देश भर में गैस क्राइसिस के चलते खाने-पीने की चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। हाल ही में एक कैफे के बिल में अचानक ‘गैस क्राइसिस चार्ज’ दिखा, जिससे ग्राहक हैरान रह गए। लेकिन अब केंद्र सरकार ने साफ हिदायत दी है रेस्टोरेंट सिर्फ खाने की कीमत और GST ही चार्ज कर सकते हैं, बाकी सब गैरकानूनी है।
ग्राहक ने दो ग्लास नींबू पानी का ऑर्डर दिया। कीमत थी 358 रुपए, लेकिन बिल में 17.01 रुपए का एक्स्ट्रा गैस चार्ज जोड़ा गया। ग्राहक ने बिल की फोटो सोशल मीडिया पर शेयर की और ये वायरल हो गई। यही फोटो CCPA तक पहुंची और सरकार ने तुरंत संज्ञान लिया।
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CCPA ने स्पष्ट किया कि रेस्टोरेंट का ऑपरेशनल खर्च उनकी जिम्मेदारी है और इसे मेन्यू की कीमतों में ही एडजस्ट करना होगा। कुछ होटल अब भी सर्विस चार्ज बाईपास करने के लिए नए नामों से एक्स्ट्रा चार्ज लगाने की कोशिश कर रहे हैं, जो उपभोक्ता अधिकारों के सीधे उल्लंघन में आता है।
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मिडिल ईस्ट में तनाव और सप्लाई में कमी के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ रही हैं। इसके बावजूद भारतीय रिफाइनर्स ने रूस से 6 करोड़ बैरल तेल खरीदने का फैसला किया है। सरकार की कोशिश है कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा संकट का असर आम लोगों की थाली पर न पड़े।
अब रेस्टोरेंट बिल में छिपे चार्ज बिलकुल नहीं लगेंगे। खाने की कीमत और GST के अलावा कोई शुल्क गैरकानूनी है। बाहर खाना खाते वक्त बिल चेक करें, सतर्क रहें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने में पीछे न रहें।