जबलपुर। एलपीजी गैस की लगातार बनी किल्लत का असर अब लोगों की रसोई पर साफ दिखाई देने लगा है। सिलेंडर की समय पर डिलीवरी नहीं होने से लोग मजबूरी में पारंपरिक ईंधनों की ओर लौट रहे हैं। यही कारण है कि इन दिनों बाजार में कंडों (उपलों) की मांग तेजी से बढ़ गई है और उनकी कीमत भी दोगुनी से अधिक हो गई है।
कुछ समय पहले तक बाजार में 2 रुपए प्रति नग मिलने वाला कंडा अब 5 रुपए तक बिक रहा है। शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों में भी लोग बड़ी मात्रा में कंडे का स्टॉक करने लगे हैं। जानकारी के अनुसार होटल, ढाबा और छोटे भोजनालय संचालक भी गैस की अनिश्चित आपूर्ति को देखते हुए कंडों जैसे वैकल्पिक ईंधन का उपयोग बढ़ाने लगे हैं। इससे बाजार में अचानक कंडों की मांग बढ़ गई है।
कई जगहों पर कंडों के बड़े-बड़े ढेर लगाए जा रहे हैं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। वीडियो में यह कहते देखा जा रहा है कि गैस की चिंता वे करें जो शहर में रहते हैं, हम गांव वाले हैं ‘लाला’ कंडों का ढेर लगाकर रखते हैं। वायरल वीडियो को देखकर लोग यह कह रहे हैं कि गांव के लोग आज भी सुकून में रहते हैं। यही हाल कोरोना काल में भी था।
पहले कंडों की बिक्री सीमित रहती थी, लेकिन पिछले कुछ दिनों से गैस की किल्लत के चलते कंडों की मांग कई गुना बढ़ गई है। लोग एक साथ सैकड़ों कंडे खरीदकर ले जा रहे हैं। शहरी क्षेत्रों में कंडों के दाम बढ़ गए हैं।
रामनाथ यादव, कंडा व्यापारी, रांझी
गैस की कमी ने बाजार की स्थिति ही बदल दी है। पहले कंडे धार्मिक कार्यों या गक्कड़-भरता जैसे कार्यक्रमों के लिए लोग खरीदते थे, लेकिन अब लोग इसे नियमित र्इंधन के रूप में खरीद रहे हैं। हम भी खाना बनाने के लिए गांव से कंडे मंगा रहे हैं। यदि गैस की सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो कंडों की कीमत और बढ़ सकती है।
सुरेश केशरवानी, संचालक मां शारदा भोजनालय, मदन महल
हमें नवरात्र के लिए साबूदाना का पापड़ बनाना था, गैस की किल्लत को देखते हुए मैंने गांव से कंडे मंगवाए हैं। अब चूल्हे में पकाकर पापड़ और चिप्स बना रही हूं।
प्रभा देवी, गृहिणी, शक्ति नगर जबलपुर।