आज रात आसमान में दिखेगा स्ट्रॉबेरी मून!नाम के पीछे छिपा सच आपको कर देगा हैरान

आज की रात खगोल विज्ञान (Astronomy) पसंद करने वालों के लिए बेहद खास होने वाली है। आसमान में इस महीने की पूर्णिमा दिखाई देगी, जिसे स्ट्रॉबेरी मून कहा जाता है। यह नाम सुनते ही कई लोगों के मन में सवाल आता है कि क्या आज चांद सच में गुलाबी या लाल रंग का दिखाई देगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं कि स्ट्रॉबेरी मून क्या है, इसका नाम कैसे पड़ा और इसे देखने का सही समय क्या है।
क्या सच में स्ट्रॉबेरी जैसा दिखेगा चांद?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि स्ट्रॉबेरी मून का मतलब चांद का रंग नहीं होता। आज रात चांद सामान्य पूर्णिमा की तरह ही सफेद या हल्का पीला दिखाई देगा। यह बिल्कुल स्ट्रॉबेरी जैसा गुलाबी या लाल नहीं होता। तो फिर इसका नाम स्ट्रॉबेरी मून क्यों पड़ा? इसका जवाब इतिहास और परंपरा में छिपा है।
स्ट्रॉबेरी मून नाम कैसे पड़ा?
स्ट्रॉबेरी मून नाम उत्तर-पूर्वी अमेरिका की एल्गोनक्विन (Algonquin) जनजातियों से जुड़ा हुआ है। इन जनजातियों के लिए जून का महीना स्ट्रॉबेरी की फसल का समय होता था। इस दौरान जंगली स्ट्रॉबेरी पककर तैयार हो जाती थीं और उनकी कटाई शुरू हो जाती थी। इसी वजह से जून की पूर्णिमा को उन्होंने Strawberry Moon कहना शुरू किया। समय के साथ यह नाम पूरी दुनिया में फैल गया और आज भी जून की पूर्णिमा को इसी नाम से जाना जाता है।
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इस साल स्ट्रॉबेरी मून क्यों खास है?
इस बार की पूर्णिमा सिर्फ नाम की वजह से नहीं, बल्कि खगोलीय कारणों से भी खास मानी जा रही है। 21 जून को समर सोल्सटिस (Summer Solstice) यानी साल का सबसे लंबा दिन था। इसके बाद आने वाली यह पहली पूर्णिमा है। इस कारण इस बार चांद आसमान में थोड़ा नीचे दिखाई देगा। नॉर्थन हेमिस्फेयर में यह चांद दक्षिणी दिशा के करीब नजर आएगा और पूरी रात एक अलग तरह का सुंदर दृश्य बनाएगा।
आसमान में कैसा दिखेगा चांद?
इस बार चांद का मूवमेंट थोड़ा अलग होगा। चांद सामान्य से थोड़ा नीचे दिखाई देगाM, यह दक्षिणी दिशा के पास ज्यादा समय तक रहेगा, इसकी रोशनी शांत और स्थिर दिखेगी और पूरा नजारा काफी आकर्षक और साफ होगा।
भारत में कब और कैसे देखें स्ट्रॉबेरी मून?
भारत में स्ट्रॉबेरी मून को देखने का सबसे अच्छा समय 29 जून की शाम से शुरू होगा। जैसे ही सूरज डूबेगा, चांद पूर्वी/दक्षिणी दिशा में दिखाई देने लगेगा। इसकी पूरी चमक 30 जून की सुबह लगभग 5:27 बजे मानी जा रही है, जब यह अपने पूर्ण आकार में होगा।
क्या इसे देखने के लिए टेलिस्कोप जरूरी है?
नहीं। स्ट्रॉबेरी मून को देखने के लिए किसी खास उपकरण की जरूरत नहीं है। आप इसे अपनी नंगी आंखों से देख सकते हैं। चाहें तो बायनोकुलर से और साफ नजारा देख सकते हैं। कैमरे से भी इसकी खूबसूरत तस्वीर ली जा सकती है।
बेहतर नजारा देखने के लिए सही जगह क्या है?
अगर आप इस खगोलीय नजारे का पूरा आनंद लेना चाहते हैं, तो जगह का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। कुछ जरूरी टिप्स ऐसी जगह जाएं जहां शहर की रोशनी कम हो, खुला आसमान हो, जैसे मैदान या छत, पेड़ों या ऊंची इमारतों से बाधा न हो और साफ मौसम होने पर नजारा और भी सुंदर लगेगा।
क्यों खास होता है पूर्णिमा का यह नजारा?
पूर्णिमा सिर्फ एक खगोलीय घटना नहीं है, बल्कि यह प्रकृति का एक शांत और सुंदर दृश्य होता है। स्ट्रॉबेरी मून की खास बात यह है कि यह गर्मियों की शुरुआत के बाद आती है, जब मौसम साफ और आसमान अधिक खुला होता है। इस वजह से चांद ज्यादा साफ और चमकदार दिखता है।











