Republic Day 2025 : 7 महीनों तक चलती है गणतंत्र दिवस के परेड की प्रैक्टिस, जानें 26 जनवरी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य

नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है, क्योंकि इस दिन भारत का संविधान लागू हुआ था। यह भारतीय इतिहास का एक अहम दिन है। बचपन से लेकर आज तक हमें इस दिन के बारे में कई अहम चीजें पढ़ाई और बताई जाती है। लेकिन कुछ ऐसे दिलचस्प और अनसुने किस्से मौजूद है, जो शायद ही हमें पता हो।
इस साल चीफ गेस्ट के रूप में इंडोनेशिया के प्रेसिडेंट प्राबोवो सुवि आंतो मौजूद रहेंगे। भारत और इंडोनेशिया के बीच डिप्लोमेटिक रिलेशन्स के 75 वर्ष पूरे होने के जश्न में ये निर्णय लिया गया।
15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर झंडारोहण किया जाता है। इसमें तिरंगे को नीचे से ऊपर की ओर खींचकर फहराया जाता है। इसे प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर किया जाता है। झंडा फहराना आजादी के संघर्ष का सम्मान है, जबकि झंडा ऊंचा करना लोकतंत्र और संविधान की गरिमा का प्रतीक है।
परेड के दौरान चीफ गेस्ट को हवाई फायरिंग से सलामी दी जाती है, जो नेशनल एंथम के समय होती है। इस फायरिंग के लिए इस्तेमाल किए गए हथियार 1941 में बने थे। इन सभी रोचक तथ्यों को जानकर आप गणतंत्र दिवस के महत्व को और बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।
26 नवंबर 1949 को बना संविधान, 26 जनवरी 1950 को हुआ लागू
संविधान की रचना एक अहम कहानी है। भारत का संविधान 26 नवंबर 1949 को तैयार हो गया था, लेकिन इसे लागू करने के लिए 26 जनवरी 1950 की तारीख चुनी गई। इसके निर्माण में डॉ. भीमराव अंबेडकर का अहम योगदान था। 26 जनवरी 1950 को भारत ने खुद को एक गणतांत्रिक राष्ट्र घोषित किया।
इस बार इंडोनेशिया के प्रेसिडेंट होंगे चीफ गेस्ट
गणतंत्र दिवस का पहला समारोह 26 जनवरी 1950 को नई दिल्ली के इरविन स्टेडियम (अब मेजर ध्यान चंद स्टेडियम) में हुआ था, जिसमें भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने हिस्सा लिया था। इस अवसर पर हर साल किसी विदेशी देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या शासक को चीफ गेस्ट के रूप में आमंत्रित किया जाता है। चीफ गेस्ट का चयन प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति की अनुमति से किया जाता है।
इस साल चीफ गेस्ट के रूप में इंडोनेशिया के प्रेसिडेंट प्राबोवो सुवि आंतो मौजूद रहेंगे। भारत और इंडोनेशिया के बीच डिप्लोमेटिक रिलेशन्स के 75 वर्ष पूरे होने के जश्न में ये निर्णय लिया गया।
‘झंडा फहराना’ और ‘झंडा ऊंचा करना’ में अंतर
26 जनवरी के रोज ध्वजारोहण (Flag Unfurling) किया जाता है। तिरंगा पहले से पोल की ऊंचाई पर बंधा होता है और इसे सीधा ऊपर खोल दिया जाता है। यह भारत के गणराज्य बनने और संविधान की शक्ति का प्रतीक है। 26 जनवरी पर ध्वजारोहण भारत के राष्ट्रपति द्वारा कर्तव्य पथ पर किया जाता है।
15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस पर झंडारोहण किया जाता है। इसमें तिरंगे को नीचे से ऊपर की ओर खींचकर फहराया जाता है। इसे प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले पर किया जाता है। झंडा फहराना आजादी के संघर्ष का सम्मान है, जबकि झंडा ऊंचा करना लोकतंत्र और संविधान की गरिमा का प्रतीक है।
7 महीनों तक चलती है परेड की प्रैक्टिस
गणतंत्र दिवस परेड हर साल नई दिल्ली के राजपथ पर आयोजित होती है, जिसमें भारतीय सेना, वायुसेना और नौसेना के जवान भाग लेते हैं। हैरानी की बात यह है कि इस परेड की तैयारी जुलाई से ही शुरू हो जाती है और परेड में शामिल होने वाले जवान सुबह 3 बजे तक अपने स्थल पर पहुंच जाते हैं। गणतंत्र दिवस के अवसर पर भारत सरकार विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्टता के लिए पुरस्कार देती है, जैसे पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री।
परेड के दौरान चीफ गेस्ट को हवाई फायरिंग से सलामी दी जाती है, जो नेशनल एंथम के समय होती है। इस फायरिंग के लिए इस्तेमाल किए गए हथियार 1941 में बने थे। इन सभी रोचक तथ्यों को जानकर आप गणतंत्र दिवस के महत्व को और बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।











