तेहरान। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद पूरे मध्य पूर्व में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। वहीं अब देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार को लेकर पूरी दुनिया की नजरें ईरान पर टिकी हुई हैं। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, खामेनेई को देश के सबसे पवित्र शहरों में से एक मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया जाएगा।
यह फैसला केवल एक औपचारिक परंपरा नहीं बल्कि धार्मिक, ऐतिहासिक और पारिवारिक महत्व से जुड़ा हुआ है। मशहद शहर से खामेनेई का गहरा रिश्ता रहा है और यही वजह है कि उनके अंतिम संस्कार के लिए इसी शहर को चुना गया। आइए समझते हैं कि मशहद ही क्यों बना खामेनेई के अंतिम संस्कार का स्थान।
मशहद को चुनने का सबसे बड़ा कारण यह है कि, यह शहर अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्मस्थान है। ईरान के उत्तर-पूर्व में स्थित इस शहर में खामेनेई का जन्म एक धार्मिक परिवार में हुआ था। उनका बचपन और शुरुआती जीवन इसी शहर में बीता। खामेनेई के पिता शिया इस्लाम की परंपरा से जुड़े एक मौलवी थे और उनका परिवार धार्मिक शिक्षाओं के लिए जाना जाता था। बचपन से ही खामेनेई ने धार्मिक शिक्षा और सामाजिक गतिविधियों में रुचि दिखाई। इसी शहर में उनकी प्रारंभिक धार्मिक शिक्षा शुरू हुई और बाद में वे ईरान की इस्लामिक क्रांति से जुड़े आंदोलन का हिस्सा बने।
इस वजह से कई विश्लेषकों का मानना है कि, उनके जीवन की शुरुआत जिस शहर से हुई, वहीं उन्हें अंतिम विश्राम देना सम्मान और परंपरा दोनों का प्रतीक माना जा रहा है।
मशहद को चुनने की दूसरी बड़ी वजह खामेनेई का पारिवारिक रिश्ता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके पिता को भी इसी शहर में दफनाया गया था। उनका मकबरा मशहद में स्थित इमाम रजा की पवित्र दरगाह के परिसर में है। ईरान में कई धार्मिक परिवारों में यह परंपरा रही है कि, परिवार के प्रमुख सदस्यों को एक ही पवित्र स्थान के आसपास दफनाया जाए।
इसी परंपरा के तहत यह संभावना जताई जा रही है कि, खामेनेई को भी इसी पवित्र परिसर के आसपास दफनाया जाएगा, ताकि उनका अंतिम विश्राम स्थल उनके परिवार और धार्मिक विरासत से जुड़ा रहे।
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मशहद शहर का महत्व केवल खामेनेई के जीवन से ही नहीं जुड़ा है, बल्कि यह पूरे शिया मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। यहां स्थित इमाम रजा की दरगाह इस्लामी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तीर्थस्थलों में से एक है। इमाम रजा, शिया इस्लाम के आठवें इमाम माने जाते हैं और उनका मकबरा मशहद में स्थित है।
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पहलू |
जानकारी |
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धार्मिक पहचान |
शिया मुसलमानों का प्रमुख तीर्थस्थल |
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प्रमुख स्थल |
इमाम रजा की दरगाह |
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तीर्थयात्री |
हर साल लगभग 3 करोड़ लोग आते हैं |
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स्थान |
उत्तर-पूर्वी ईरान |
हर साल दुनिया भर से लाखों श्रद्धालु मशहद पहुंचते हैं। यही कारण है कि, इस शहर को ईरान की धार्मिक राजधानी भी कहा जाता है।
मशहद केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि भौगोलिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण शहर है। यह ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है और इसकी आबादी लगभग 35 लाख से 54 लाख के बीच बताई जाती है। इतिहास में भी इस शहर की अहम भूमिका रही है। अफशरीद राजवंश के समय मशहद अफशरीद ईरान की राजधानी हुआ करता था। आज भी यह शहर ईरान की धार्मिक, सांस्कृतिक और आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
मशहद केवल खामेनेई का जन्मस्थान ही नहीं बल्कि उनकी राजनीतिक और धार्मिक यात्रा की शुरुआत भी इसी शहर से हुई थी। यहीं उन्होंने धार्मिक शिक्षा हासिल की और बाद में ईरान में हुए राजनीतिक आंदोलनों में हिस्सा लिया। ईरान की 1979 की इस्लामिक क्रांति के दौरान खामेनेई क्रांतिकारी विचारधारा के समर्थकों में शामिल थे।
