Best of Two से बदली तस्वीर!CBSE 10वीं में बढ़ा पास प्रतिशत, हजारों छात्रों के बढ़े नंबर

केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ओर से पहली बार आयोजित कक्षा 10 की दूसरी बोर्ड परीक्षा का छात्रों को बड़ा फायदा मिला है। नई Best of Two व्यवस्था लागू होने के बाद न सिर्फ पास प्रतिशत बढ़ा है, बल्कि छात्रों पर एक ही परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव भी काफी कम हुआ है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस व्यवस्था ने छात्रों को अपनी गलतियों को सुधारने और बेहतर अंक हासिल करने का एक और मौका दिया है।
96.78% पहुंचा कुल पास प्रतिशत
एक रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्य परीक्षा और दूसरी बोर्ड परीक्षा के परिणाम को मिलाने के बाद वर्ष 2025-26 में कक्षा 10 का कुल पास प्रतिशत बढ़कर 96.78 प्रतिशत हो गया है। इससे पहले केवल मुख्य परीक्षा के बाद पास प्रतिशत करीब 93.70 प्रतिशत था। विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरी परीक्षा में पास होने वाले छात्रों को अंतिम रिजल्ट में शामिल करने और कई छात्रों के अंक बेहतर होने की वजह से कुल पास प्रतिशत में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की गई।
दूसरी परीक्षा में 60% छात्रों ने बढ़ाए अंक
रिपोर्ट के अनुसार, दूसरी बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए करीब 60 प्रतिशत छात्रों ने अपने अंक पहले से बेहतर किए। इनमें ऐसे छात्र भी शामिल थे जो पहली परीक्षा के नतीजों से संतुष्ट नहीं थे या फिर किसी व्यक्तिगत कारण से दोबारा परीक्षा देना चाहते थे। शिक्षकों और अभिभावकों की सलाह पर इन छात्रों ने दूसरी परीक्षा दी और अपने प्रदर्शन में सुधार किया।
छात्रों का कम हुआ परीक्षा का तनाव
शिक्षा विभाग के विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत शुरू की गई यह व्यवस्था छात्रों के लिए राहत साबित हो रही है। अब विद्यार्थियों का पूरा भविष्य केवल एक परीक्षा पर निर्भर नहीं रहता। दूसरी परीक्षा मिलने से उन्हें अतिरिक्त तैयारी का समय मिलता है और वे केवल उन विषयों पर ध्यान दे सकते हैं, जिनमें उन्हें सुधार करना होता है। इससे मानसिक दबाव भी पहले की तुलना में काफी कम हो जाता है।
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कैसे काम करती है Best of Two व्यवस्था?
CBSE ने वर्ष 2026 से कक्षा 10 के छात्रों के लिए Best of Two नियम लागू किया है। इसके तहत यदि कोई छात्र दोनों बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होता है, तो हर विषय में दोनों प्रयासों के अंकों की तुलना की जाती है। जिस परीक्षा में अधिक अंक मिलते हैं, वही अंक अंतिम मार्कशीट में दर्ज किए जाते हैं।
उदाहरण के लिए, यदि किसी छात्र को पहली परीक्षा में गणित में 74 अंक और दूसरी परीक्षा में 88 अंक मिलते हैं, तो अंतिम मार्कशीट में 88 अंक दर्ज होंगे। वहीं यदि दूसरी परीक्षा में केवल 68 अंक आते हैं, तो पहले के 74 अंक ही मान्य रहेंगे। यह नियम हर विषय पर अलग-अलग लागू होता है, इसलिए एक विषय में सुधार का असर दूसरे विषयों के अंकों पर नहीं पड़ता।
छात्रों के लिए क्यों फायदेमंद है नई व्यवस्था?
Best of Two प्रणाली उन छात्रों के लिए खासतौर पर फायदेमंद है जो पहली परीक्षा में किसी वजह से अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाते। अब उन्हें दूसरा मौका मिलता है, जिससे वे बेहतर तैयारी के साथ परीक्षा देकर अपने अंक सुधार सकते हैं। इससे न केवल रिजल्ट बेहतर होता है, बल्कि छात्रों का आत्मविश्वास भी बढ़ता है और परीक्षा का तनाव काफी हद तक कम हो जाता है।












