PlayBreaking News

पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं...सरकार ने दी सफाई, कहा-यह कल तय नहीं किया गया, वर्षों से यही नियम

पासपोर्ट को लेकर विदेश मंत्रालय की हालिया टिप्पणी के बाद देशभर में बहस छिड़ गई है। मंत्रालय द्वारा यह कहे जाने के बाद कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए, विपक्षी दलों ने सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई। अब सरकार ने इस विवाद पर सफाई देते हुए कहा है कि यह कोई नया फैसला नहीं है, बल्कि दशकों से चली आ रही व्यवस्था है।
Follow on Google News
सरकार ने दी सफाई, कहा-यह कल तय नहीं किया गया, वर्षों से यही नियम

नेशनल डेस्क। 'पासपोर्ट नागरिकता का सर्टिफिकेट नहीं है' इस बयान पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कोई नया निर्णय नहीं है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा, “यह फैसला कल नहीं लिया गया कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। यह पिछले 12 वर्षों में भी नहीं लिया गया। कानूनी स्थिति कई दशकों से यही रही है।”

विदेश मंत्रालय की टिप्पणी के बाद उठे सवाल 

यह स्पष्टीकरण विदेश मंत्रालय द्वारा पासपोर्ट सेवा दिवस के अवसर पर आयोजित विस्तृत ब्रीफिंग के एक दिन बाद आया है। उस दौरान मंत्रालय ने कहा था कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है और इसे नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए। इस टिप्पणी के बाद विपक्षी नेताओं ने आलोचना की और सोशल मीडिया पर व्यापक बहस छिड़ गई।

कपिल सिब्बल बोले-कोई दस्तावेज मान्य नहीं तो क्या प्रमाण? 

विपक्षी दलों ने विदेश मंत्रालय की टिप्पणी पर सवाल उठाए हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता और पूर्व कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर पासपोर्ट भी नागरिकता का प्रमाण नहीं है तो आम नागरिक कैसे अपनी नागरिकता साबित करेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि सरकार के अनुसार कोई भी दस्तावेज नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं है। 2030 तक सिर्फ एक दस्तावेज बचेगा–भाजपा का सदस्यता कार्ड। कपिल सिब्बल ने कहा कि अगर बूथ लेवल अधिकारी (BLO) किसी की नागरिकता पर संदेह कर सकता है और उसे वोटिंग अधिकार से वंचित कर सकता है, तो यह मामला अंततः सुप्रीम कोर्ट पहुंचेगा। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी इसी तरह का सवाल उठाया है। लेखक-गीतकार जावेद अख्तर ने भी इस बयान पर चिंता जताई। अख्तर ने पूछा कि अगर पासपोर्ट नहीं तो कौन सा दस्तावेज भारतीय होने का प्रमाण है?

सरकार ने कानून और अदालत के फैसलों का दिया हवाला 

सरकार ने अपने रुख का बचाव करते हुए कहा कि मौजूदा कानूनों और अदालतों के फैसलों के अनुसार पासपोर्ट को कभी भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना गया है। इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा, “पासपोर्ट कभी भी नागरिकता का प्रमाण नहीं रहा है। पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट जारी किए जा सकते हैं। वर्ष 2013 में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसलों ने भी स्पष्ट किया है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है।”

ये भी पढ़ें: Cyber Fraud पर मोदी सरकार का बड़ा एक्शन! देशभर में लागू होगी E-Zero FIR, ऑनलाइन ठगी पर तुरंत होगी कार्रवाई

पासपोर्ट अधिनियम की धारा 20 का उल्लेख 

विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 20 का भी उल्लेख किया। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, यह धारा केंद्र सरकार को कुछ विशेष परिस्थितियों में गैर-नागरिकों को भी पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी करने की अनुमति देती है, यदि सरकार को यह सार्वजनिक हित में आवश्यक लगे। कानून के अनुसार, यदि सरकार यह मानती है कि सार्वजनिक हित में ऐसा करना आवश्यक है, तो वह “ऐसे व्यक्ति को, जो भारत का नागरिक नहीं है”, पासपोर्ट या यात्रा दस्तावेज जारी कर सकती है।

विदेश मंत्रालय की टिप्पणी के बाद शुरू हुआ विवाद 

यह विवाद बुधवार को शुरू हुआ, जब विदेश मंत्रालय ने चिप-सक्षम ई-पासपोर्ट के लाभों की जानकारी देते हुए कहा कि पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।

Featured News

फिर उठा पुराना कानूनी सवाल 

मंत्रालय की इस सफाई के बाद एक पुराना कानूनी प्रश्न फिर चर्चा में आ गया कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं है, तो फिर कौन-सा दस्तावेज किसी व्यक्ति की राष्ट्रीयता स्थापित करता है। विदेश मंत्रालय की टिप्पणी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। कई लोगों ने सवाल उठाया कि जो दस्तावेज किसी व्यक्ति को अंतरराष्ट्रीय यात्रा की अनुमति देता है, विदेश में दूतावासीय सुरक्षा सुनिश्चित करता है और दुनिया भर के इमिग्रेशन अधिकारियों द्वारा स्वीकार किया जाता है, उसे राष्ट्रीयता का प्रमाण क्यों नहीं माना जाता।

