ग्वालियर। शहर की सड़कों पर आतिशबाजी, बैंडबाजों की धुन पर नाचते-झूमते लोगों की भीड़ देखकर राहगीरों को लगा, कि शायद किसी राजनीतिक पार्टी की रैली या शादी-ब्याह है, लेकिन जैसे ही लोगों की नजर जुलूस में चल रही चार पहिया गाड़ियों पर लगे पोस्टर पर पड़ी, सभी हैरान रह गए, क्योंकि उन पर लिखा था- बेटी हुई है। दरअसल यह अनोखी यात्रा किसी बारात की नहीं, बल्कि एक बेटी के जन्म की खुशी में पूर्व जिला पंचायत सदस्य व परिवारजनों ने मिलकर निकाली। जिससे समाज में बेटी है तो कल है का संदेश जा सके।
सिटी सेंटर निवासी राकेश सिंह यादव के पुत्र मानवेन्द्र सिंह यादव की पत्नी दीपा सिंह के घर बिटिया ने जन्म 4 अप्रैल को हुआ है और करूणा हॉस्पिटल में जन्मी बच्ची को जब अस्पताल से घर लाया गया, तब परिवार और रिश्तेदार ने गुब्बारों-फूल मालाओं से सजी कारों के साथ बैंड-बाजे के साथ धूमधाम से स्वागत करते हुए जश्न में यात्रा निकाली। जिसके चलते ढोल व बैंड की धुन पर परिजन-रिश्तेदार व करीबी लोग नाचते-गाते घर पहुंचे। साथ ही आतिशबाजी के बाद लोगों का मुंह मीठा कराकर खुशियां साझा कीं।
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इस अनोखे आयोजन को देखने वाले लोग परिवार की सोच और बेटी के प्रति सम्मान की खुलकर सराहना करते नजर आए। बच्ची के दादा व पूर्व जिला पंचायत के सदस्य राकेश यादव ने बताया कि उनके परिवार की दूसरे जनरेशन में बेटी का जन्म हुआ है, इसलिए यह खुशी खास है। बेटी कोई बोझ नहीं होती, उसे अच्छी शिक्षा और बेहतर भविष्य देना ही परिवार की जिम्मेदारी है। घर में बेटी होना गर्व की बात है और भगवान का आशीर्वाद है। वहीं अस्पताल से घर तक जश्न के माध्यम से हम यह संदेश देना चाहते है, कि बेटी बोझ नहीं है, बेटी को अच्छे से पढ़ाएं, उसे अच्छा भविष्य दें।
शहरवासियों ने इस पहल की सराहना की है, उन्होंने कहा कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का संदेश समाज में ऐसे आयोजनों से मजबूत होता है। परिवार ने पूरे शहर का नाम रोशन किया है, सभी ने नवजात बच्ची के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि बेटे भाग्य से होते हैं, बेटी सौभाग्य से होती हैं।
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बेटी के जन्म पर निकाली गई यह यात्रा न केवल परिवार की खुशी का प्रतीक बनी, बल्कि समाज को बेटियों के सम्मान और समानता का सकारात्मक संदेश भी दे गई। वहीं सोशल मीडिया पर जबरदस्त रूप से वायरल हो रहे अनोखे उत्सव की खासी चर्चा है। हर कोई परिवार की सोच की प्रशंसा करता नजर आया, साथ ही लोगों ने कहा कि सभी घरों में बेटी होनी चाहिए, बचपन से लेकर बुढ़ापे तक बेटी अपने माता-पिता का साथ देती है और घर में खुशी लाती है।