Aakash Waghmare
18 Jan 2026
नूक। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने के विवादित बयानों के खिलाफ शनिवार को ग्रीनलैंड में जबरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। राजधानी नूक में हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और अमेरिकी दूतावास तक मार्च कर साफ संदेश दिया- ग्रीनलैंड बिक्री के लिए नहीं है।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान EU-US ट्रेड डील और अमेरिका द्वारा यूरोप के आठ देशों पर लगाए गए टैरिफ ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और आर्थिक तनाव को और बढ़ा दिया। ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधन और अमेरिका की सुरक्षा नीति इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं।
ग्रीनलैंड की राजधानी नूक में शनिवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जो पहले कभी नहीं देखा गया। लगभग 20 हजार की आबादी वाले इस शहर में करीब एक-चौथाई लोग प्रदर्शन में शामिल हुए। लोग हाथों में राष्ट्रीय झंडे और विरोधी पोस्टर लेकर डाउनटाउन से अमेरिकी वाणिज्य दूतावास तक मार्च करते दिखे। पुलिस के अनुसार, यह ग्रीनलैंड के इतिहास का सबसे बड़ा और संगठित विरोध प्रदर्शन है।
इस विरोध की अगुवाई ग्रीनलैंड के प्रधानमंत्री जेंस-फ्रेडरिक नीलसन ने की। उन्होंने बर्फीली सड़कों पर झंडा लहराते हुए नागरिकों के हौसले को बढ़ाया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट रूप से अमेरिका को चेताया कि, ग्रीनलैंड को अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार है।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि, ग्रीनलैंड की रणनीतिक स्थिति और वहां मौजूद प्राकृतिक संसाधन अमेरिका की सुरक्षा के लिए बेहद अहम हैं। उनका तर्क है कि, अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया, तो रूस और चीन वहां अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं।
ट्रंप ने पोस्ट में कहा कि, अमेरिका पिछले 150 सालों से ग्रीनलैंड को खरीदने का प्रयास कर रहा है और कई राष्ट्रपतियों ने इसे हासिल करने की कोशिश की, लेकिन डेनमार्क ने हमेशा इनकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि, यदि तय समय तक डील नहीं हुई, तो टैरिफ बढ़ा दिया जाएगा।
ट्रंप के रुख के चलते यूरोपीय संघ और अमेरिका के बीच हुए ट्रेड एग्रीमेंट पर संकट गहरा गया। इस डील के तहत-
लेकिन ग्रीनलैंड विवाद के बाद यूरोपियन पीपुल्स पार्टी (EPP) के अध्यक्ष मैनफ्रेड वेबर ने कहा कि, ट्रंप की धमकियों के कारण अमेरिका के साथ समझौते को मंजूरी देना संभव नहीं है। यूरोपीय संसद के अन्य समूह भी समझौते को रोकने या फ्रीज करने की मांग कर रहे हैं।
ट्रंप ने शनिवार को यूरोप के आठ देशों पर 10% टैरिफ लगाने का ऐलान किया। ग्रीनलैंड पर अमेरिका के कब्जे के प्रयास का विरोध करने वालों के खिलाफ यह कदम उठाया गया है।
किन देशों पर लगाया टैरिफ-
ट्रंप ने चेतावनी दी कि, यदि ग्रीनलैंड पर डील नहीं होती, तो 1 जून से यह टैरिफ बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा।
इस विवाद के बीच यूरोपीय देशों ने ग्रीनलैंड में सीमित संख्या में सैनिक भेजने की योजना बनाई है। फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन, नॉर्वे, फिनलैंड, नीदरलैंड और ब्रिटेन ने डेनमार्क के साथ मिलकर निगरानी मिशन की तैनाती शुरू की।
जर्मन विदेश मंत्रालय के अनुसार, एक टीम सुरक्षा सुनिश्चित करने और डेनमार्क का समर्थन देने के लिए भेजी गई है। स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने भी कई अधिकारियों को ग्रीनलैंड में शामिल कर सैन्य अभ्यास कराया।
EU विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने चेतावनी दी कि, इस विवाद से चीन और रूस को फायदा हो सकता है। उन्होंने कहा कि सहयोगी देशों के बीच दरार अमेरिका को राजनीतिक लाभ दे सकती है।
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ग्रीनलैंड को अमेरिका के लिए केवल भू-राजनीतिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आर्थिक और सैन्य दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके प्रमुख कारण हैं-
भौगोलिक स्थिति: ग्रीनलैंड, उत्तरी अमेरिका और यूरोप के बीच मिड-अटलांटिक क्षेत्र में स्थित है।
सैन्य महत्व: अमेरिका का थुले एयर बेस यहीं है, जो मिसाइल चेतावनी और रूसी/चीनी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए अहम है।
प्राकृतिक संसाधन: दुर्लभ खनिज जैसे नियोडायनियम, प्रासियोडायमियम, डिस्प्रोसियम, टर्बियम और यूरेनियम यहां मौजूद हैं।
ताजा पानी का भंडार: दुनिया का लगभग 10% ताजा पानी यहीं स्थित है।
नई समुद्री व्यापारिक राहें: ग्लोबल वार्मिंग से आर्कटिक की बर्फ पिघल रही है, जिससे नए शिपिंग रूट्स खुल रहे हैं।
इस वजह से अमेरिका चाहता है कि वह ग्रीनलैंड में प्रभाव बनाए रखे और चीन-रूस की बढ़ती दखलअंदाजी को रोके।
ग्रीनलैंड फिलहाल डेनमार्क का स्वायत्त क्षेत्र है और NATO का सदस्य भी है। NATO के नियमों के अनुसार, एक सदस्य देश किसी अन्य सदस्य देश पर कब्जा नहीं कर सकता। ग्रीनलैंड की जनता को स्वायत्तता का अधिकार है और भविष्य में जनमत संग्रह (रेफरेंडम) के माध्यम से स्वतंत्र होने का विकल्प भी है, लेकिन इसके लिए डेनिश संसद की मंजूरी जरूरी है।
ट्रंप के बयानों ने अमेरिका और डेनमार्क के बीच राजनयिक तनाव बढ़ा दिया है। डेनमार्क और यूरोपीय देश ग्रीनलैंड की संप्रभुता और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दे रहे हैं। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ट्रंप के रुख को अस्वीकार्य बताया।
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