तान को जल्द ठोस नीति अपनानी होगी।

    Rohit Sharma
    By Rohit Sharma

    पीपुल्स इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया स्टडीज, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय...Read More

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