सोने-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट:फिर भी नहीं बढ़ रही बिक्री... आखिर क्यों?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट का असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। हालांकि, कीमतें कम होने के बावजूद ग्राहकों की मांग कमजोर बनी हुई है। कारोबारियों का मानना है कि आर्थिक प्राथमिकताओं और बाजार की सुस्ती के कारण फिलहाल खरीदारी में अपेक्षित तेजी नहीं आ रही है।
युद्धविराम के बाद कम हुआ सुरक्षित निवेश
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के संकेत मिलते ही निवेशकों का रुझान सुरक्षित निवेश विकल्पों से घटने लगा। इसी का असर सोने और चांदी की कीमतों पर भी दिखाई दिया। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने की आशंका के दौरान कीमतों में तेज उछाल आया था, लेकिन हालात सामान्य होने की उम्मीद के साथ दाम नीचे आने लगे। कच्चे तेल के दामों में भी इसी अवधि में गिरावट दर्ज की गई।
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सोने की कीमत में सात महीने की सबसे बड़ी गिरावट
वैश्विक बाजार में सोने की कीमत पिछले सात महीनों के सबसे निचले स्तर तक पहुंच गई। एक ही दिन में सोने के दाम में 3.3 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी भी जनवरी के मुकाबले काफी नीचे आ गई। डॉलर की मजबूती ने भी सोने की कीमतों पर दबाव बनाया। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज दरों में बदलाव और निवेशकों की रणनीति ने भी इस गिरावट को गति दी है।
भारतीय बाजार में भी घटे सोने-चांदी के दाम
इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.40 लाख रुपये और एक किलोग्राम चांदी की कीमत 2.15 लाख रुपये दर्ज की गई। जनवरी के आखिर में सोना 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी 4.04 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई थी। इसके बाद से दोनों धातुओं में लगातार गिरावट देखने को मिली है।
कीमत घटने के बावजूद बाजार में सुस्ती बरकरार
बताया जा रहा है कि दाम कम होने के बावजूद बाजार में अपेक्षित खरीदारी नहीं हो रही है। स्कूल खुलने के कारण ज्यादातर परिवारों ने अपनी बचत शिक्षा और जरूरी खर्चों में लगा दी है। ऐसे में ज्वेलरी खरीदने की प्राथमिकता फिलहाल कम हो गई है। यही वजह है कि खुदरा बाजार में मांग कमजोर बनी हुई है।
जीएसटी और खर्चों का भी पड़ रहा असर
बता दें कि सोने और चांदी की खरीद पर ग्राहकों को कीमत के अलावा 3 प्रतिशत जीएसटी भी देना पड़ता है। इससे कुल लागत और बढ़ जाती है। लगातार बढ़ते घरेलू खर्च और आर्थिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश में लोग फिलहाल बड़े निवेश से बच रहे हैं। इसका असर सर्राफा कारोबार की रफ्तार पर साफ दिखाई दे रहा है।
छोटे कारोबारियों के सामने बढ़ी चुनौती
बताया जा रहा है कि सामान्य परिस्थितियों में कीमतें घटने पर मांग बढ़ जाती है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। नए ऑर्डर नहीं मिलने से छोटे ज्वेलरी निर्माताओं और कारीगरों पर भी असर पड़ा है। उनका मानना है कि जब तक बाजार में उपभोक्ताओं का भरोसा और खरीदारी की क्षमता नहीं बढ़ेगी, तब तक कारोबार में अपेक्षित सुधार की संभावना कम रहेगी।