उनकी राजनीतिक पहचान धीरे-धीरे मजबूत होती गई और बाद में वे ईरान के राष्ट्रपति भी बने। 1989 में उन्हें देश का सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया। इस तरह मशहद उनके जीवन के शुरुआती और महत्वपूर्ण अध्यायों का साक्षी रहा।
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ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के अनुसार, अंतिम संस्कार से पहले राजधानी तेहरान में एक भव्य श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया जाएगा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान की इमाम खुमैनी मस्जिद में श्रद्धांजलि कार्यक्रम होगा। तीन दिनों तक शोक समारोह आयोजित किए जाएंगे। लाखों लोगों के शामिल होने की संभावना है। इसके बाद शव को मशहद ले जाया जाएगा। यह कार्यक्रम ईरान के इतिहास के सबसे बड़े सार्वजनिक आयोजनों में से एक हो सकता है।
हालांकि, अंतिम संस्कार की तैयारियां जारी हैं, लेकिन कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कार्यक्रम को फिलहाल स्थगित किया जा सकता है। ईरान के एक अधिकारी ने बताया कि, शोक समारोह को फिलहाल टाल दिया गया है। तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में शव को रखने की तैयारी हो रही है। नई तारीख जल्द घोषित की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि, इसके पीछे सुरक्षा से जुड़े गंभीर कारण हो सकते हैं।
अंतिम संस्कार को लेकर सुरक्षा चिंताएं इसलिए भी बढ़ गई हैं क्योंकि इजरायल की ओर से कड़ी चेतावनी जारी की गई है। इजरायल के रक्षा मंत्री ने कहा है कि, अगर ईरान का नया नेता इजरायल के खिलाफ आक्रामक नीति अपनाता है तो उसे भी निशाना बनाया जा सकता है। इस बयान के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है और ईरान भी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बेहद सतर्क हो गया है।
अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके बेटे मोजतबा हुसैनी खामेनेई को संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। हालांकि, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
मोजतबा खामेनेई को ईरान की राजनीति में पर्दे के पीछे प्रभावशाली व्यक्ति माना जाता है और उनके ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड फोर्स (IRGC) से करीबी संबंध बताए जाते हैं।
खामेनेई की मौत के बाद फिलहाल ईरान का प्रशासन एक अंतरिम नेतृत्व परिषद संभाल रही है। इस परिषद में शामिल हैं-
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पद |
नाम |
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राष्ट्रपति |
मसूद पेजेशकियान |
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न्यायपालिका प्रमुख |
गुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई |
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संरक्षक परिषद सदस्य |
अयातुल्ला अलीरेजा अराफी |
यह परिषद तब तक देश का संचालन करेगी जब तक नए सर्वोच्च नेता का चयन नहीं हो जाता।
अयातुल्ला अली खामेनेई को मध्य पूर्व के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान की राजनीति, सैन्य रणनीति और विदेश नीति पर निर्णायक प्रभाव डाला। उनके शासनकाल में-
अयातुल्ला अली खामेनेई ने लगभग 36 वर्षों तक ईरान के सर्वोच्च नेता के रूप में शासन किया। वे 1989 में इस पद पर आसीन हुए थे और उसके बाद से ईरान की राजनीतिक, धार्मिक और सैन्य नीतियों पर उनका निर्णायक प्रभाव रहा।
हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों के दौरान उनकी मौत हो गई। उनकी मौत की खबर सबसे पहले अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा की थी, जिसके बाद ईरानी प्रशासन ने इसकी आधिकारिक पुष्टि कर दी।
खामेनेई की मौत ने ईरान की राजनीति में अचानक बड़ा खालीपन पैदा कर दिया है और अब देश में नए नेतृत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है।