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Crude Oil Price:120 डॉलर पार कच्चा तेल, 4 साल में सबसे बड़ा उछाल, क्या बिगड़ेगा बजट?

कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जो करीब चार साल का सबसे ज्यादा है। इस तेजी के पीछे अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सबसे बड़ा कारण बनकर उभरा है। मिडिल ईस्ट में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं और होर्मुज जैसे अहम तेल मार्ग पर संकट गहराता जा रहा है।
120 डॉलर पार कच्चा तेल, 4 साल में सबसे बड़ा उछाल, क्या बिगड़ेगा बजट?
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दुनिया एक बार फिर महंगाई के नए दौर की ओर बढ़ती दिख रही है। इसकी सबसे बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में अचानक आई तेज बढ़ोतरी है। आज ब्रेंट क्रूड का दाम 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है, जो करीब चार साल का सबसे ऊंचा स्तर है।

अमेरिका-ईरान तनाव बना मुख्य कारण

तेल के दाम बढ़ने की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। अमेरिका ने ईरान के पोर्ट्स पर दबाव बढ़ा दिया है और कई तेल टैंकरों को रोकने की कार्रवाई तेज कर दी है। दूसरी तरफ ईरान भी पीछे हटने के मूड में नहीं है। दोनों देशों के बीच यह टकराव अब सीधे तेल सप्लाई को प्रभावित कर रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ कहा है कि ईरान पर दबाव तब तक जारी रहेगा जब तक वह अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर झुकता नहीं। 

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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना सबसे बड़ा संकट

दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक होर्मुज पर संकट गहराता जा रहा है। यह रास्ता दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस की सप्लाई का मुख्य जरिया है। यहां किसी भी तरह की रुकावट का मतलब है पूरी दुनिया में सप्लाई पर असर। अभी हालात ऐसे हैं कि इस रास्ते से तेल की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। इससे बाजार में घबराहट बढ़ गई है और कीमतों में तेजी आ रही है।

करीब 1 अरब बैरल तक सप्लाई प्रभावित

रिपोर्ट्स के अनुसार, तेल की सप्लाई में भारी कमी आने का खतरा है। अनुमान है कि करीब 1 अरब बैरल तक सप्लाई प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि ट्रेडर्स और निवेशक सतर्क हो गए हैं। तेल बाजार में इस समय तेल की डिमांड बनी हुई है लेकिन सप्लाई घट रही है, जिससे कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं।

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तेल के दामों का ताजा हाल

कच्चे तेल के बाजार में लगातार तेजी देखी जा रही है। जून के लिए ब्रेंट क्रूड करीब 120 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। जुलाई Contract भी लगातार बढ़त दिखा रहा है। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 107-108 डॉलर के आसपास बना हुआ है। पिछले कुछ दिनों में तेल की कीमतें लगातार बढ़ी हैं, जिससे साफ है कि बाजार में दबाव बढ़ रहा है।

अमेरिका की रणनीति से और बढ़ सकता है तनाव

अमेरिका अब ईरान से जुड़े तेल टैंकरों को जब्त करने की योजना बना रहा है और अन्य देशों को भी इसमें शामिल करने की कोशिश कर रहा है। इसके अलावा मिडिल ईस्ट में सैन्य ताकत बढ़ाने की तैयारी भी चल रही है।

भारत पर क्या होगा असर?

भारत जैसे देशों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से खरीदता है। तेल महंगा होने से पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ सकते हैं, महंगाई में इजाफा होगा, आम लोगों का खर्च बढ़ेगा, रुपए पर दबाव बढ़ सकता है और देश का आयात बिल भी बढ़ेगा। इसका असर कंपनियों के मुनाफे और आम लोगों की जेब दोनों पर पड़ेगा।

क्या 130 डॉलर तक पहुंच सकता है तेल?

एक्सपर्ट का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव जारी रहा और होर्मुज पूरी तरह से नहीं खुला, तो तेल की कीमतें 130 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं। फिलहाल बाजार अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। 

Garima Vishwakarma
By Garima Vishwakarma

गरिमा विश्वकर्मा | People’s Institute of Media Studies से B.Sc. Electronic Media की डिग्री | पत्रकार...Read More

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