Aniruddh Singh
19 Jan 2026
सिंगापुर। एशियाई बाजारों में सोमवार को सोने की कीमतें ऐतिहासिक ऊंचाई के करीब पहुंच गईं, जो यह दिखाता है कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों में अनिश्चितता और चिंता बढ़ती जा रही है। एक ओर भारत समेत सभी एशियाई बाजारों में गिरावट का माहौल है तो दूसरी ओर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 4,700 डॉलर प्रति औंस के स्तर को छूता नजर आया। जबकि, चांदी 4% से अधिक बढ़त के साथ $94.03/oz के साथ नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इस अप्रत्याशित तेजी की सबसे बड़ी वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयान और कई यूरोपीय देशों पर नए टैरिफ लगाने की धमकी रही। इसके अलावा, मध्य पूर्व में ईरान से जुड़ी चिंताओं और अन्य वैश्विक तनावों ने निवेशकों की घबराहट बढ़ा दी है। इस वजह से वे सुरक्षित निवेशों की ओर रुख कर रहे हैं।
ऐसे समय में जब व्यापार और भू-राजनीति से जुड़े जोखिम बढ़ते हैं, निवेशक आमतौर पर सोने जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका की योजना का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों से कोई समझौता नहीं हुआ, तो 1 फरवरी से उनके सामान पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा, जो जून तक बढ़कर 25 प्रतिशत तक हो सकता है। इस सूची में फ्रांस, जर्मनी और यूनाइटेड किंगडम जैसे बड़े देश शामिल हैं। इस ऐलान के बाद यूरोप और अमेरिका के बीच बड़े व्यापार विवाद की आशंका गहरा गई है। इसी डर ने निवेशकों को जोखिम भरे एसेट्स से निकालकर सोने और चांदी जैसे कीमती धातुओं की ओर मोड़ दिया।
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त तेजी देखने को मिली और यह भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। चांदी की खास बात यह है कि इसे सुरक्षित निवेश के साथ-साथ औद्योगिक धातु के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है, इसलिए आर्थिक और औद्योगिक दोनों तरह की मांग इसे समर्थन देती है। मौजूदा हालात में सुरक्षित निवेश की मांग ने इसकी कीमतों को और मजबूती दी है। इसके अलावा, सोने की कीमतों को अमेरिकी फेडरल रिजर्व की संभावित ब्याज दर कटौती की उम्मीदों से भी सहारा मिल रहा है। हाल के अमेरिकी आर्थिक आंकड़े अपेक्षाकृत कमजोर रहे हैं और महंगाई में नरमी के संकेत मिले हैं। इससे यह धारणा बनी है कि फेड इस साल के अंत तक ब्याज दरों में कटौती कर सकता है।
जब ब्याज दरें घटने की उम्मीद होती है, तो सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश ज्यादा आकर्षक हो जाते हैं, क्योंकि उन्हें रखने की लागत कम महसूस होती है। भू-राजनीतिक तनाव भी सोने की तेजी के पीछे एक अहम कारण है। मध्य पूर्व में ईरान से जुड़ी चिंताओं और अन्य वैश्विक तनावों ने निवेशकों की घबराहट बढ़ाई है। कुल मिलाकर, ट्रंप के टैरिफ फैसले, वैश्विक राजनीति में बढ़ता तनाव और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने सोने को नई ऊंचाइयों पर पहुंचा दिया है, जो यह संकेत देता है कि फिलहाल बाजार में डर और सतर्कता का माहौल बना हुआ है।