यूरोप में अचानक कैसे आई एक्सट्रीम हीटवेव...स्कूल सहित जनजीवन बुरी तरह प्रभावति, 18 की मौत

यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। फ्रांस, ब्रिटेन, स्पेन, इटली, जर्मनी और बेल्जियम समेत कई देशों में तापमान रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है। हालात इतने गंभीर हैं कि स्वास्थ्य सेवाओं से लेकर परिवहन, बिजली और जल आपूर्ति तक प्रभावित होने लगी है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक पश्चिमी यूरोप के ऊपर बने ‘हीट डोम’ के कारण गर्म हवा फंस गई है, जिससे तापमान लगातार बढ़ रहा है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से ऐसी चरम मौसम घटनाएं पहले की तुलना में अधिक खतरनाक और लंबे समय तक रहने वाली हो गई हैं।
फ्रांस में 18 लोगों की मौत
फ्रांस सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल है। यहां विकेंड से अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। दोनों बच्चों को कार के अंदर बेहोशी की हालत में पाया गया था।
देश के आधे से अधिक क्षेत्रों में रेड अलर्ट जारी किया गया है और करीब 3.9 करोड़ लोग इसकी जद में हैं। हालात को देखते हुए 1,350 से अधिक स्कूल बंद कर दिए गए हैं। फ्रांस सरकार ने आपात बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है।
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ब्रिटेन में दूसरी बार रेड हेल्थ वार्निंग
- ब्रिटेन की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी ने इंग्लैंड के छह क्षेत्रों में रेड हेल्थ वार्निंग जारी की है। चेतावनी में कहा गया है कि अत्यधिक गर्मी स्वस्थ लोगों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती है।
- मौसम विभाग के अनुसार इस सप्ताह इंग्लैंड और वेल्स में तापमान 38 से 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यदि ऐसा हुआ तो 1976 का जून माह का रिकॉर्ड टूट सकता है।
- इससे पहले जुलाई 2022 में पहली बार रेड अलर्ट जारी किया गया था, जब तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था।
स्पेन, इटली और जर्मनी में भी बढ़ा संकट
- स्पेन में सामान्य से 5 से 10 डिग्री सेल्सियस अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है। आमतौर पर ठंडे माने जाने वाले सैन सेबेस्टियन क्षेत्र में भी तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
- इटली ने 12 शहरों में रेड हीट अलर्ट जारी किया है। वहीं दक्षिण-पश्चिम फ्रांस में एक परमाणु संयंत्र को नदी का पानी अधिक गर्म होने के कारण अपना एक रिएक्टर बंद करना पड़ा।
- जर्मनी में गर्मी से राहत पाने के लिए पानी में उतरे लोगों के साथ हादसे हुए, जिनमें पांच लोगों की मौत हो गई। फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट पर भी लंबे समय तक विमानों में फंसे यात्रियों को गर्मी की भारी परेशानी झेलनी पड़ी।
बेल्जियम और पेरिस में टूट सकते हैं रिकॉर्ड
बेल्जियम के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि हीटवेव एक सप्ताह तक जारी रह सकती है। वहीं पेरिस में जून महीने का अब तक का सबसे अधिक तापमान दर्ज होने की संभावना है।
फ्रांस के बोर्डो में तापमान 41.9 डिग्री सेल्सियस और पोइटियर्स में 41.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जिसने कई दशक पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अनुसार यूरोप में तापमान बढ़ने की रफ्तार वैश्विक औसत से दोगुनी से भी अधिक हो चुकी है, जिससे भविष्य में ऐसी घटनाओं के और बढ़ने की आशंका है।
क्या है हीट डोम, जिसने बढ़ाई परेशानी?
हीट डोम तब बनता है जब उच्च दबाव वाला एक विशाल क्षेत्र किसी इलाके के ऊपर लंबे समय तक स्थिर हो जाता है। यह गर्म हवा को बाहर निकलने नहीं देता और धरती के पास गर्मी लगातार जमा होती रहती है। नतीजा यह होता है कि दिन-प्रतिदिन तापमान बढ़ता जाता है और गर्मी कई गुना ज्यादा महसूस होने लगती है। इस बार पश्चिमी यूरोप का बड़ा हिस्सा इसी हीट डोम की चपेट में है।
इटली में अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सिसिली और सार्डिनिया जैसे इलाकों में तापमान सहारा रेगिस्तान के बराबर पहुंच गया है। सरकार ने कई शहरों में रेड अलर्ट जारी किया है।
न्यूक्लियर प्लांट भी तेज गर्मी में झुलसा
गर्मी का असर केवल लोगों पर ही नहीं, बल्कि ऊर्जा व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। फ्रांस के कुछ परमाणु ऊर्जा संयंत्रों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। दरअसल, ये संयंत्र नदियों के पानी से अपने रिएक्टरों को ठंडा करते हैं। लेकिन गर्मी के कारण नदी का पानी ही इतना गर्म हो गया कि वह रिएक्टरों को ठंडा करने के लिए उपयुक्त नहीं रहा। यदि और गर्म पानी नदी में छोड़ा जाता तो जलीय जीवों को भारी नुकसान हो सकता था। इसलिए कई रिएक्टरों का संचालन रोकना पड़ा।
भारत में बारिश लेकिन यूरोप में लू क्यों?
कई लोगों के मन में सवाल है कि जब भारत में मानसून आ रहा है तो यूरोप में इतनी गर्मी क्यों पड़ रही है। इसका जवाब पृथ्वी की भौगोलिक स्थिति और मौसम चक्र में छिपा है। भारत में जून के दौरान दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय हो जाता है, जिससे बारिश शुरू होती है। वहीं यूरोप के अधिकांश देशों के लिए जून और जुलाई गर्मियों का चरम समय होता है। वहां लोग इसी मौसम में छुट्टियां मनाने निकलते हैं।
हालांकि इस बार जलवायु परिवर्तन और हीट डोम के कारण गर्मी सामान्य स्तर से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि भविष्य में यूरोप को ऐसी चरम गर्मी की घटनाओं का और अधिक सामना करना पड़ सकता है।