ये भी पढ़ें: ‘डिजिटल अरेस्ट’ गैंग पर CBI की स्ट्राइक! 16 राज्यों में 80 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी, सुप्रीम कोर्ट की फर्जी वेबसाइट से करते थे ठगी

संसद में भी उठ चुका है यह सवाल 

दरअसल, फरवरी 2020 में संसद में यह प्रश्न पूछा गया था कि क्या आधार कार्ड, पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र, पैन कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों को नागरिकता के अंतिम प्रमाण के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। उस समय गृह मंत्रालय ने किसी एक दस्तावेज को नागरिकता का निर्णायक प्रमाण नहीं माना था। गृह मंत्रालय ने उस समय कहा था कि नागरिकता से जुड़े प्रश्नों का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 तथा उसके तहत बनाए गए नियमों के प्रावधानों के अनुसार किया जाता है।

एकल नागरिकता कार्ड की व्यवस्था नहीं 

भारत में नागरिकता किसी एक राष्ट्रीय पहचान पत्र के आधार पर नहीं, बल्कि व्यक्ति की परिस्थितियों और उससे जुड़े दस्तावेजी रिकॉर्ड के आधार पर निर्धारित की जाती है। भारत ने अब तक किसी एक राष्ट्रीय नागरिकता कार्ड की व्यवस्था को नहीं अपनाया है।

Breaking News

बॉम्बे हाई कोर्ट का बड़ा फैसला क्या कहता है?

पासपोर्ट और नागरिकता को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट ने 12 अगस्त 2025 को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। जस्टिस अमित बोरकर की पीठ ने ठाणे निवासी बाबू अब्दुल रुफ सरदार की जमानत याचिका खारिज कर दी। पुलिस का आरोप था कि वह बांग्लादेशी नागरिक है और अवैध रूप से भारत में रह रहा था।

मामले के प्रमुख तथ्य 

  • आरोपी के पास वर्ष 2013 से आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और पासपोर्ट था।
  • उसके दस्तावेज आयकर रिकॉर्ड, बैंक खातों और व्यवसायिक पंजीकरण से जुड़े हुए थे।
  • वागले एस्टेट पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के अनुसार वह अवैध रूप से भारत में दाखिल हुआ था।
  • पुलिस का आरोप था कि उसने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर भारतीय पहचान हासिल की।

कोर्ट की अहम टिप्पणी

हाई कोर्ट ने कहा कि केवल आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी या पासपोर्ट होने से कोई व्यक्ति भारतीय नागरिक नहीं माना जा सकता। ये दस्तावेज पहचान और सरकारी सेवाओं के लिए उपयोगी हैं। नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत तय कानूनी शर्तों का विकल्प नहीं हो सकते। नागरिकता का निर्धारण केवल वैध कानूनी प्रक्रिया और संबंधित प्रावधानों के आधार पर किया जाता है।

ये भी पढ़ें: हवाई सफर हो सकता है महंगा! टिकट कीमतों में 25% तक बढ़ोतरी की आशंका, जेट फ्यूल संकट बना बड़ी वजह

नागरिकता अधिनियम, 1955 क्या कहता है? 

भारत में नागरिकता का निर्धारण नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत होता है। इस कानून के अनुसार भारतीय नागरिकता पांच आधारों पर प्राप्त की जा सकती है:

  • जन्म 
  • वंश 
  • पंजीकरण 
  • प्राकृतिककरण/देशीकरण 
  • किसी क्षेत्र के भारत में विलय 

नागरिकता का सबसे मजबूत प्रमाण क्या है? 

भारतीय नागरिकता का स्पष्ट प्रमाण सिटिजनशिप सर्टिफिकेट (Citizenship Certificate) माना जाता है, जो नागरिकता अधिनियम के तहत जारी किया जाता है। हालांकि यह प्रमाण पत्र केवल पंजीकरण या प्राकृतिककरण के जरिए नागरिकता पाने वाले लोगों को दिया जाता है। भारत के अधिकांश नागरिक जन्म से भारतीय हैं, इसलिए उनके पास आमतौर पर यह प्रमाण पत्र नहीं होता। नागरिकता साबित करने के लिए महत्वपूर्ण दस्तावेज नागरिकता साबित करने के लिए कोई एक सार्वभौमिक दस्तावेज नहीं है। 

Naresh Bhagoria
By Naresh Bhagoria

नरेश भगोरिया। 27 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हूं। माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्ववि...Read More

नई दिल्ली
--°
बारिश: -- mmह्यूमिडिटी: --%हवा: --
Source:AccuWeather
icon

Latest Posts